बाबूजी, कुछ खाने को दे दो…

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फाइल फोटो
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Faridabad/Alive News: बाबूजी, कुछ खाने को दे दो, बच्चा भूखा है ये पंक्तियाँ आपने कही न कही और कभी न कभी तो अवश्य सुना होगा। कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन में शहर भर में भिक्षावृति को बढावा मिला है। जगह- जगह चौक चौराहों और सभी मार्किटों में भीख मांगने वाले छोटे बच्चें और महिलाओं को देखा जा सकता है। हर आने वाली गाड़ियों पर ये लोग आश भरी निगहाओं से देखते है, शायद कोई कुछ दे ही दे।

दरअसल, लॉकडाउन का समाज के हर तबके पर असर पड़ा है। झुग्गी- झोपड़ियों में रहने वाले लोग भी आर्थिक तंगी से जूझ रहे है, ऐसे में उनके पास भीख मांगने के अलावा और कोई विकल्प नही रह जाता, जिससे भिक्षावृति को बढ़ावा मिल रह है। सामाजिक संस्थाएं भी इन लोगों की मदत करने की हरसंभव कोशिश कर रही है, लेकिन फिर भी भीख मांगने वालों की संख्या में कमी आने की बजाय कई गुना इजाफा हुआ है।

एक तरफ सरकार लॉकडाउन में जनता हित के लिए बनाई गई लाभकारी योजनाओं का ढिंढोरा पीटते नहीं थक रही है लेकिन सच्चाई कोसों दूर है। इसका आइना बने झुग्गी- झोपड़ियों के गरीब लोग इस बात को सोचने पर मजबूर कर देते है कि आखिर सरकार की योजनाओं का कितना फायदा जरूरतमंद लोगों को मिला है।

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