पलवल जिले में स्थापित हुआ डिमेंशिया क्लिनिक

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Palwal/Alive News: विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर डा. ब्रह्मदीप ने बताया कि इस दिमागी बीमारी में धीरे-धीरे याददाश्त और सोचने की शक्ति कम होती जाती है। उन्होंने बताया कि यह दिन खास तौर पर अल्जाइमर से पीडि़त रोगियों के लिए तथा इसके साथ-साथ जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से मनाया जाता है, ताकि लोगों को इस बीमारी के बारे में और कई जानकारियां मिल सकें।

उन्होंने बताया कि एक शोध के मुताबिक कुल जनसंख्या के 1 से 2 प्रतिशत उम्र के लोगों में अल्जाइमर बीमारी देखने को मिलती है और पुरुषों की तुलना में यह बीमारी महिलाओं को ज्यादा चपेट में लेती है। भारत अल्जाइमर रोग के मामलों में दुनियाभर में तीसरे नंबर पर हैं। इस बीमारी का शिकार कोई भी हो सकता है, लेकिन 60 साल से ज्यादा उम्र के लोग ज्यादातर इसकी चपेट में आते हैं, हालांकि अब 40 और इससे कम उम्र के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। अल्जाइमर रोग के लक्षणों की चर्चा करते हुए डा. ब्रह्मदीप ने बताया कि इसमें व्यक्ति खाना-खाना, पानी-पीना जैसी छोटी चीजें भी भूल जाता है और यहां तक अपने परिजनों और रिश्तेदारों को पहचानना बंद कर देता है।

उन्होंने बताया कि इस बीमारी का मुख्य कारण दिमाग में मौजूद एक विशेष प्रकार की प्रोटीन की सरंचना में गड़बड़ी है। सिविल सर्जन ने बताया कि अल्जाइमर एक प्रकार का पागलपन है जो स्मृति, सोच और व्यवहार को प्रभावित करता है। लक्षण अंतत: गंभीर रूप से बढ़ते हैं जो दैनिक कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं। अल्जाइमर मनोभ्रंश का सबसे आम कारण है। स्मृति हानि के लिए एक सामान्य अल्जाइमर रोग डिमेंशिया के 60-80 प्रतिशत मामलों में होता है। अल्जाइमर उम्र बढऩे का एक सामान्य हिस्सा नहीं है। सबसे बड़ा ज्ञात जोखिम का कारण बढ़ती उम्र है और अल्जाइमर वाले अधिकांश लोग 65 और उससे अधिक उम्र के लोग हैं, लेकिन अल्जाइमर सिर्फ बुढ़ापे की बीमारी नहीं है।

विश्व अल्जाइमर दिवस के अवसर पर सोमवार को डा. ब्रह्मदीप ने नागरिक अस्पताल पलवल में रीबन काटकर डिमेंशिया क्लिनिक की शुरुआत की। इस अवसर पर उनके साथ नागरिक अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा. अजय माम, उप-एनएचएम डा. सुरेश, डेंटल सर्जन डा. सुषमा, काउंसलर मधु डागर मौजूद रहे। यह क्लिनिक हर वीरवार को कमरा नंबर-19 में सुचारू रूप से चलाया जाएगा।

क्लिनिक की शुरुआत सिविल सर्जन ने मरीज को देखकर की। पूरे हरियाणा में पलवल ही पहला जिला है, जिसमें डिमेंशिया क्लिनिक की शुरुआत की गई है, जिसमें कोई भी बुजुर्ग आकर कंसल्ट कर सकता है, जिन मरीजों को दवाओं की जरुरत होगी, उन्हें दवाई दी जाएगी और जिन्हें काउंस्लिंग की आवश्यकता होगी उनकी काउंस्लिंग की जाएगी।

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