हिन्दी पढ़े गुरू जी, बच्चों को अंग्रेजी कैसे पढ़ाए

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Haryana/Alive News : सरकार ने प्राइवेट स्कूलों का मुकाबला करने के लिए सरकारी स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराने की पहल तो की है, लेकिन प्रबंध वैसे नहीं हो पाए। अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं है। यह भी तय नहीं कि अंग्रेजी कौन सा शिक्षक पढ़ाएगा। कक्षा एक में अंग्रेजी माध्यम और बैग फ्री पढ़ाई इसी सत्र से लागू की गई है।

238 स्कूलों में 30-30 बच्चों के 1-1 सेक्शन बनाने के आदेश भी हैं। अभी तक अंग्रेजी माध्यम के पाठ्यक्रम का न तो शिक्षक को पता है और न विद्यार्थियों को। ज्यादातर स्कूलों में 30-30 बच्चे भी अंग्रेजी माध्यम पढऩे को तैयार नहीं हुए हैं। कहीं 8 तो कहीं 10 विद्यार्थी ही अंग्रेजी माध्यम से पढऩे के लिए तैयार हुए हैं। यही हाल उन स्कूलों का है, जहां नौंवीं-10वीं में गणित और विज्ञान अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाए जाने है, जो शिक्षक हिंदी में पढ़ा रहे थे, उन्हें अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कराने की जिम्मेदारी दी है। सरकार ने पहले चरण में 310 स्कूल चुने हैं। शिक्षक यूनियनों का कहना है कि सरकार को पहले पूरी व्यवस्था करके अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई शुरू करानी चाहिए थी।

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी
कुल पद : 128405
कार्यरत : 83443
रिक्त पद : 44962

प्रिंसिपल के 386 और हेड मास्टर के 851 पद रिक्त, प्रदेश में शिक्षकों के अलावा प्रिंसिपल और हेड मास्टर के भी काफी पद रिक्त हैं। प्रिंसिपल के 2083 पद स्वीकृत हैं, इनमें 386 पद खाली हैं, जबकि हेड मास्टर के 1291 स्वीकृत पदों में 851 खाली हैं। प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने वाले जेबीटी शिक्षकों के 38804 पद स्वीकृत हैं। इनमें 14836 पद खाली हैं, जबकि 6 हजार जेबीटी गेस्ट टीचर लगे हुए हैं। प्राइमरी स्कूलों में हेड टीचर के 5440 पदों में 3360 पद खाली हैं।

समाधान
सरकार यह कदम उठाए
1 पूरे प्रदेश में कॉमन स्कूल सिस्टम हो, जहां सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में एक जैसा पाठ्यक्रम हो।
2 सीबीएसई सभी बोर्डों को अपने अधीन ले ताकि एक जैसी शिक्षा व्यवस्था लागू हो।
3 शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य बंद कराया जाए।
4 स्कूलों का इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जाए। यह सुझाव शिक्षकों ने दिए हैं।

अभिभावक बोले- अंगे्रजी वाले टीचर कहां हैं…
नरवाना निवासी अनिल कुमार ने बताया कि उनकी चार बेटियां हैं। सरकारी स्कूल में अंग्रेजी माध्यम शुरू किए जाने का वे स्वागत करते हैं। लेकिन जब वे स्क्ूल में गए तो पता चला कि अभी तो अंग्रेजी पढ़ाने वाले टीचर ही नहीं हैं। अब मजबूरी में निजी स्कूल में एडमिशन दिलाना पड़ा। करनाल जिले के ओंगद गांव निवासी कृष्ण कुमार कहते हैं कि सरकार की योजना बहुत अच्छी है, लेकिन टीचर पहले नियुक्त किए जाने चाहिए थे। ऐसा न करने से पूरी योजना फेल हो जाएगी। सब्जेक्ट के टीचर तो होने ही चाहिए।

हिंदी मीडियम पढ़े, अंग्रेजी कैसे पढ़ाएंगे : शर्मा
हरियाणा राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ हरियाणा के वरिष्ठ उप प्रधान सोनू कुमार शर्मा का कहना है कि सरकार पहले अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाने वाले शिक्षकों की व्यवस्था करे। यह केवल थोपने जैसा है। सरकारी स्कूलों में बच्चे अंग्रेजी माध्यम से पढऩे को तैयार नहीं है। जो 12वीं पास हिंदी मीडियम से करने के बाद जेबीटी कर शिक्षक बना है, वह कैसे अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाएगा। सरकार ने यह व्यवस्था लागू करने से पहले शिक्षकों से राय तक नहीं ली। सरकार को नर्सरी से कक्षाएं शुरू करनी चाहिए थी।

अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षक भर्ती करने चाहिए : भारती
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष सीएन भारती का कहना है कि सरकार ने पहले भी अंग्रेजी मीडियम मॉडल स्कूल शुरू किए थे, जो फेल हो गए। क्योंकि पहले अंग्रेजी मीडियम पढ़ाने वाले शिक्षक भर्ती करे। अंग्रेजी के शिक्षकों की पहले ही कमी चल रही है। जो हिंदी मीडियम से गणित और विज्ञान पढ़ा रहा है, वह कैसे अंग्रेजी मीडियम से पढ़ाएगा। सरकार को अंग्रेजी मीडियम के लिए अलग से कैडर बनाकर भर्ती करनी चाहिए।

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