बेटी का पिता होना अभिशाप न समझे लोग : ब्रह्मप्रकाश गोयल

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समाज में जहाँ आज लड़कियां फाइटर जेट चला रही है उस समाज मे अभी भी लड़की की शादी दहेज़ के कारण एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी हो जाती है और उसी समय एक बेटी का बाप अपने आप को कमजोर महसूस करता है. महाराजा अग्रसेन विवाह सम्मेलन के अध्यक्ष ब्रह्मप्रकाश गोयल, जो एक व्यापारिक परिवार से हैं, जरूरतमंद लड़के-लड़कियां जो विवाह का खर्च नहीं उठा पाते हैं, उन लोगों की सम्मेलन के अंतर्गत शादी करवा कर सहायता कर रहे हैं।  अलाइव न्यूज़ के संपादक तिलक राज शर्मा के निर्देशन में रोज़ी सिन्हा द्वारा की गयी बातचीत के कुछ अंश इस प्रकार हैं:
सामूहिक विवाह सम्मेलन की शुरुआत कब हुई थी और विवाह सम्मेलन के पहले चरण में  कितनी शादियां करवाई?
मैंने सन 2000 में इस सामूहिक विवाह सम्मेलन की शुरुआत की थी। शुरुआत में सम्मेलन में केवल अग्रवाल समाज के लड़के-लड़कियों की शादी करवाई थी। सम्मेलन के पहले चरण में 42 जोड़ो की शादी कराई थी .
आपको इस सम्मेलन की शुरुआत करने की प्रेरणा कहाँ से मिली?
मैं हमेशा से ही समाज सेवा के कार्यों से जुड़ा रहा हूँ। मेरे एक करीबी दोस्त, जो गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे, वो अपनी बेटियों की शादी को लेकर चिंतित थे उनकी इस स्थिति को देखकर मेरे मन में विवाह सम्मेलन करने का विचार जागा।
आप अब तक कितनी बार विवाह सम्मेलन आयोजित कर चुके हैं?
अब तक 19 बार सामूहिक विवाह सम्मेलनों का आयोजन कर चूका हूँ, इस बार 20वे सम्मलेन का नवंबर में आयोजन किया जा रहा है।
विवाह सम्मेलन में आपके काम करने की रणनीति क्या हैं?
मैं आपको बता दू, हम करीब दो महीने पहले सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया, पोस्टर्स, बैनर्स आदि के माध्यम से सम्मेलन का प्रचार प्रसार करते हैं। फिर लड़के-लड़कियों के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया प्रारम्भ करते हैं। लड़कियों का रजिस्ट्रेशन मुफ्त होता हैं और लड़को के रजिस्ट्रेशन के लिए 500 रुपए फीस रखी गयी हैं, उसके बाद परिचय सम्मेलन का आयोजन कराया जाता हैं उसमे दोनों परिवार अपनी जाँच पड़ताल अपने स्तर पर करते हैं और इसमें भी करीब एक माह का सभी आवेदकों को समय दिया जाता हैं।
आपने फरीदाबाद के अलावा कही और भी सम्मेलन का किया हैं?
हां, आंध्र प्रदेश के तिरुपति तिरुमाला मंदिर में मैं ट्रस्टी हूँ और 22 फरवरी 2007 को करीब 5300 जोड़ो का सम्मेलन कराया था, उसके बाद उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा भी विवाह सम्मेलन उनके क्षेत्र में कराने के लिए निमंत्रण दिया जा चूका हैं।
आप कन्यादान के रूप में क्या-क्या सामान देते हैं?
कन्यादान के रूप में गृहस्थ जीवन में उपयोग में आने वाली सभी वस्तुएं, आभूषण, कपड़े इत्यादि सामान दिया जाता हैं और करीब दो साल तक उन् जोड़ो को ध्यान में रखते हुए सामाजिक जिम्मेदारी के तहत पूरी तरह जीवन स्तर खुशहाल बनाने के पूरे प्रयास किये जाते हैं।
आपका सम्मेलन आरम्भ करने का उद्देश्य क्या हैं और आप समाज को क्या सन्देश देना चाहते हो?
हमारा उद्देश्य हैं समाज लड़कियों को बोझ ना समझे और उन्हें शादी में दहेज़ के डर से कोख में ना मारा जाये। मेरा मानना हैं कि मेरी इस पहल से समाज में कन्याभ्रूण हत्या रुकेगी और समाज की लड़कियों को लेकर जो सोच हैं उसमे परिवर्तन होगा. मैं समाज को ये सन्देश देना चाहता हूँ कि बेटियों का बाप होना कोई अभिशाप नहीं हैं।बहुत नसीब वाले होते हैं वो लोग जिनके घर बेटियां पैदा होती हैं।
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