गो-तस्करों के हौंसले बुलंद, पुलिस की तमाम कोशिश नाकाम

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Rajasthan/Alive News : पु​लिस की तमाम कोशिशों के बाद भी राजस्थान-हरियाणा बॉर्डर पर गो-तस्करों की ओर से होने वाली वारदातें नहीं थम रही हैं। गो-तस्करों के बुलंद होते हौंसले पुलिस के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। गो-तस्करी की वारदातों से सबसे अधिक प्रभा​वित अलवर जिले में बीती रात फिर से तस्करों और पुलिस के बीच फायरिंग हुई। इसके बाद बाद गो-तस्कर गोवंश से भरा ट्रक छोड़कर फरार हो गए। गौरतलब है कि बीते कुछ माह में देखने में आया है कि गो-तस्कर लगातार हमलावर हो रहे हैं। वे पुलिस पर फायरिंग करने से भी नहीं चूकते हैं। बीती रात की वारदात भी किसी फिल्म अंदाज से कम नहीं थी।

दरअसल पुलिस व क्यूआरटी की टीम ने मुंडावर थाना क्षेत्र में जांच के दौरान जब एक वाहन को रुकने का इशारा ​किया तो वाहन चालक ने भागने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस टीम ने वाहन ​का पीछा किया तो उसमें सवार तस्करों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। इसके बाद पुलिस ने भी जवाबी फायरिंग की। जिसमें एक गोली तस्करों के वाहन के पीछे के हिस्से में भी लगी। इस दौरान गो-तस्कर वाहन को छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में कामयाब रहे।

वहीं पुलिस ने जब्त वाहन से दस गोवंश को मुक्त कराया है। मुक्त कराए गए गोवंश को नजदीक की गोशाला में भिजवाया गया है। गौरतलब है कि अलवर में लगातार गो-तस्करी के मामले सामने आ रही है। कुछ माह पूर्व भी अलवर शहर में पुलिस व गो-तस्करों के बीच हुई मुठभेड़ में एक गो-तस्कर की मौत हो गर्इ थी। उससे पूर्व अलवर के गोविंदगढ़ क्षेत्र में कथित गो-रक्षकों और गो-तस्करों के बीच हुई फायरिंग में एक गो-तस्कर की मौत हो गई थी।

वहीं बीते वर्ष अप्रेल में अलवर के बहरोड़ में कथित गो-तस्कर पहलू खान को गो-रक्षकों ने पीट-पीटकर मार डाला था। अलवर में बढ़ी गो-तस्करी की वारदातों को रोकने के लिए पुलिस ने गो-रक्षक चौकियां भी बनाई हैं। लेकिन इनका कोई खास असर दिखाई नहीं दिया है। हालांकि अलवर पुलिस प्रशासन का कहना है पुलिस की विशेष टीम को भी गो-तस्करी रोकने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

बीते कुछ माह में पुलिस व गो-तस्करों के बीच हुई सभी मुठभेड़ में अधिकतर तस्कर हरियाणा के निवासी हैं। अलवर व भरतपुर से गोवंश की तस्करी कर हरियाणा के नूहं, मेवात व अन्य हिस्सों में ले जाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार अलवर व भरतपुर से प्रतिदिन गो-तस्करी की वारदातें सामने आ रही हैं। लेकिन गो-तस्करों के बॉर्डर पार कर जाने से अधिकतर मामलों गो-तस्कर पुलिस की गिरफ्त में नहीं आ पाते।

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