प्रद्युम्न मर्डर केस : सीबीआई अशोक के खिलाफ सबूत पेश करने में नाकमयाब

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Gurugram/Alive News : प्रद्युम्न मर्डर केस में मंगलवार को एडिशनल सेशंस जज रजनी यादव ने आरोपी बस कंडक्टर अशोक कुमार को 73 दिन बाद बेल दे दी। कोर्ट ने माना कि अशोक के खिलाफ सीबीआई कोई सबूत पेश नहीं कर पाई। पिछली सुनवाई में सीबीआई ने उसकी बेल का विरोध किया था। अशोक को 8 सितंबर को हरियाणा पुलिस ने अरेस्ट किया था। सोमवार को कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें दी थीं। इसके बाद कोर्ट ने मंगलवार तक अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

 

अशोक के खिलाफ सबूत पेश नहीं कर पाई सीबीआई
– न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक गुड़गांव डिस्ट्रिक्ट कोर्ट जज ने माना कि अशोक के खिलाफ सीबीआई कोई सबूत पेश नहीं कर पाई। अशोक ने मामले को जिंदगी और मौत का सवाल बताया था, लिहाजा उसे 50 हजार के बॉन्ड पर जमानत दे दी।अशोक के वकील अनिल शर्मा ने कहा, “कॉन्स्टिट्यूशन के आर्टिकल 21 के तहत जमानत दी गई है।

हरियाणा पुलिस और सीबीआई की जांच में काफी फर्क है। हमें कोर्ट ने बेनिफिट ऑफ डाउट (संदेह का फायदा) दिया।”
– प्रद्युम्न के पिता वरुण ने कहा, “एक ऑडियो क्लिप के बारे में मुझे मीडिया रिपोर्ट्स से ही पता चला था, इसमें अशोक और अरेस्ट किए गए स्टूडेंट की फैमिली की बीच हुई बातचीत थी। सीबीआई मामले की जांच कर रही है। फैसले का इंतजार कर रहे हैं।”वरुण के वकील सुशील टेकरीवाल ने कहा, “प्रद्युम्न के पिता इंसाफ के लिए लड़ाई जारी रखेंगे। हमें कानून का पूरा भरोसा है। हरियाणा पुलिस ने सही दोषी को बचाने की कोशिश की। इससे पूरी जांच पर असर पड़ा।”
डीएनए रिपोर्ट में ब्लड सैंपल मैच नहीं हुए : मोहित
– सोमवार को अशोक के वकील मोहित वर्मा ने बताया था कि कोर्ट में सीबीआई ने आरोपी अशोक की डीएनए टेस्ट और फोरेंसिक रिपोर्ट पेश की। ब्लड सैंपल मैच नहीं हुआ। लिहाजा अशोक को जमानत मिलनी चाहिए। जब सीबीआई ने स्टूडेंट को आरोपी मानते हुए गिरफ्तार कर लिया, फिर अशोक क्लीन चिट देने में क्या दिक्कत है?
सीबीआई ने अशोक की जमानत का विरोध किया
– कोर्ट में सीबीआई वकील ने कहा कि केस की अभी जांच चल रही है। कंडक्टर अशोक को क्लीन चिट नहीं दी गई है। सभी फैक्ट्स पर हमारी नजर है। केस में जब तक सीबीआई चार्जशीट पेश नहीं कर देती, तब तक किसी को क्लीनचिट नहीं दी जा सकती।
– सीबीआई पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि अशोक को इस स्टेज पर राहत नहीं दी जा सकती, भले ही सीबीआई ने मामले में छात्र को आरोपी बनाया हो।
वरुण के वकील बोले- केस में पॉक्सो एक्ट कठिनाई
– वरुण के वकील सुशील टेकरीवाल ने बताया कि गुड़गांव पुलिस मामले की जांच करती तो कोई विवाद था ही नहीं। चूंकि मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है और उसकी स्पेशल कोर्ट पंचकूला में है। ऐसे में मामला गुड़गांव कोर्ट या पंचकूला कोर्ट में हो, इसकी स्थिति पहले स्पष्ट होनी चाहिए। टेकरीवाल ने बताया कि गुड़गांव पुलिस ने प्रद्युम्न मर्डर में आरोपी कंडक्टर अशोक पर हत्या, आर्म्स और पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज किया है।
– “पॉक्सो एक्ट के मामले की जिला कोर्ट में सुनवाई होनी चाहिए। हालांकि अब केस की जांच सीबीआई कर रही है और कंडक्टर अशोक को आरोपी नहीं माना है। ऐसे में पॉक्सो एक्ट का मतलब नहीं है। सीबीआई ने 11वीं के स्टूडेंट को अरेस्ट किया है। स्टूडेंट अगर एडल्ट घोषित होता है तो उसके लिए अलग गुड़गांव कोर्ट में सुनवाई होगी। यदि आरोपी नाबालिग घोषित होता है कि उसके लिए जुवेनाइल कोर्ट में सुनवाई होगी। ऐसे में इस केस में काफी पेचीदगी है। कोर्ट का क्षेत्राधिकार (ज्यूरिस्डिक्शन) पहले तय होना चाहिए।
कब हुआ था रेयान स्कूल में मर्डर?
– गुड़गांव के रेयान इंटरनेशनल स्कूल में 8 सितंबर को 7 साल के बच्चे का मर्डर कर दिया गया था। बॉडी टॉयलेट में मिली थी। इस मामले में पुलिस ने स्कूल बस के कंडक्टर अशोक कुमार को अरेस्ट किया था। आरोपी 8 महीने पहले ही स्कूल में कंडक्टर की नौकरी पर लगा था।
– अशोक ने मीडिया को बताया था, ”मेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई थी। मैं बच्चों के टॉयलेट में था। वहां गलत काम कर रहा था। तभी वह बच्चा आ गया। उसने मुझे देख लिया। मैंने उसे पहले देखा धक्का दिया। फिर खींच लिया। वह शोर मचाने लगा तो मैं डर गया। फिर मैंने उसे दो बार चाकू से मारा। उसका गला रेत दिया।”
– बाद में सीबीआई ने जांच की। इसके बाद 11वीं के स्टूडेंट को इस मर्डर केस में आरोपी बनाया गया।

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