2020 तक अगर प्रदूषण को सरकार ने नहीं रोका, तो भारत में कैंसर एक महामारी होगा : राजेन्द्र सिंह

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New Delhi / Alive News : रविवार को गाँधी पीस फॉउंडेशन में गंगा प्रेमियो द्वारा एक बैठक की गई, उसके बाद जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में भारत के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता एवं तरुण भारत संघ के संस्थापक राजेन्द्र सिंह ने कहा कि गंगा सदभावना यात्रा ने तीन दलो में विभक्त होकर गंगा के दोनो तरफ गंगा की निर्मलता के नाम पर अविरलता की हो रही हत्या का दर्शन किया। निर्मलता के नाम पर हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार को भी देखा। गंगा की बीमारी गंगा जल के प्रवाह कि कमी से ही है।

गंगा मां की बीमारी को बेटो के साथ जोड़कर देखे तो हृदय रोग की है लेकिन सरकार इसकी चिकित्सा के नाम पर घाटो का निर्माण कर रही है जो कि दिरवावटी बूढ़ी मां के जबड़े जैसे है। इससे गंगा और मां का स्वास्थ ठीक नही हो सकता। हमें मां का स्वास्थ बिगाडने के लिए हिमालय को कटते हुए देखा और नमामि गंगे के नाम पर औद्योगिक जहरीले नाले और शहरो के गंदे नाले बे-रोकटोक गंगा जी में डाले जा रहे है। ज्ञान कि राजधानी बनारस में गंगा को बचाने के नाम पर पर्दे लगाकर जापान के प्रधानमंत्री को गंगा दिखाई जाती है, गंगा जी में निर्मलता के नाम पर जो लूट हुई है वह हमें डराती है।

राजेन्द्र सिंह ने कहा कि इससे गंगा जी की बेकदरी कि जा रही है, आज सरकार गंगा जी को कहती माई है और करती उससे कमाई है। इसीलिए अब कानपुर से नीचे गंगा जल से कैंसर के रोगी बढ़ रहे है। गंगा जल की जो अपनी मूल शक्ति बॉयोफाज था उसकी अपनी प्रतिरोधी जीनों का स्तर अब “सुपर बग” में जाता दिख रहा है। यह अब गंगा जी के दोनों तरफ 60 गुना अधिक पाया गया है। अब हमने एन्टीबॉयोटिक्स एवं अन्य फॉमोस्टिक्ल पर कड़े कानून नहीं लगाए तो ये “सुपर बग” मानव जीवन पर कहर ढ़ाहने वाले होंगे।अभी तक गंगा में हुए विभिन्न अध्ययनो से गंगा घाटी में कार्बनिक, अकार्बनिक, भारी धातुओ जैसे आर्सेनिक, सीसा कैडमियम, फ्लोराईडस, मरकरी के बहुत भारी भार के साथ गंगा बहती है। जयदिप विस्वास -चितरंजन नेशनल इंस्टीटयूट्स कोलकता के निदेशक, इसने 140 मछलियों की प्रजातियों, 90 उभयचरों, दर्लभ गंगा नदी डॉल्फिन और गंगा के विमानों में रहने वाले मनुष्यों पर भी चिंता व्यक्त की है।

भारतीय चिकित्सा अनुसनधान परिषद के तहत राष्ट्रीय रजिस्ट्री कार्यक्रम के हाल के अध्ययनो में कहा गया है कि उत्तरप्रदेश, बिहार, बंगाल में गंगा किनारे रहने वालों को देश में कही भी कैंसर होने का अधिक खतरा है। प्रत्येक 10000 व्यक्तियों में 450 पुरुष और1000 महिलाएं पित्ताशय, गुर्दे, मुत्राशय, प्रोस्टेट, ग्रासनली के कैंसर से पीड़ित है। इसने त्वचा की समस्याओं और शिशु विकलांगता और शिशु मृत्यु दर में भी वृद्धि की है। डॉ समीर कौल ने कहा कि 2020 तक अगर सरकार प्रदूषण को रोकने के लिए कड़े कदम नही उठाती है, तो भारत में कैंसर एक महामारी होगा। राजेन्द्र सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति में यह भी बताया कि सदभावना यात्रा के बाद अब 12 जनवरी से गंगा बचाओ दल ने फिर से यात्रा सुरु की हुई है और ये यात्रा तब तक चलेगी जब तक सरकार द्वारा गंगा प्रेमियों की मांगे नहीं मान ली जाती। बैठक में श्वेत पत्र 2018-19 भी जारी किया गया।

बैठक में हरियाणा के प्रभारी एवं पर्यावरणविद डॉ जगदीश चौधरी, पर्यावरणविद एवं वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेंदर रावत, अरुण के अलावा सभी राज्यों के गंगा प्रेमी मौजूद थे।

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