दिवाली दिल्लीवालों पर पड़ेगी भारी, घुटेगा दम…फेफड़ों में भर जाएगा जहर

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New Delhi/Alive News : दिल्ली-NCR की हवा और लोगों की सांसों को अभी और दिक्कत होने की आशंका है. क्योंकि अक्टूबर महीने का आखिरी हफ्ता वायु प्रदूषण के मामले में सबसे बुरे दौर से गुजर सकता है. मौसम में हो रहे बदलावों की वजह से, दिवाली में पटाखे-आतिशबाजी और पराली जलाने से निकलने वाले धुएं की वजह से अक्टूबर का आखिरी सप्ताह बहुत ही भयानक होगा. SAFAR (सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च) के अनुसार उत्तर भारत में सर्दी की आहट शुरू हो चुकी है.

ऐसे में अक्टूबर के चौथे सप्ताह में हवा की गति कम हो जाएगी. घटते तापमान के साथ नमी बढ़ेगी. इससे हवा में पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा बढ़ेगी. इस वजह से प्रदूषण बढ़ेगा जो लोगों की सेहत के हानिकारक होगा. अगर बारिश हो गई तो स्थिति और बिगड़ जाएगी. हवा की दिशा अभी तक दक्षिण-पश्चिम की तरफ है यानी पंजाब और हरियाणा की तरफ से आने वाली हवाओं में पराली जलाने का धुआं भी आ रहा है. साथ ही गाड़ियों से निकलने वाला धुआं मुसीबत में इजाफा करेगा.

दिल्ली-NCR के लिए इस बार की मॉनसूनी बारिश ने साफ-सुथरी हवा का तोहफा दिया. 8 सालों के बाद करीब 4 महीने दिल्ली राजधानी क्षेत्र में लोगों को सांस लेने में दिक्कत नहीं हुई. इन चार महीनों में हवा की गुणवत्ता ज्यादातर समय ठीक-ठाक रही. यह दिल्ली के लोगों के लिए अच्छी खबर थी, क्योंकि दिल्ली का नाम दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हो चुका है. लेकिन पिछले पांच दिनों से लगातार हवा की गुणवत्ता बद से बद्तर होती जा रही है. यह अगले कुछ हफ्तों में और खराब होने की आशंका है. जले पर नमक छिड़कने का काम करेगी दिवाली की आतिशबाजी और पटाखे का फोड़ना.

प्रदूषण कम करने के लिए GRAP लागू, नहीं चलेंगे जेनरेटर
दिल्ली-NCR में GRAP (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान) लागू हो चुका है. इसके तहत प्रदूषण कम करने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए जाएंगे. इनमें शामिल है – पटाखे जलाने पर रोक, कूड़ा जलाने पर दंड, पार्किंग शुल्क में 3 से 4 गुना वृद्धि, डीजल जनरेटर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध, निर्माण कार्य पर भी प्रतिबंध, दिल्ली में ट्रकों के प्रवेश पर रोक और निजी यातायात के लिए ऑड-ईवन योजना का लागू होना.

पिछले साल दिसंबर में हवा की गुणवत्ता का स्तर 450 पहुंच गया था
आमतौर पर हवा की गुणवत्ता का स्तर 50 के अंक से नीचे होना चाहिए वह पिछले साल औसत रूप से 112 था. दिसंबर 2018 में तो यह बढ़कर 450 तक पहुंच गया था. इस साल सितंबर में हवा की गुणवत्ता 98 दर्ज की गई थी. लेकिन 13 अक्टूबर को यह 270 था. सोमवार सुबह भी दिल्ली राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का कोहरा (स्मॉग) देखा गया. दिवाली के दिन और उसके बाद यह स्तर बहुत ज्यादा बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है.

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