हायर एजुकेशन की गुणवत्ता को लेकर नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन

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शिक्षा के क्षेत्र में आ रही नई चुनौतियों पर हुआ मंथन
फरीदाबाद : राष्ट्रीय स्तर पर प्राइवेट यूनिवर्सिटियों व कॉलेजों के लिए गठित की गई एजुकेशन प्रमोशन सोसायटी फोर इंडिया (ईपीएसआई) ने उच्चतर शिक्षा को गुणवत्ता से भर ग्लोबल हब बनाने के विषय पर नेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। बैंगलुरू में आयोजन की गई नेशनल कॉन्फ्रेंस में बतौर मुख्यातिथि भारत सरकार की माननीय एचआरडी मिनिस्टर स्मृति ईरानी पहुंची। मुख्यातिथि के साथ कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक सरकार के मिनिस्टर ऑफ हायर एजुकेशन टी.बी.जयाचंद्रा व मिनिस्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन शरण प्रकाश आर पाटिल मौजूद रहें।

कॉन्फ्रेंस में उच्चतर शिक्षा से जुड़े करीब 300 चांसलर, वाइस चांसलर, डायरेक्टर व प्रिंसिपल ने कॉन्फ्रेंस में शिरकत की। कॉन्फ्रेंस में भारत की उच्चतर शिक्षा को गुणवत्ता से भर ग्लोबल हब बनाने के अलग-अलग पहलुओं के बारे में चर्चा हुई। यहां पर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में आ रही नई चुनौतियों पर मंथन किया गया। इसमें ग्लोबलाइजेशन, स्टूडेंट्स गतिशीलता व गरीब स्टूडेंट्स तक गुणवत्ता उच्च शिक्षा पहुंचाने आदि के बारे में चर्चा हुई।

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इसके साथ उच्चतर शिक्षा के ढांचे से लेकर उसकी जिम्मेदारियों, सिद्धांत आदि के बारे में भी इस कॉन्फ्रेंस में विचार विमर्श हुआ। कॉन्फ्रेंस में सभी को संबोधित करते हुए ईपीएसआई के ऑल्टरनेट प्रेसिडेंट डॉ. एच.चतुर्वेदी ने कहा कि उच्चतर शिक्षा संस्थान देश के आर्थिक विकास में सिंगापुर, मलेशिया व दुबई की तरह अपना अहम योगदान दे सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विदेशी स्टूडेंट्स का रुझान भारतीय यूनिवर्सिटियों के लिए लगातार बढ़ रहा है। यहीं कारण है कि 33000 विदेशी स्टूडेंट्स की संख्या अगल 5 सालों में 5 लाख तक पहुंचने की उम्मीद है। वहीं ईपीएसआई के प्रेसिडेंट डॉ. जी विश्वनाथन ने यूजीसी के 2010 अधिनियम के बारे में चर्चा की जिसके द्वारा डिम्ड यूनिवर्सिटियों को समास्याओं का सामना कर पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि इस अधिनियम के लिए कई कोर्ट में सवाल उठाए जा चुके हैं और कोर्ट ने इसे वापस लेने की भी मांग की है। उनका कहना था कि उच्चतर शिक्षा को उदारीकरण का कोई फायदा नहीं मिल रहा है, आज भी उच्चतर शिक्षा जंजीरों में जकड़ी हुई है। अपने संबोधन में ईपीएसआई के कोषाध्यक्ष व मानव रचना शैक्षणिक संस्थान के प्रेसिडेंट डॉ. प्रशांत भल्ला ने कहा कि सैंट्रल व स्टेट गर्वंमेंट की पॉलिसियों के तहत संस्थान रोजगार सूची को बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप, एनएसडीसी, सेक्टर स्किल काउंसिल, मिनिस्ट्री ऑफ स्किल डिवेलपमेंट देश में स्किल एजुकेशन को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए कार्यरत है। उन्होंने बताया कि भारत एजुकेशन सिस्टम के मामले में वल्र्ड में दूसरे स्थान पर है और यूनिवर्सिटियों के द्वारा स्किल पर आधारित शिक्षा प्रदान करने का नया लक्ष्य देश को हायर एजुकेशन के लिए ग्लोबल हब बना रहा है। स्टार्ट अप इंडिया, मेक इन इंडिया प्रोग्राम आदि की मदद से देश तेजी से वल्र्ड मैप पर अपनी अलग पहचान बना रहा है। कार्यक्रम में उच्चतर शिक्षा के क्षेत्र में नए सुधारों का आश्वासन जताते हुए मुख्य अतिथि स्मृति ईरानी ने कई ऐसे घोषणाएं कि जिसने प्राइवेट शैक्षणिक संस्थान की भूमिका को बढ़ा दिया।

यह रही कुछ अहम घोषणाएं
– उन्होंने घोषणा की कि एआईसीटीई के तहत आने वाले संस्थान अगर एनबीए से मान्यता प्राप्त है तो अगले 5 सालों के लिए उनकी मान्यता खुद ब खुद मंजूर हो जाएगी।
– उन्होंने स्वायत्त के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि अगर संस्थान अच्छा काम कर रहे हैं तो उनको स्वायत्त अवश्य दिया जाना चाहिए। ऐसे कॉलेज जो नैक से ए-ग्रेड की मान्यता प्राप्त है और सभी मानकों पर खरें उतरते हैं व 10 साल पूरे कर चुके हैं, उनको राज्य सरकार के द्वारा स्वायत्त अवश्य प्रदान की जानी चाहिए।
-2एफ या 12 बी स्टेटस वाली यूनिवर्सिटियों को दूसरी शिफ्ट में स्किल बेस्ड कार्यक्रम चलाने की इजाजत है।
-उन्होंने ईपीएसआई व उनके सदस्यों से आग्रह किया कि वह गर्ल चाइल्ड व नि:शक्तजन स्टूडेंट्स को स्कॉलरशिप प्रदान करने पर विचार करें।
-उन्होंने पादर्शिता की बात करते हुए कहा कि आत्मवितपोषण करने वाली यूनिवर्सिटियों के लिए गर्वनिंग बॉडी में एचआरडी मिनिस्ट्री से एक प्रत्याक्षी रखना जरूरी नहीं है।
-उन्होंने ईपीएसआई से आग्रह किया वह देश के एजुकेशन सिस्टम की शक्ति को दिखाने के लिए वल्र्ड वाइड प्रोग्राम शुरू करें, ताकि ग्लोबल स्तर पर नए विचारों व सोच का आदान प्रदान किया जा सके। यहीं नहीं उन्होंने ईपीएसआई से एआईसीटीई के पोर्टल नो यूअर कॉलेज का प्रचार करने को भी कहा।

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