भीड़ से शिकायत है मुझे

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भीड़ से डरता हूँ , और भीड़ से शिकायत है मुझे
शुरू से अंत तक अकेले चलने की आदत है मुझे

कोई रहबर,कोई रहगुज़र की कोई चाहत ही नहीं
टूटते और बनते हुए रिश्तों से कुछ राहत है मुझे

ख़ुशी अकेले कोई देता नहीं ,ग़म साथ में आता है
सरे बाज़ार में मालूम इनकी सभी कीमत है मुझे

सलिल सरोज

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