एक किताब जिसमे फ्रेंच फ्राइज़ के वो ऐतिहासिक पन्ने

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Alive News : केएफ़सी के फ्राइड चिकेन हों, मेक्डॉनल्ड्स का बर्गर सबके सच्चे साथी हैं, फ्रेंच फ्राई. दुनिया के हर कोने में मिल जाएंगे. कनाडा में इनका पोटीन रूप मशहूर है, तो पेरिस में स्ट्रीक फ्रिटे. और बेल्जियम में फ्रीटेन.
तले हुए आलू के इन टुकड़ों पर हर देश अपना दावा ठोकता है. अपने यहां का बताता है. इनके नाम के आधार पर फ्रेंच फ्राइज़ को फ्रांस की देन माना जाता है. लेकिन, फ्रेंच फ्राइज़ पर अमरीका भी अपना दावा ठोकता है. वहीं कनाडा के क्विबेक सूबे के बाशिंदे इसे अपनी खोज बताते हैं.

अब फ्रेंच फ्राइज़ का नया दावेदार खड़ा हो गया है. बेल्जियम के लेखक अल्बर्ट वर्देयन का दावा है कि फ्रेंच फ्राइज़ पहली बार बेल्जियम में ही बनाए गए थे. अल्बर्ट ने कैरेमेंट फ्रिटेस नाम से एक किताब लिखी है, जो फ्रेंच फ्राइज़ के इतिहास के पन्ने खंगालती है.वो कहते हैं कि अमरीकियों का दावा ग़लत है कि उन्होंने इसे सबसे पहले बनाया. फ्रेंच फ्राईज़ असल में बेल्जियम के उस इलाक़े में सबसे पहले बनाए गए, जहां फ्रेंच भाषा बोली जाती है.

बेल्जियम के लोगों के बीच ये क़िस्सा प्रचलित है कि फ्रेंच फ्राईज़ सबसे पहले बेल्जियम के नामुर इलाक़े में बनाए गए थे. क़िस्से के मुताबिक़, नामुर के बाशिंदों को तली हुई मछली बहुत पसंद थी. लेकिन 1680 में वहां से बहने वाली म्यूज़ नदी जम गई. जब मछलियां मिलनी बंद हो गईं, तो लोगों ने आलू को टुकड़ों में काटकर उसे तलकर खाना शुरू किया और इस तरह से फ्रेंच फ्राईज़ की शुरुआत हुई.

इस कहानी पर यक़ीन करने वाले कहते हैं कि फ्रेंच फ्राईज़ को ये नाम यहां पर पहले विश्व युद्ध के दौरान बसेरा बनाने वाले अमरीकी सैनिकों ने दिया था क्योंकि यहां के लोग फ्रेंच ज़बान बोलते थे.बेल्जियम ने यूनेस्को में अर्ज़ी दी है कि फ्रेंच फ्राईज़ को बेल्जियम की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाए. लेकिन, बहुत से लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें इस कहानी पर यक़ीन नहीं.


फ्रांस की लिएज यूनिवर्सिटी में खान-पान के प्रोफ़ेसर पियर लेक्लेयर ऐसे ही एक इंसान हैं. उन्होंने फ्रेंच फ्राईज़ पर लिखे लेख में कहा कि इसे लेकर बेल्जियम जो कहानी सुना रहा है, उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता.
लेक्लेयर कहते हैं कि अगर नामुर से जुड़ी फ्रेंच फ्राईज़ की कहानी सही भी है, तो, ऐसा 1680 में तो नहीं ही हुआ होगा. हो सकता है कि नदी जमने और लोगों के मछली की जगह आलू तलकर खाने का ये वाक़िया 1735 या उसके बाद का हो. क्योंकि, 1735 तक तो इस इलाक़े में आलू होता ही नहीं था.


