बजट : वित्त मंत्री से GST को लेकर व्यापारियों की बढ़ी अपेक्षाएं

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Faridabad/Alive News : अगले हफ्ते पेश होने वाले बजट से लोगो को काफी उम्मीदें हैं। सब यही आशा करते हैं कि केंद्रीय वित्त मंत्री सीतारमण जनता को निराश नहीं करेंगी। सुखमय जीवन जीने के लिए ज़रूरी है कि हर वस्तु बैलेंस्ड रहे फिर चाहे नौकरी हो या फिर व्यापार हो। ऐसे में जब महंगाई इतनी बढ़ जाएगी और कमाई कम होगी तो मतभेद तो आएँगे ही। आर्थिक तंगी से जूझ रहा व्यक्ति दफ्तर के तनाव को घर लेकर जाएगा और घर के तनाव को दफ्तर लेकर जायेगा, जिससे कुछ सामान्य नहीं होगा।

क्या कहना है व्यापारियों का
छोटे से दूकानदार हैं। इतने की हमारी बिक्री नहीं होती जितने का हमारा खर्च हो जाता है। आधी तकलीफें तो व्यापारियों को जीएसटी (GST) की वजह से होती हैं क्योंकि इसके लागू होने के बाद से ही बढ़ती महंगाई और भी ज़्यादा बढ़ गयी है। होलसेलर के पास से हम माल लाते हैं वो जीएसटी काटता है लेकिन हम इसे लगाने के बाद कीमतें बढ़ा कर सामान नहीं बेच सकते, क्योंकि इसका दुकानदारी पर विपरीत असर पड़ता है।
– राहुल नैन, दुकानदार, सेक्टर-10

मनुफक्चरर्स से रॉ मटेरियल लाकर अपनी उस चीज़ को बनाकर होलसेलर्स को देकर आते हैं। इतने का सामान नहीं है जितना टैक्स कट जाता है। मैं तो यही अपेक्षा करता हूँ कि जीएसटी बिलकुल ही हटा दिया जाए या फिर कम किया जाए ताकि लोग भी नुक्सान में न जाकर थोड़ा प्रॉफिट अर्न कर सकें।
– मोहित कौशिक, बिजनेसमैन, सेक्टर-24

गहनों का शोरूम है जहाँ माल खरीदकर डालना पड़ता है। अब लोगों की शिकायत हम से यही होती है कि आप दूसरे दुकानदारों से महंगा क्यों बेच रहे हैं। बताना चाहेंगे कि बाकी के दुकानदार बिना टैक्स के बेचते होंगे या फिर उनके गहनों में प्यूरिटी कम होगी, इस पर कोई टिपण्णी नहीं कर सकते। लेकिन, हाँ, हमारे गहने गारंटी के साथ आते हैं और टैक्स कम्पनी को होने वाले मुनाफे से ही देते हैं जिसके लिए टैक्स लगाकर बेचना अनिवार्य होता है। अगर, सरकार बेमतलब के टैक्स इस बजट में हटा देती है, तो दुकनदार भी वस्तुओं के दाम में उसी हिसाब से कटौती कर देंगे।
– रमेश कुमार, नागरिक

मैं दिन रात ऑटो चलाकर अपना और अपने परिवार का पेट पालने की कोशिश करता हूँ। सरकार आए दिन किसी न किसी वस्तु के दाम बढ़ा देती है मगर, हमारे पास इतनी कमाई ही नहीं है कि हम अपनी मूलभूत आवश्यकता पूरी कर सकें। निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और घर का राशन पूरा करना हालत खराब कर देता है। 1000 रुपये भी कमा लेता हूँ तो भी उनको पढ़ाने के लिए फीस नहीं होती। उम्मीद करता हूँ कि सरकार नए बजट में स्कूल की फीस कम करने का आदेश दे जिस से कि हमारे बच्चे भी पढ़ लिख कर कुछ बन सकें।
– अनिल झा, ऑटो चालक

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