अधिकारियों की लापरवाही से कैंसर जैसी घातक बीमारी की भेंट चढ़ाता एनसीआर

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मथुरा रोड पर सड़क किनारे धूल मिट्टी का जमावड़ा

धुम्रपान से ही नहीं एनसीआर की आबोहवा से भी बढ़ा कैंसर का खतरा
Faridabad/Alive News : धुल की चाढऱ में लिपटी स्मार्ट सिटी की आबोहवा में लोगों की सांसे अटक रही है। सडक़ निर्माण के अभाव और टूटी सडक़ों से उडऩे वाली धूल तथा धुआं उगलने वाले वाहनों ने एनसीआर के लोगों को कैंसर जैसी घातक बिमारियों की भेंट चढ़ा़ना शुरू कर दिया है। अधिकारियों की लापरवाही का ये खेल अफसोस आम जन के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। इस बात से सब वाकिफ है कि स्मार्ट सिटी टॉप टेन पॉल्यूटिड सिटी में अपना नाम दर्ज करा डार्क जोन में शामिल हो चुकी है।

प्याली हार्डवेयर रोड की टूटी सड़को के कारण उड़ती धूल

इसीलिए बढ़ते प्रदूषण लेवल और लोगों के स्वास्थ्य को देखेते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा दिशा-निर्देश देते हुए उद्योग और निर्माण कार्य पर विराम लगाया गया था। इसके अलावा एनजीटी विभाग की ओर से सडक़ों के किनारे उडऩे वाली धूल से लोगों को राहत देने के लिए जल छिडक़ाव के आदेश भी दिए गए थे। लेकिन न तो सडक़ों पर जल छिडक़ाव हो रहा है और न ही सडक़ों से उडऩे वाली धूल से लोगों को राहत मिली है। हालांकि प्रशासन एनजीटी के आदेश के दौरान ही कुछ दिन के लिए सडक़ों पर जल छिडक़ाव धूल रोकने के लिए किया था। खैर, वजह चाहे जो भी रही हो, लेकिन अफसरों और अधिकारियों की ये लापरवाही लोगों के स्वास्थ्य के साथ जानलेवा साबित हो रही है।

सालों से मरम्मत की राह देखती शहर की मुख्य सडक़ें
आपको बता दें, एनआईटी क्षेत्र की मुख्य सडक़ों में बीके से हार्डवेयर, हार्डवेयर से बाटा और प्याली से हार्डवेयर, नीलम-बाटा रोड़ इत्यादि सडक़े शामिल है। इन सडक़ों पर आज भी निर्माण कार्य अधूरे पड़े है, जिससे वहां से आवागमन करने वाले राहगीर को भारी मात्रा में उडऩे वाली धूल के कारण खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। लेकिन निगम अधिकारियों की लापरवाही के कारण शहर की सबसे व्यस्त सडक़ों के निर्माण की फाईल धूल फंाक कर रही हैं, क्योंकि सडक़ बनाने के नाम पर इन सडक़ों को सीवर लाईन, पाइप लाईन डालने के नाम पर खोद तो दिया जाता है, पर पुन: बनाया नही जा रहा है। जिससे सालों साल यह सडक़े निर्माण के अभाव में लोगों की दुर्घटनाओं का कारण भी बन रही हैं।

कैंसर के लिए धुम्रपान से ज्यादा प्रदूषित हवा अहम वजह
वायु प्रदूषण के कारण फेफड़े में कैंसर का खतरा बना रहता है। क्योंकि धूम्रपान फेफड़े के कैंसर की मुख्य वजह मानी जाती थी, लेकिन हाल ही के दिनों में यह बात भी सामने आई है कि फेफड़े के कैंसर के बढ़ते मामलों में प्रदूषित हवा की भूमिका भी बढ़ रही है। कैंसर धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों को भी हो रहा है। क्योंकि प्रदूषित हवा में छिपे मिट्टी के धूल कण श्वास नली के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश कर विभिन्न श्वास संबंधित और कैंसर जैसी बिमारीयों को भी जन्म देते हैं। इसलिए ऐसी जहरीली आवोहबा में सांस लेना किसी भी आम व्यक्ति के जानलेवा साबित हो सकता है।

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