Haridwar/Alive News : राज्य गठन के बाद भी हरिद्वार जिला मुख्यालय से सटे गजीवाली गांव के बच्चों को स्कूल जाने के लिए जान जोखिम में डाल स्कूल जाने को मजबूर होना पड़ रहा है। जहां से बच्चे स्कूल जा रहे हैं, वहां कभी भी बरसाती नाला आ सकता है। नाले के ऊपर बना अस्थाई मार्ग क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों को सात फीट गहरे गड्ढे से निकलना पड़ रहा है। ये हाल किसी पहाड़ी क्षेत्र का नहीं बल्कि उत्तराखंड के प्रमुख शहरों में से एक मैदान जिले हरिद्वार का है।

भारी जोखिम उठा रोजाना इस तरह बच्चों का स्कूल जाना कभी भी किसी बड़े हादसे का सबब बन सकता है। इसके बाद भी जिम्मेदार इस ओर से आंख मूंदे हुए हैं, जैसे उन्हें हादसे का इंतजार हो। खास बात यह कि यहां के जनप्रतिनिधि प्रदेश की राजनीति में अच्छा खासा मुकाम रखते हैं।

स्थानीय निवासी रमेश का कहना है कि यहां के सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक पूर्व में मुख्यमंत्री रह चुके हैं, पूर्व सांसद हरीश रावत भी मुख्यमंत्री रह चुके हैं। हरिद्वार शहर से चार बार विधायक और वर्तमान में प्रदेश सरकार के शासकीय प्रवक्ता होने के साथ ही कैबिनेट मंत्री भी हैं। भाजपा के स्थानीय विधायक यहां से दूसरी बार चुनाव जीते हैं। बावजूद क्षेत्र की इस कदर उपेक्षा समझ से परे है।

वर्तमान में बच्चों और ग्रामीणों का आवागमन जहां से हो रहा है, वहां पर विधायक निधि से पुल का निर्माण किया जाना है, लेकिन टेंडर के 6 माह बाद भी यह काम शुरू नहीं हो सका। केवल गड्ढे ही खोदे गए हैं। नाले की हालत बद से बदतर हो चुकी है। पहले आसानी से यहां से आवागमन हुआ करता था, लेकिन अब पुल निर्माण के पिल्लरों के लिए बनाए गए गड्ढे नौनिहालों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। ऐसे में उनकी जान को जोखिम बना रहता है। स्कूली बच्चे ऐसे स्थान से नाला पार कर रहे हैं, जो उनके लिए कभी भी जानलेवा साबित हो सकता है।

पहाड़ों में हल्की सी बारिश से ही नाला उफनने लगता है। ऐसे में कभी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण इस सबके लिए सरकारी मशीनरी को जिम्मेदार ठहरा रहे है।

ग्रामीण धर्म सिंह, कुलदीप चौधरी, केदार नेगी, शंकर ममगाईं, सुरेश काला, पूर्व प्रधान गाजीवाली नंदराम, नरेश पाल ने बताया कि जहां पुल का निर्माण किया जा रहा है, वहां पहले स्थायी और मजबूत काम करना चाहिए था। इससे किसी को भी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।

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