Jalandhar/Alive News : पंजाब के जालंधर के डीसी माने डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर हैं वरिंदर कुमार शर्मा. इनके नाम पर कई दिनों से शहर के बड़े-बड़े रेस्त्रां में बिल कट रहा था. ऑर्डर में दे बटर चिकन, दे बटर चिकन मंगाया जा रहा था. रेस्त्रां वाले भी क्या करें- कलेक्टर साहब के पीए का फोन आ रहा है. कौन टाले ऑर्डर, कौन मांगे पैसे. पर अब खुलासा हुआ है कि डीसी ऑफिस से ऐसा कोई ऑर्डर जा ही नहीं रहा था. एक शख्स फर्जी पीए बनकर ये ऑर्डर कर रहा था. इन महाशय का नाम है तरनजीत सिंह. रहने वाले यहीं जालंधर के हैं. खैर ये ठगी का का मामला जितना रोचक है, उतना ही दयनीय भी. तभी तो डीसी वरिंदर शर्मा ने आरोपी की कहानी सुन उसे माफ कर दिया है.

गिरफ्तारी के बाद आरोपी 58 साल के तरनजीत सिंह ने खुद बताया कि वो ये ठगी क्यों कर रहा था. उसका कहना था कि ये सब उसने मजबूरी में किया. उसकी बीवी की दोनों किडनियां फेल हो चुकी हैं. डायलसिस हो रहा है. उसके पास कोई नौकरी नहीं है. ऊपर से डॉक्टर ने बीवी को हाई प्रोटीन डाइट खिलाने की सलाह दी थी. अब उसके पास बेटी की स्कूल फीस तक भरने को पैसे नहीं थे. छह महीने हो गए थे, जिसके कारण उसके नाम कटने तक की नौबत थी. ऐसे में वो हाई प्रोटीन डाइट का खर्च कहां से उठाता. इसी के चलते उसने रेस्टोरेंट्स से डीसी का पीए बनकर बटर चिकन मंगवाना शुरू कर दिया.

अब ये भी जान लीजिए कि तरनजीत को इसका आइडिया कैसे आया. तो जवाब है ट्रू कॉलर. तरनजीत ने पुलिस को बताया कि उसे ट्रू कॉलर से ठगी का आइडिया मिला. उसने ट्रू कॉलर पर अपना मोबाइल नंबर पीए टू डीसी के नाम से सेव करके देखा, जो हो गया. फिर वह जिसे भी कॉल करता, उसके मोबाइल पर पीए टू डीसी शो होता. यही तो उसे चाहिए था. उसका काम आसान हो गया. रेस्टोरेंट्स में वो फोन करता और वहां भी यही नजर आता. दुकान चलने लगी.

अस्पतालों में भी करी थी ठगी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तरनजीत अपनी पत्नी का सभी चेरिटेबल अस्पतालों से डायलसिस करवा चुका था. इसलिए अब निजी अस्पताल जाना ही इकलौता चारा था, जिसके लिए उसके पास पैसे नहीं थे. ऐसे में उसने अस्पतालों में भी डीसी का पीए बनकर कॉल्स कर दी. आईएमए प्रधान डॉ. मुकेश गुप्ता से सात हजार रुपये तक ले लिए थे. उन्हें डीसी का पीए बनकर कहा था कि हमारी मुलाजिम की किडनियां खराब है. आप 10 डायलसिस का खर्च उठा लीजिए. ऐसा कहकर वह डॉ. गुप्ता से सात हजार रुपये ले गया था.

डीसी ने माफ किया, मदद भी की
तरनजीत ने पत्नी की बीमारी, बेटी की फीस न जमा कर पाने समेत जो भी दिक्कतें बताईं थीं. पुलिस ने उन सभी को वेरिफाई करवाया तो कहानी सही निकली. इस पर डीसी वरिंदर कुमार शर्मा ने मानवीय आधार पर आरोपी को माफ करने का फैसला किया. उन्होंने आरोपी को वार्निंग देकर छोड़ दिया. साथ ही उसकी बच्ची की पढ़ाई न रुके, इसलिए उसकी सारी फीस माफ करवा दी है. रेडक्रॉस के जरिए आरोपी की पत्नी के डायलसिस के लिए मदद की जा रही है. हालांकि पुलिस अभी आरोपी को सर्विलांस में रखेगी. ताकि अगर वो दोबारा ऐसी कोई कॉल करे तो उसे पकड़ा जा सके. साथ ही अबकी बार कड़ी कार्रवाई हो.

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