करोड़ो रूपये खर्च फिर भी मासूमों को गर्मी से नही राहत

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Faridabad/Alive News : सरकारी अस्पताल में मरीजों के बेहतर देखभाल और सुविधाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग हर साल करोड़ो रूपये खर्च करने के दावे कर रही हो, लेकिन विभाग द्वारा करोड़ो रूपये खर्च करने के बाद भी अस्पताल में भर्ती मासूमों को पंखे की हवा तक नसीब नही हो रही है। जी हां, हम बात कर रहे है सिविल अस्पताल की जहां आए दिन अस्पताल में हो रही लापरवाही मरीजों और उनके साथ आए तीमारदारों को राहत देने की बजाए उनका दर्द बढ़ा रही है।

लेकिन क्या हो जब ऐसी लापरवाही उस मासूस के साथ भी हो जिसने मात्र 4 दिन पहले इस दुनिया में जन्म लिया हो। शिशु वार्ड में पंखे तो है पर चलते नही है। लगातार बढ़ रही गर्मी से अस्पताल में भर्ती रोगी पसीने से लथपथ हो रहे हैं, बावजूद अस्पताल प्रबंधन मूकदर्शक बनी हुई है। हीरापूर निवासी कृष्ण बताते है कि उनकी पत्नी ने चार दिन पहले ही एक लडक़े को जन्म दिया था, लेकिन नवशिशु के पेट में गंदा पानी भर गया था।

जिसके चलते 19 तारीख को उन्हें बी.के अस्पताल में रेफर कर दिया गया। लेकिन जब से ही यहां आए है तब से कमरे का पंखा खराब है, रात भर बच्चा गर्मी में रोता रहता है। इसके लिए कई बार शिकायत की लेकिन अभी तक समाधान नही हुआ। तो वहीं मोहना से आई लता का कहना है उनके एक महीने का बेटा जिसे उल्टी-दस्त हो रहे थे।

इसलिए हम शनिवार को आए थे, लेकिन बंद पड़े पंखों से और सुविधा के नाम पर मरीजों को सरकारी का एहसास हो ही जाता है। यहां हाथ के पंखे, फाईलों के हवा के सहारे समय बिता रहे हैं। गर्मी से परेशान होने पर खिडक़ी भी नहीं खोल सकते हैं। क्योंकि, खिडक़ी से सटे हुए बड़े-बड़े मधुमक्खी के छत्ते लगे हुए हैं। इनका भी डर रहता है। इसके लिए प्रबंधन से शिकायत की गई है, लेकिन पंखों की मरम्मत नहीं हो रही है।

क्या कहते है पी.एम.ओ
मैं जब राऊंड पर था तो, यह समस्या मेरे संज्ञान में आई थी। मुझसे मरीजों ने इस बारे में शिकायत की थी। जल्द ही पंखों को ठीक करवा दिया जाएगा या उन्हें बदलकर दूसरे पंखे लगवा दिए जाएंगें।
विरेंद्र यादव, सिविल अस्पताल पीएमओ

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