होली खेलने के लिए परंपरागत तरीका उचित

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लेखक-ज्ञानेन्द्र रावत

प्राकृतिक रंगों से होली खेलना सबसे ज्यादा सुरक्षित होता है। इन रंगों से होली खेलने से अनेकों बीमारियों से बचा जा सकता है। क्योंकि ये रंग न तो शरीर के लिए हानिकारक होते हैं और न ही इनके उपयोग के बाद रगड़-रगड़ कर रंगों को छुड़ाने की कसरत ही करनी पड़ती है। इससे खाल खिंच जाती है और रंग में भंग के कारण बनते हैं ये विषैले रसायनयुक्त रंग सो अलग। दरअसल अक्सर बाजार में जो गुलाल मिलता है उसमें अभ्रक और रेत आदि मिला होता है। रंगों को और गहरा व चटख बनाने की खातिर उनमें मिलाए गए रसायन त्वचा पर दुष्प्रभाव डाले बिना नहीं रहते।

कभी-कभी तो इनके आंख पर पड़ जाने से आंखों की रोशनी तक चली जाती है। अब तो प्राकृतिक जड़ी-बटियों की जगह सिंथेटिक डाइयों ने ले ली है। देखने में सुन्दर व आकर्षक लगने और आंखों को सुकून देने वाले ये रंग विषैले भी हो सकते हैं। कारण इनमें माइका, अम्ल, क्षार, कांच के टुकड़े तक पाये जाते हैं जो न केवल त्वचा व नेत्र रोग के कारण बनते हैं बल्कि कैंसर व सांस जैसे रोगों के खतरे को भी बढ़ाते हैं। इस बारे में प्रख्यात चिकित्सकों व विशेषज्ञों की राय है कि गुलाल को रंगीन बनाने में जिन चीजों का इस्तेमाल होता है, उनमें ज्यादातर भारी धातुएं होती हैं जो जाने-माने सिस्टेमिक टाॅक्सिन हैं। ये न केवल गुर्दे, जिगर और हड्डियों में जमा हो जाते हैं बल्कि शरीर के मेटाबाॅलिक कामकाज को भी प्रभावित करते हैं। यदि ये रंग आंख में चले जायें तो वह ओकुलर सर्फेस को क्षतिग्रस्त कर सकता है। इससे अस्थायी स्तर पर दृष्टिहीनता का खतरा बना रहता है।

इसमें दो राय नहीं कि प्रकृति ने वनस्पतियों के माध्यम से दुनिया को रंगों से परिपूर्ण किया है। लेकिन यह विडम्बना नही ंतो और क्या है कि समूची दुनिया में लगभग बारह लाख टन से भी ज्यादा उपयोग में लाये जाने वाले रंगों में प्राकृतिक रंगों का प्रतिशत मात्र एक हजार टन यानी एक फीसदी ही है। यह प्रकृति और मानव जीवन क साथ खिलवाड़ नही ंतो और क्या है। होली के लिए जहां प्राकृतिक रंगों का उपयोग मानव जीवन के लिए हितकर है, वहीं प्रकृति के सम्मान का प्रतीक भी है। सच तो यह है कि होली प्राकृतिक रंगों से ही खेलनी चाहिए । शरीर को नुकसान भी न हो और होली के रंग में तन-मन दोनों रंग जायें, इसके लिए जरूरी है कि होली खेलने के लिए परंपरागत तरीका ही अपनाया जायें। इस मानसिकता से जहां आपके अपनों पर प्रेम का रंग गहरा चढ़ेगा, वहीं होली के पर्व का आनंद आप नई उमंग और उल्लास के साथ उठा सकेंगे। इसमें दो राय नहीं।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरणविद् हैं)

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