Ambala/Alive News : हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां उड़ाते हुए जिले के निजी स्कूलों में धड़ल्ले से प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बिक रही हैं और विभाग मौनी बाबा बन गया है। डीसी प्रभजोत ङ्क्षसह के आदेशों के बावजूद किसी भी निजी स्कूल पर कार्रवाई करने की हिम्मत जिला शिक्षा अधिकारी व जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी नहीं कर पा रहे हैं। इसी का नतीजा है कि प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाया जा रहा है।

अभिभावक स्कूल में पढ़ रहे बच्चे के भविष्य को देखते हुए स्कूल से बैर लेने से डर रहे हैं। हालात यह हैं कि सरेआम किराए पर दुकानें लेकर बुक डिपो वालों ने अलग-अलग स्कूल का टेंडर लेकर प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बेची जा रही हैं। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से करीब एक किलोमीटर दूर बाल भवन के साथ व जगाधरी गेट पर शहर के नामी स्कूलों की किताबें बिक रही हैं। इनमें एक बुक डिपो ने तो अंबाला को छोडक़र शहर में नई दुकान खोल दी है। हेल्प लाइन नंबर भी जारी कर दिया है।

– छावनी के एक बड़े स्कूल में बिक रही किताबें, डीईओ को दी शिकायत
छावनी के एक नामी स्कूल के भीतर धड़ल्ले से प्राइवेट पब्लिशर्स की किताबें बेचने का गौरखधंधा चल रहा है। बाकायदा इस स्कूल की शिकायत अभिभावकों ने डीईओ को कर दी, लेकिन इस पर जिला शिक्षा अधिकारी ने कोई कार्रवाई करनी जरूरी नहीं समझी जबकि डीसी खुद आदेश जारी कर चुके हैं। छावनी के इंदिरा चौक के नजदीक स्थित इस स्कूल के साथ लगते स्कूल का मामला भी डीईओ के पास पहुंचा था। दोनों स्कूल आमने-सामने हैं लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं की गई। हां डीसी को झूठी तसल्ली एक स्कूल की दे दी गई कि अब वहां किताबें नहीं बिक रही।

क्या कहते है अधिकारी
प्रभजोत सिंह, डीसी अंबाला का कहना है कि इस बारे में जिला शिक्षा अधिकारी से जवाब मांगा जाएगा कि वह क्यों कार्रवाई नहीं कर रही हैं। अभिभावक मेरी ईमेल आईडी पीआरएबीएचजेओटीएसआईएनजी एट दा रेट आफ जीमेल व डीसीएएमबी एट दा रेट आफ जीमेल पर शिकायत कर सकते हैं। शिकायत सही पाई गई तो निश्चित तौर पर कार्रवाई होगी।

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