एपेक्स अस्पताल मामला : इंजेक्शन से ली नवयुवक की जान

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अपने नवजात का मुंह तक नही देख पाया नवयुवक
Faridabad/Alive News : एनएच-3 स्थित एपेक्स अस्पताल में इलाज के दौरान गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने पर हुई युवक की मौत के बाद अस्पताल विवाद में घिरा हुआ है। अस्पताल में हुई लापरवाही के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने एपेक्स अस्पताल के सामने सडक़ पर ही मृतक के शरीर के साथ जमकर हंगामा किया और न्याय न मिलने तक शव का दाह संस्कार करने से इंकार कर दिया। परिजनों का कहना है कि एपेक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने युवक को इलाज के दौरान इंजेक्शन की ऑवरडोस दे दी थी, जिसके बाद ही युवक की हालत बिगडऩे लगी और मंगलवार सुबह इलाज के दौरान एम्स अस्पताल में युवक की मौत हो गई।

सूत्रों के मूताबिक मृतक युवक डिम्पी(33) डबुआ कॉलोनी का निवासी था। परिजनों ने बताया कि मृतक को बवासीर की शिकायत थी, जिसके चलते युवक ने 12 फरवरी को एपेक्स अस्पताल से दवाईंया ली, दवांईयों से राहत न मिलने पर डॉक्टर ने उसे ऑपरेशन करवाने की सलाह दी। 17 फरवरी को ऑपरेशन के लिए एपेक्स अस्पताल में पहुचंने पर युवक को एनस्थीसिया के इंजेक्शन लगाए गए, जिसके बाद से ही युवक की हालत बिगडऩे लगी और बिना परिजनों को बताए डॉक्टरों ने युवक को तुंरत एस्कॉर्ट अस्पताल में रैफर कर दिया।

वहां भी युवक की हालत में सुधार न दिखने पर परिजनों ने युवक को एम्स में भर्ती कराया, जहां उन्हें पता चला कि डिम्पी के अधिकतर ऑगर्नस नष्ट हो चुके और उनका बचना असंभव है। इसी बीच मंगलवार सुबह एम्स में इलाज के दौरान युवक की मौत हो गई। इस मौत को परिजनों ने एपेक्स अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही बताया और उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की। अस्पताल में हंगामे की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने परिजनों को शांत कराया। फिलहाल मामले की जाचं की जा रही है।

परिजनों को पहले दिया लालच फिर दी पुलिस की धमकी
युवकी की मौत से गुस्साए परिजनों को डॉक्टरों ने कम्पनसेशन के रूप में एक लाख रूपए देने की बात कहकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। लेकिन परिजन अपनी बात पर अडिग रहे। परिजनों का आरोप है कि उनकी बात ने मानने पर अस्पताल मैंनेजमेंट ने उन्हें पुलिस बुलवाकर अंदर करवाने की भी धमकी दी।

-सालों बाद घर आई खुशियां बदली मातम में
मृतक की बहन कविता ने बताया कि भाई डिम्री की शादी 2011 में हुई थी। उसके बाद पहली बार घर में नए मेहमान के आने की खुशी का सभी को बेसब्री से इंतजार था। लेकिन अचानक हुए इस हादसे नें सारी खुशियों को मातम में बदल दिया है। कविता ने बताया कि जहां एक तरफ भाभी स्वेता नें नौ साल बाद एक बेबी गर्ल को जन्म दिया, वहां दूसरी तरफ बेटी का चेहरा देखे बिना ही पिता ने अंतिम सांस ली।

-पति की मौत से बेखबर नवजात की मां
एक तरफ जहां मृतक की पत्नी स्वेता ने शादी के नौ साल बाद एक लडक़ी को जन्म दिया है। वहीं दूसरी तरफ पति की अकस्मात हुई मृत्यु की जानकारी अभी तक जच्चा को नही दी गई है, क्योंकि डॉक्टरों का कहना है अगर ऐसें में इस हादसे की सूचना जच्चा को मानसिक रूप से प्रभावित कर सकती है। इसलिए परिजनों ने स्वेता को इस बात से बेखबर रखा हुआ है।

-क्या कहना है आएमए के पूर्व अध्यक्ष का
इस तरीके के केस काफी संजिदा होते हैं। इसमें मरीज के बचने के कम चांस होते हैं। अस्पताल की ओर से इलाज में कोई लापरवाही नही बरती गई। मरीज की स्थिति के अनुसार उसे इंजेक्शन दिया गया था। हालांकि परिजनों की अस्पताल प्रशासन ने संतुष्टि करा दी है।

– डॉ.सुरेश अरोड़ा, पूर्व अध्यक्ष इंडियन मेडिकल एसोसिएशन।

-क्या कहते है पुलिस अधिकारी
यह मामला उनके संज्ञान में है। लेकिन पुलिस को परिजनों की ओर से कोई शिकायत नही दी है। लेकिन अस्पताल और परिजनों का आपसी समझौता हो गया है। अगर फिर भी कोई बात होती है तो पुलिस शिकायत मिलने पर अपना काम करेगी।
-हरदीप सिंह, इंस्पेक्टर थाना एसजीएम नगर।

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