लेक्लेयर कहते हैं कि अगर नामुर के रहने वालों ने आलू की खेती शुरू भी कर दी थी, तो ये बहुत मुश्किल है कि वो उसे तलकर खाते होंगे.पियर लेक्लेयर कहते हैं, “18वीं सदी में वसा यानी तेल, घी या बटर इतनी महंगी चीज़ थी कि वो आम इंसान की पहुंच से बाहर थी. वो सिर्फ़ रईसों की पहुंच में थे. उस दौर तक लोगों ने सब्ज़ियों के बीजों से तेल निकालना शुरू किया था, जिसे वो सीधे ही खा जाते थे. वो इसे रोटी या सूप के साथ इस्तेमाल नहीं करते थे.”

पियर लेक्लेयर कहते हैं कि ऐसे में ये दावा कि लोगों ने आलू को फ्राई करके इस्तेमाल करना शुरू किया, ग़लत ही है.
बेल्जियम की कहानी को नकारने वाले पियर लेक्लेयर अकेले इंसान नहीं. फ्रांस के कुछ लोग कहते हैं कि फ्रेंच फ्राईज़ सबसे पहले पेरिस के सबसे पुराने पुल पोंट न्यूफ़ पर एक रेहड़ी वाले दुकानदार ने बेचने शुरू किए थे. तब उसका नाम पॉम पोंट-न्यूफ़ था.

फ्रांस में आमद के साथ ही फ्रांसीसी जनता ने आलू को शक की निगाह से देखना शुरू किया था. हालांकि 18वीं सदी में कृषि विशेषज्ञ एंतोइन ऑगस्टिन पार्मेंटियर ने आलू के फ़ायदे जनता को समझाए, तो फ्रांस में भी आलू की खेती होने लगी.

वो आलू के खेतों की रखवाली के लिए सैनिकों को तैनात करते थे, ताकि लोगों को लगे कि ये बड़ी कीमती चीज़ है. कई बार एंतोइन लोगों को इसकी चोरी करने के लिए उकसाते थे, ताकि ये संदेश जाय कि ये बड़ी काम की फसल है.
1795 तक फ्रांस के लोगों के बीच आलू लोकप्रिय हो चला था. ऐसे में ये कहना कि पहली बार फ्रेंच फ्राइज़ फ्रांस में तैयार हुई थी, ज़्यादा तार्किक लगता है. हो सकता है कि पहले-पहल रेहड़ी वालों ने ही इन्हें बनाया हो.
पियर लेक्लेयर कहते हैं कि फ्रेंच फ्राईज़ का आविष्कारक हमेशा गुमनाम ही रहेगा. इस बात की संभावना ज़्यादा है कि वो कोई रेहड़ी वाला रहा होगा. शायद वो पेरिस का रहा हो!

हो सकता है कि ये पहेली अनसुलझी ही रहे कि पहली बार फ्रेंच फ्राइज़ किसने बनाई. फ्रेंच फ्राइज़ का पहला ज़िक्र हमें बेल्जियम की बीसवीं सदी में छपी गाइड ट्रीटाइज़ ऑन डोमेस्टिक इकोनॉमी ऐंड हाईजीन में मिलता है.पियर लेक्लेयर कहते हैं कि इस बात से ये नहीं साबित होता कि फ्रेंच फ्राइज़ का आविष्कार बेल्जियम में हुआ क्योंकि इस तरह तो फ्रांस में भी पॉम सूफ़्ले बनते हैं, जो आलू के ही होते हैं.

खान-पान की इतिहासकार मैडेलीन फेरियर कहती हैं कि फ्रेंच फ्राइज़ सड़क किनारे बिकने वाले खान-पान की बेटी है.अब शायद बहस इस बात की ज़्यादा हो कि किसने फ्रेंच फ्राईज़ के साथ सबसे शानदार प्रयोग किया.अमरीका के लोगों का मानना है कि दुनिया में सबसे ज़्यादा फ्रेंच फ्राइज़ का शौक़ अमरीकी लोगों को है. औसत अमरीकी नागरिक साल में 29 पाउंड फ्रेंच फ्राईज़ खा जाता है. अमरीकी तो इसे इस कदर अपना मानते हैं कि जब 2000 के दशक में फ्रांस ने इराक़ पर अमरीकी हमले का समर्थन नहीं किया, तो अमरीकी जनता ने फ्रेंच फ्राईज़ को फ्रीडम फ्राइज़ बुलाना शुरू कर दिया.

