सावधान ! जीरो बैलेंस बैंक अकाउंट कंही पड़ न जाए भारी

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बैंक में जीरो बैलेंस अकाउंट खुलवाना किसे अच्छा नहीं लगता? हर कोई चाहता है कि अकाउंट ऐसा हो, जिसमें रुपया जमा रखने की कोई शर्त न हो और बैंक चार्जेज भी कम से कम हों. लेकिन अब जब आप जीरो बैलेंस अकाउंट खुलवाने की सोचें तो बैंक के नियम और शर्तों को ध्यान से पढ लीजिएगा. ऐसा नहीं करना लखनऊ के धीरेंद्र श्रीवास्तव को मंहगा पड गया.

लखनऊ के परिवहन विभाग में क्लर्क की नौकरी करने वाले धीरेंद्र प्रताप श्रीवास्तव की मां का देहांत 7 दिसंबर को हो गया. उनकी मां सुल्तानपुर में उनके गांव में रहती थी. मां के क्रियाकर्म के लिए पैसे निकालने के लिए धीरेंद्र केनरा बैंक पहुंचे जहां उनकी सैलरी अकाउंट में आती थी. सैलरी एक तारीख को ही आई थी और घर खर्च के लिए उन्होंने अब तक अकाउंट से सिर्फ 10 हजार ही निकाले थे. उनके बैंक अकाउंट में करीब डेढ़ लाख रुपये पड़े हुए थे. इसलिए वो निश्चिंत थे. नोटबंदी के बावजूद धीरेंद्र को भरोसा था की मां के देहांत होने की वजह से उनका बैंक उनको कम से कम 14000 रुपये तो दे ही देगा.

धीरेंद्र का तब दिमाग चकरा गया. जब बैंक ने उनका चेक लौटाते हुए कहा कि वो अब इस महीने अपने सैलरी अकाउंट से एक रुपया भी नहीं निकला सकते. धीरेंद्र में जब इसकी वजह पूछी तो बैंक ने उन्हें बताया कि उनका अकाउंट जनधन अकाउंट है. यह बात वह मानने को तैयार नहीं थे, क्योंकि इसी बैंक अकाउंट में हर महीने 42,000 सैलरी आती थी और 50, 000 हजार से ज्यादा रुपये की रकम वह कई बार निकाल चुके थे. दूसरी बात ये कि उनका ये अकाउंट आठ साल पुराना था जब जनधन अकाउंट होता ही नहीं था.

हैरान परेशान धीरेंद्र ने ऑफिस में अपने साथियों को ये बात बताई तो पता चला कि वो इस मुसीबत के मारे अकेले नहीं हैं. उन्हीं के ऑफिस में करीब दो दर्जन लोग ऐसे थे, जिनका अकाउंट केनरा बैंक में था और सबको बैंक यही टका सा जवाब दे रहा था कि वो अब इस महीने दस हजार से ज्यादा नहीं निकाल सकते. सब के सब परेशान केनरा बैंक का चक्कर लगा रहे थे. धीरेंद्र की मां का निधन हुआ था, तो उन्हीं के दफ्तर में काम करने वाली ज्योति अवस्थी इसलिए परेशान थी कि इसी अकाउंट से उनके होम लोन की किश्त निकलती थी. परिवहन विभाग में ही काम करने वाले गिरिश को केनरा बैंक के मैनेजर ने कहा कि अगर दस हजार से ज्यादा रुपये निकालने हैं, तो इसी बैंक में एक दूसरा अकाउंट खुलवाओ और अपना पैसा उस अकाउंट में ट्रांसफर करा लो.

जब इस बारे में बैंक के ब्रांच मैनेजर एस के श्रीवास्तव से बात की, तो उन्होंने एक ऐसा राज खोला कि परिवहन विभाग के परेशान कर्मचारी भी हैरान हो गए. मैनेजर का कहना था सालों पहले केनरा बैंक ने जनधन अकाउंट जैसी ही एक सेवा शुरू की थी, जिसमें गरीब लोग जीरो बैलेंस पर अकाउंट खुलवा सकते थे, लेकिन इस अकाउंट में पैसा जमा करने और निकालने को लेकर कुछ शर्तें थी. इस अकाउंट का नाम ‘कैन सरल ‘ CAN SARAL ‘ था. अभी तक तो बैंक ने कभी इन शर्तों को लागू नहीं किया और लोग जितना चाहे रुपया डाल और निकाल रहे थे, लेकिन नोटबंदी के बाद अचानक बैंक ने इन नियम शर्तों को सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया और इस अकाउंट पर जनधन जैसी पाबंदी लागू कर दी. लोग परेशान हैं पर बैंक का कहना है कि अब एक ही तरीका है कि ये लोग दूसरा अकाउंट खोल कर अपना रुपया उसमें ट्रांसफर कर लें, यानी जीरो बलैंस अकाउंट खोलना इन लोगों को महंगा पडा.

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