डीगढ़ : 26 जनवरी 2016 को हम 67वां रिपब्लिक-डे मना रहे हैं। इस मौके पर देश के ईमानदार आलाअधिकारियों को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया जाता है। इस खास मौके पर आपको बताने जा रहा है करप्शन को लेकर लड़ाई लड़ने वाले हरियाणा के चर्चित आईएएस अशोक खेमका के बारे में, जिन्हें सम्मान दो दूर, बल्कि ईमानदारी के एवज में 22 साल में 46 तबादले झेलने पड़े। बता रहे है इनकी कहानी, इनकी ही जुबानी…

सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की कंपनियों और डीएलएफ की लैंड डील उजागर करके चर्चा में आए…
हरियाणा में कांग्रेस सरकार होते हुए भी डीजी कंसोलिडेशन के पद पर रहकर यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा की कंपनियों और डीएलएफ की लैंड डील उजागर करके चर्चा में आए थे आईएएस अशोक खेमका।

इसके बाद उन्होंने गेहूं बीज खरीद घोटाला, रक्सिल दवा खरीद घोटाला उजागर किया। इन कारणों से कांग्रेस सरकार में तो प्रताड़ित हुए ही। मौजूदा सरकार में भी ट्रांसपोर्ट कमिश्नर रहते हुए उन्होंने ओवरलोडिंग पर रोक लगाने के साथ ही ओवरसाइज व्हीकल्स के खिलाफ भी कार्रवाई की। नतीजा फिर वही मात्र 6 महीने में ट्रांसफर। अब तक करीब 46 ट्रांसफर झेल चुके खेमका इन दिनों पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग में प्रिंसिपल सेक्रेटरी हैं। उनसे उनके संघर्ष पर विशेष बातचीत की।

सवालः चुनाव से पहले भाजपा ने आपकी खूब तारीफ की, अब साइडलाइन क्यों कर दिया
खेमका बोले, मैं, कुछ नहीं कहूंगा, किसने क्या कहा और किसने क्या किया, हम सब साक्षी हैं…।
सवालः आपने 22 साल में 46 ट्रांसफर झेले हैं। आपको नहीं लगता कि आज भी भ्रष्टाचार हावी है।
जवाबः मैंने सर्विस के पहले 22 वर्षो में 46 तबादले झेले। किन्तु पिछले 3 वर्षों में पार्श्व कर दिए जाने के कारण केवल 2 तबादले हुए हैं। जहां तक करप्शन हावी होने की बात है तो आपकी बात सही हो सकती है, लेकिन इतिहास गवाह है कि जब भी भ्रष्टाचार रूपी रावण का युद्ध ईमानदार रूपी राम से हुआ है, तो जनभावना हमेशा ईमानदारी के साथ होती है। ये जनभावना ही आज के राम का अस्त्र-शस्त्र है।

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