Haryana/Alive News : सीबीआई ने शनिवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा और यूपीएससी के एक वर्तमान सदस्य के घर समेत 20 स्थानों पर छापेमारी की. मामला गुड़गांव में भूमि के अधिग्रहण में कथित अनियमितता का है. सीबीआई ने रोहतक, गुड़गांव, पंचकूला समेत दिल्ली में छापेमारी की.

CBI ने हुड्डा के घर समेत दो पूर्व आईएएस अधिकारियों- तत्कालीन प्रधान सचिव एमएल तयाल और यूपीएसएसी के सदस्य छत्तर सिंह के अलावा वर्तमान आईएएस अधिकारी एसएस ढिल्लन के परिसर की भी तलाशी ली है. एजेंसी ने इस मामले में पिछले साल सितंबर में ही मामला दर्ज किया था. आखिर CBI के पास ऐसी क्या वजहें हैं जिसकी वजह से उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री के घर छापेमारी की? चलिए जानते हैं.

1. 27 अगस्त 2004 से 24 अगस्त 2007 के बीच निजी बिल्डरों ने हरियाणा सरकार के अज्ञात अधिकारियों की मिलीभगत से मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला के किसानों और अन्य भूस्वामियों से लगभग 400 एकड़ जमीन बेहद कम दाम में खरीदी. इसके लिए उन्हें सरकारी अधिग्रहण का डर दिखाया गया था.

2. इस प्रक्रिया में पहले तो हरियाणा सरकार ने गुड़गांव जिले के गांव मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला में औद्योगिक मॉडल टाउनशिप की स्थापना के लिए 912 एकड़ जमीन के अधिग्रहण के लिए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अधिसूचना जारी की थी. लेकिन बाद में निजी बिल्डरों ने भूस्वामियों को सरकार द्वारा सस्ती दर पर अधिग्रहण का डर दिखाकर कथित तौर पर उनसे जमीन हथिया ली.

3. उद्योग निदेशालय ने 24 अगस्त, 2007 को इस भूमि को अधिग्रहण प्रक्रिया से बाहर कर दिया.

4. भूमि को अधिग्रहण प्रक्रिया से बाहर करना सरकारी नीति का उल्लंघन है और यह कदम वास्तविक भूमालिकों के बजाए बिल्डरों, उनकी कंपनियों और एजेंटों के पक्ष में है.

5. सीबीआई के एफआईआर में आरोप यह भी लगाया गया है कि इस तरह लगभग 400 एकड़ भूमि जिसकी बाजार में उस वक्त कीमत प्रति एकड़ चार करोड़ रुपये से अधिक थी. इस तरह, कुल मिलाकर इसकी कीमत लगभग 1,600 करोड़ रुपये थी उसे निजी बिल्डरों और अन्य लोगों ने भोलेभाले भूमालिकों से कथित तौर पर महज 100 करोड़ रुपये में खरीद लिया.

6. इस अनियमितता के तहत गुड़गांव के गांव मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला के भूमालिकों को 1,500 करोड़ रुपये का घाटा हुआ.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here