Faridabad/Alive News : आचार्य वह है, जिसका आचरण अनुकरणीय है। तनाव से अध्यापक अपने प्रोफेशन के साथ न्याय नहीं कर सकता। आज अध्यापक अध्यापन की ओर नहीं बल्कि धन की ओर भाग रहा है। ऐसी स्थिति में भारत के भविष्य का भला कैसे हो सकता है। यह वाक्य प्रोफेसर डॉ. जगदीश चौधरी ने खेडी कला स्थित परहंस सी.सै. स्कूल में अलाईव न्यूज द्वारा आयोजित ‘अध्यापक और अध्यापन’ सेमिनार के दौरान कहे।

उन्होंने कहा कि आदर्श अध्यापक प्रत्येक अध्यापक बन सकता है। परन्तु अध्यापक को अपने दैनिक जीवन में तीन क्रियाओं को अपनाने की आवश्यकता है, पहला पुस्तकों से प्रेम करना होगा, दूसरा हर रोज अपने व्यस्त समय में से आधा घण्टा निकालकर अध्ययन करना और तीसरा दिनभर की क्रियाओं का समरण सोने से पहले करने पर अध्यापक में ज्ञान के साथ-साथ आत्मिक शक्ति का भी प्रवाह होगा। डॉ.जगदीश ने कहा कि अध्यापक समाज में साधारण मनुष्य नहीं है, बल्कि वह सर्वश्रेष्ठ मनुष्यों में गीना जाता है।

उन्होंने कहा कि अध्यापक हमेशा अध्यापक रहता है, अध्यापक दूसरे लोगों की तरह अभिनय नहीं कर सकता। क्योंकि अध्यापक का रोल स्कूल, समाज और घर में एक जैसा ही होता है। उन्होंने कहा कि चिंतनशील अध्यापक के हाथों में विद्यार्थियों का भविष्य उज्जवल है। जो अध्यापक अपने कर्तव्य-धर्म की पालना करता है, धर्म उसकी रक्षा करता है। सही शब्दो में कहा जाए तो अध्यापक को अपने अध्यापन धर्म की पालना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि समाज में मास्टर शब्द अध्यापकों के साथ इस लिए जुडा हुआ है क्योंकि उनके पास सभी समस्याओं का समाधान होता है। डॉ. जगदीश ने अध्यापकों के खोते हुए सम्मान पर कहा कि अध्यापक को आज मर्यादित होकर रहना होगा तभी समाज में सम्मान मिल सकता है।

उन्होंने कहा कि समाज में कॉमन मैन श्रेष्ठ नही बन सकता लेकिन अध्यापक कॉमनमैन को श्रेष्ठ बना सकता है। एक गम्भीर विषय पर कहा कि आज गुरू का सम्मान इसलिए भी कम हो रहा है, क्योंकि अध्यापक ने अपना रिमोट दूसरो के हाथों में दे रखा है। इसलिए भी गुरू का सम्मान खतरे में है। जो खुद ज्ञान के लिए भटक रहा है वह दूसरों को ज्ञान क्या दे पाएगा। सेमिनार में उपस्थित अलाईव न्यूज के संपादक तिलक राज शर्मा ने अपने सम्बोधन में कहा कि अध्यापक शब्द ही जिम्मेदारियों भरा है। अध्यापकों को अध्यापन की ओर ले जाने का उद्देश्य अलाईव न्यूज द्वारा करीब चार साल पहले शुरू किया गया था।

इस मुहीम में दिल्ली एनसीआर से प्रोफेसर एवं शिक्षाविदों ने जुडक़र एक आर्दश अध्यापक की कल्पना की है। इन्ही प्रयासो के तहत स्कूलों में अध्यापक और अध्यापन पर सेमिनार आयोजित कर टीचर को फिर से आचार्य बनाने के लिए गम्भीरता से अध्यापकों को उनके कत्र्तव्यों का बोध कराया जा रहा है। परमहंस स्कूल के चेयरमैन हुकुमचंद नरवत ने स्कूल पहुंचने पर अलाईव न्यूज की टीम का बुके भेटकर स्वागत किया। वहीं कार्यक्रम के अंत में बालाजी कॉलेज के डायरेक्टर एवं प्रोफेसर डॉ. जगदीश व तिलक राज शर्मा का प्लांट भेटकर स्वागत किया।

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