हरियाणा की मनोहर सरकार पर मड़राते संकट के बादल!

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Rozi Sinha/Alive News
Faridabad: कृषि विधयेक को लेकर पूरे देश की राजनीति गरमाई हुई है वही हरियाणा की राजनीति की बात की जाए तो यहां उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के लिए करों या मरों की स्थिति बनी हुई है।

दरअसल, केंद्र में सत्तासीन भाजपा सरकार ने किसानों के साथ हुई बातचीत में ये साफ कर दिया है कि सरकार कृषि विधयकों को वापिस नहीं लेगी, ऐसे में उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला असमंजस में फंसे हुए नजर आ रहे है। एक तरफ वो किसान है, जिन्होंने उन्हें अपना वोट देकर उपमुख्यमंत्री के पद तक पहुंचा है, वही दूसरी तरफ सत्ता का सुख है।

मुख्यमंत्री की कुर्सी खतरे में, मध्यावधि चुनाव के भी आसार
जजपा के कुछ विधायकों ने किसानों का समर्थन किया है और पार्टी से बाग़ी हुए है, वही दो निर्दलीय विधायकों ने सरकार से अपना समर्थन वापिस ले लिया है और किसान आंदोलन का समर्थन किया है। आपको बता दे कि हरियाणा की 90 सीटों में से बीजेपी के पास 40 सीटें है। सरकार बनाने के लिए 46 सीटें चाहिए। बीजेपी को पांच निर्दलीय विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है। ऐसे में जजपा का एक भी विधायक मनोहर सरकार से अपना समर्थन वापिस लेता है, तो हरियाणा की मनोहर सरकार गिर सकती है और मध्यावधि चुनाव होने के भी आसार है।

विपक्ष कर रही है विशेष सत्र बुलाने की मांग
किसान आंदोलन को देखते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भपेंद्र सिंह हुड्डा ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। भपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि विपक्ष सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है क्योंकि सरकार अल्पमत में आ चुकी है।

खापों ने भी किया जजपा- भाजपा का बहिष्कार
हरियाणा में गांव खापों ने भी भाजपा- जजपा का विरोध किया है, इतना ही नहीं दहाड़न खाप ने दुष्यंत चौटाला का नाम लेते हुए कहा कि खाप उनका बहिष्कार करेगी और कालें झंडे दिखाएगी।

बाग़ी विधायकों के मामले उपमुख्यमंत्री ने साधी चुप्पी
उपमुख़्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने किसान आंदोलन को लेकर अभी तक कोई भी ठोस बयान नहीं दिया है, वही पार्टी से बाग़ी विधायकों के मामले में भी उपमुख्यमंत्री ने चुप्पी साधी हुई है। हालांकि उन्होंने अपने एक बयान में ये अवश्य कहा था कि वह किसान पुत्र होने के नाते किसानों के साथ खड़े है, और अगर हरियाणा सरकार किसानों का समर्थन नहीं करती है तो वह सरकार से अपना समर्थन वापिस ले लेंगे। जजपा के विधायक और कार्यकर्त्ता भी उपमुख्यमंत्री से किसानों को खुला समर्थन देने का दवाब बना रहे है, ऐसे में आगे हरियाणा की राजनीति में और कौन- कौन से उतार- चढ़ाव देखने को मिलेंगे, ये तो अभी भविष्य के गर्भ में है।

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