सर्कस के खोए स्वरूप को वापिस दिलाएगा फेडरेशन : नरेश कादयान

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Faridabad/Alive News :  पीपल फॉर एनिमल हरियाणा के चेयरमैन नरेश कादयान ने फरीदाबाद दशहरा मैदान अपोलो सर्कस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण मनोरंजन की एक कला का विनाश होता जा रहा है। सर्कस ही एक ऐसा मनोरंजन का साधन है जिसको पूरी फैमली एक साथ बैठकर देख सकती है। इस मनोरंजन को भी सरकार ने दोहरी नीतियों से बड़ा नुकसान पहुंचाया जा रहा है। इसी को लेकर भारत भर के करीब 53 सर्कस मिलकर एक फेडरेशन का निर्माण कर रहे है। यह फेडरेशन केन्द्र सरकार से सर्कस को आ रही समस्याओं पर काम करेगी।

कादयान ने बताया कि फेडरेशन का काम लम्बे समय से घाटे में चल रहे सर्कस को उभारने के लिए सरवाईव की नीतियां तैयार करना, एनिमल्स रूल्स कन्टेंशन ईम्पलिमेंट करने तथा सर्कस को इंडस्ट्री का दर्जा दिलाने का कार्य करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार जूहू के जानवरों को अडोप्ट कर रही है और उन्हें उनका पैसा भी दे रही है। क्यों न फिर सर्कस को जानवर रखने के लिए पैसा मिले। इस अवसर पर उनके साथ अपोलो सर्कस के प्रबंधक अहसान गाजी भी मौजूद थे। उन्होंने सर्कस पर आ रही मंदी की मार के बारे में कहा कि सर्कस अब कमाई के साधन नहीं रहे है।

बल्कि अब सरकार के अधिक हस्तक्षेप के कारण बूरे दौर से गुजर रहे है। अहसान गाजी ने जानवारों को लेकर कहा कि करीब 35 सर्कस बचे हैं जो माननीय न्यायलय के आदेश के बाद हाथी, घोड़ा और कुत्ते रख सकते है। इसके अलावा बाकी सभी सर्कसों से जानवरों को हटा लिया गया है। जिसके कारण अब सर्कसों में पहले वाली भीड़ नही रही। क्योंकि सर्कस को जानवरों के अध्याय से ही अस्तित्व में लाया गया था। रेम्बो सर्कस के प्रबंधक सुजीत का कहना है कि अगर अब भी सर्कस के लोग एक नही होते है तो सर्कस जैसी मनोरंजन की कला हिन्दुस्तान से लुप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि हम बड़े बुरे दौर से गुजर रहे है, जिसका कारण सरकार की आड़ में एनिमल्स एनजियोस है जो सर्कस को नुकसान पहुंचा रही है।

सुजीत ने यह भी कहा कि इंण्डिया से बाहर चाईना जैसे देशो में इस कला को प्रोत्साहन देने के लिए वहां की सरकारे काफी मदद कर रहीं है, लेकिन इंण्डिया में सर्कस के साथ कई तरह की समस्याएं है जो सरवाईव नहीं कर पा रहा है। उन्होंने कहा कि सर्कस को इंडस्ट्री का दर्जा न मिलने के कारण बैंक तक फाइनेंश करने के लिए तैयार नहीं है। हमारे यहां के कलाकारों को विदेशो से बेआबरू होकर वापिस आना पड़ा है क्योंकि यहां की सरकारे सर्कस को किसी तरह की भी मदद नहीं दे रही है, अगर ऐसा चलता रहा तो सर्कस जल्द बंद हो जाऐंगे।

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