फ्लैट मामला: सहकारिता विभाग के अधिकारी सीएम विंडो की उड़ा रहे हैं धज्जियां

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Faridabad/Alive News : सैक्टर-21सी स्थित पावर ग्रिड एम्प्लाइज कोआपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में सुनील जोशी नामक व्यक्ति द्वारा एक फ्लैट 171 का झूठा शपथ पत्र देकर सहकारिता विभाग के नियमों के खिलाफ सेल डीड कराने, समिति सदस्यता के आवेदन में विभाग से सिविल कोर्ट में विचाराधीन सेल डीड कैंसलेशन के मामले को छिपाने, विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत करके सोसायटी में सदस्यता हासिल करने और समिति का प्रस्ताव अपने हक़ में कराने जैसे मामले में सोसायटी के ही सुपरवाइजर हरिओम शर्मा ने उक्त व्यक्ति सुनील जोशी के खिलाफ सीएम विंडो में करीब डेढ़ साल पहले एक शिकायत दी थी। सीएम विंडो की शिकायत आज भी विभाग के अधिकारियों की अल्मारियों में बंद है। लेकिन उस पर अभी तक कोई कार्यवाही न होना, सीएम विंडो का बड़ा मजाक है। सरकारी तंत्र द्वारा सीएम विंडो के मजाक का यह पहला मामला नही, बल्कि हरियाणा भर में हजारों मामले सीएम विंडो से निकल कर अधिकारियों की टेबल पर दम तोड़ चुके है। भाजपा सरकार की नई विंडो की प्रदेशभर में अधिकारी जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं।

पाठकों को बता दें कि फ्लैट 171 का मामला करीब चार साल से सहकारिता विभाग के अधिकारियों में घूम रहा है लेकिन इस मामले में शायद बडें स्तर पर मिलीभगत होने की वजह से अभी तक कोई कार्यवाही नही हुई। सीएम विंडो की शिकायत को लेकर संवाददाता की बात हुई तो सहायक रजिस्टार राजेश सेहरावत और उप रजिस्टार गुरूग्राम महावीर शर्मा केवल अपना पल्ला झाड़ते नजर आए। इस मामले में उप रजिस्टार गुरूग्राम एवं जांच अधिकारी महावीर शर्मा ने सीएम विंडो की शिकायत के बाद मामले में आदेश पारित करते हुए लिखा कि सुनील जोशी और सुनील गुप्ता पर नियमानुसार दंडात्मक कार्यवाही की जाए लेकिन सीएम विंडो की शिकायत के डेढ़ साल के बाद भी कार्यवाही की मंजूरी नही दी है, यह बात विभाग के अधिकारियों पर सवाल खड़े करती है।

इस मामले में बड़े मजे की बात तो यह है कि जांच के घेरे में चल रहे अधिकारी से ही अब जांच कराई जा रही है। उप रजिस्टार गुरूग्राम एवं जांच अधिकारी महावीर शर्मा ने सहायक रजिस्ट्रार फरीदाबाद की जांच रिपोर्ट को नजरअंदाज करके, जिसमें सुनील जोशी दोषी पाया गया था उसके शपथ पत्र 4 मई 2015 में झूठ लिखाया कि सुनील जोशी समिति सदस्यता पहले ही आवेदन कर चूका है जबकि ऐसा नही था। उसका मूल आवेदन सहायक रजिस्ट्रार फरीदाबाद के कार्यालय में 15 फरवरी 2016 को भेजा गया था और आवेदन में सुनील जोशी ने यह भी तथ्य छिपाये कि नियम के खिलाफ होने की वजह से उसके फ्लैट की सेल डीड की कैंसलेशन का मामला सिविल कोर्ट में विचाराधीन है। उल्टा महावीर शर्मा ने सुनील जोशी के हक़ में एल-फार्म जारी करने के आदेश भी दिए।