वहीं, कनाडा ने इसके साथ और भी प्रयोग कर डाला है. वहां पर फ्रेंच फ्राइज़ को चीज़ और दही की ग्रेवी के साथ परोसते हैं, जिसे पोटिन कहा जाता है. पोटिन को सबसे पहले कनाडा के फ्रेंच भाषी सूबे क्विबेक में बनाया गया था. क्विबेक के दो शहर वारविक और ड्रमंडविल ये दावा करते हैं कि सबसे पहले उनके यहां ही ये डिश पोटिन तैयार की गई थी.

फिश ऐंड चिप्स भी फ्रेंच फ्राज़ का रूप

कनाडा के खान-पान के लेखक चार्ल्स एलेक्ज़ेंडर थियोरे कहते हैं कि पोटिन की दो-तीन अच्छी किस्में हम कनाडा में पाते हैं. मगर असली और पहली वाली कौन सी है, ये कहना मुश्किल है.आज क्विबेक में फ्रेंच फ्राइज़ की ये डिश बहुत लोकप्रिय है. इसमें चीज़ और दही भी होता है. मगर इसे फ्रेंच फ्राइज़ के बग़ैर नहीं बनाया जा सकता.

ब्रिटेन में बेहद लोकप्रिय फिश ऐंड चिप्स भी फ्रेंच फ्राइज़ का ही एक रूप है. चिप्स, फ्रेंच फ्राईज़ से थोड़े अलग होते हैं. मगर वो बुनियादी तौर पर फ्राईज़ ही होते हैं.1928 में न्यूयॉर्क टाइम्स ने कहा था कि फिश ऐंड चिप्स, अमरीका के हॉट डॉग की तरह ही नेशनल डिश हैं. मगर इनके शौक़ीनों को ‘फिशीज़’ के बजाय ‘चिपीज़’ कहा जाता है.वहीं फ्रांस में हम फ्रेंच फ्राईज़ के और ही रूप देखते हैं. यहां ग्रिल्ड मांस के साथ फ्रेंच फ्राईज़ परोसे जाते हैं.

वहीं पेरिस के मशहूर रेस्तरां पोंट न्यूफ़-ला फ्रिटे फ्रांस्वा में चिप्स और फ्राइज़ का मिला-जुला रूप बनाकर पेश किया जाता है. इस रेस्तरां के सह संस्थापक ज्यां पॉल लुबो इसे ही असली फ्रेंच फ्राइज़ कहते हैं.

इन्हें बनाने में फ्रांस में ही उपजे आलू को इस्तेमाल किया जाता है. इन्हें रोज़ाना ताज़ा ही बनाया जाता है. फ्रोजेन फ्रेंच फ्राइज़ को गर्म कर के नहीं परोसा जाता. लुबो कहते हैं कि उनके रेस्तरां की फ्रेंच फ्राईज़ और बेल्जियन फ्राईज़ में फ़र्क़ करना मुश्किल है.

वैसे बाक़ी जगह तो फ्रेंच फ्राइज़ साइड डिश होती हैं. लेकिन बेल्जियम में यही मूल खाना होता है. इन्हें नीदरलैंड से आए बिंजे नस्ल के आलुओं से तैयार किया जाता है. बेल्जियम में फ्रेंच फ्राइज़ बेचने वाली रेहड़ियों को फ्रीटकोट कहा जाता है.

हाल ही में इन्हें 50 हज़ार यूरो प्रति गाड़ी की दर से नए सिरे से लोकप्रिय बनाने की योजना बनी. लेकिन, इसे आम लोगों का समर्थन नहीं मिला. स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्रेंच फ्राइज़ बेचने वाले फ्रीटकोट पुराने ज़रूर हैं, लेकिन हमारी संस्कृति का हिस्सा हैं.

तो, बेल्जियम के लोग फ्रेंच फ्राइज़ को ज़्यादा नाज़-नख़रे के साथ नहीं खाते, जैसा फ्रांसिसियों की आदत है. वो इसे सरल तरीक़े से ही खा लेते हैं. यही तरीक़ा फ्रेंच फ्राईज़ पर बेल्जियम का हक़ मज़बूत बनाता है.

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