मामले में कार्यवाही ना होने पर विशिष्ट व्यक्ति, भाजपा बडख़ल विधानसभा आनंदकांत भाटिया ने 10 दिसम्बर 2018 को फरीदाबाद उपायुक्त को पत्र लिखा कि इस मामले में मिलीभगत करने वाले सहकारिता विभाग के अधिकारी उप रजिस्ट्रार, सहायक रजिस्ट्रार और फ्लैट मालिक सुनील जोशी, आरती जोशी की जांच कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर एफआईआर कराई जाए।

इसके बाद जांच अधिकारी महावीर शर्मा ने 1 मार्च 2019 को सहायक रजिस्ट्रार फरीदाबाद को लिखित आदेश दिए कि झूठा शपथ पत्र (एफिडेविट), विभाग के बीओए के साथ धोखाधड़ी एवं तथ्यों को छिपाकर झूठी सेलडीड बनवाने के खिलाफ नियमानुसार सुनील जोशी एवं अन्य के खिलाफ दंडात्मक कार्यवाही करें। हालांकि विभाग ने लीगल ओपिनियन प्राप्त कर झूठी सेलडीड निरस्त करने के लिए सिविल कोर्ट में मामला दायर कर दिया है, लेकिन सहायक रजिस्ट्रार द्वारा 12 मार्च 2019 व 12 अप्रैल 2019 को सुनील जोशी की सदस्यता रद्द और एफआईआर दर्ज करने की विभागीय मंजूरी मांगने के बाद भी कार्यवाही की उप रजिस्ट्रार महावीर शर्मा द्वारा मंजूरी नही देना तथा दोषियों को बचाने की कौशिश करना जैसे कई सवाल खड़े करता है।

इतना ही नही सुनील जोशी के खिलाफ सत्य रिपोर्ट तैयार करने वाले तत्कालीन फरीदाबाद सहायक रजिस्ट्रार को 25 मई 2019 को पंचकूला ट्रांसफर कराकर उनके स्थान पर वर्तमान सहायक रजिस्ट्रार राजेश सेहरावत को लगा देना, जिसने सहकारिता विभाग की ऑडिट रिपोर्ट में लिखा है कि उन्होंने निरीक्षक कार्यकाल में बगैर शर्त पूर्ण कराये सुनील और आरती जोशी के हक में 19 अगस्त 2016 को समिति सदस्यता का प्रस्ताव कर दिया। इस पूरे मामले को लेकर जब सुनील जोशी से फोन कर पूछा गया तो उन्होंने मामले पर कुछ कहने की बजाय जान-पहचान करने की बात कही। सुनील जोशी द्वारा संवाददाता के सवालों को गोल-मोल करने से लगा कि इस मामले में सहकारिता विभाग के साथ बड़ा धोखा किया गया है।

उधर, उप रजिस्ट्रार महावीर शर्मा से फ़ोन से संपर्क किया तो उन्होंने बताया है कि दंडात्मक कार्यवाही के आदेश, वो सहायक रजिस्ट्रार फरीदाबाद को दे चुके है और शिकायत कर्ता से 4 मई 2015 का मूल शपथ पत्र मांग रखा है। वहीं सहायक रजिस्ट्रार राजेश सेहरावत से बात की गई वो कहते हैं कि दंडात्मक कार्यवाही की अनुपालना इसलिए नही कर सकते क्योंकि हरिओम शर्मा की सम्बन्धित सीएम विंडो शिकायत विभाग के आदेश 25 मई 2019 के अनुसार अतिरिक्त रजिस्ट्रार सुमन भलारा देख रही हैं।

क्या कहना है सहकारिता समितियां हरियाणा की अतिरिक्त रजिस्ट्रार का
उनके पास सीएम विंडो की शिकायतों को लेकर ऐसा कोई आदेश नही आया है और मुझे इस मामले के बारे में जानकारी नही है। वह इस पर कुछ नही कह सकती।
– सुमन भलारा-अतिरिक्त रजिस्ट्रार, सहकारिता समितियां हरियाणा।

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