“मैं ब्लाइंड हूं, मुझे परेशानी नहीं दिखती, बस मेहनत दिखती है”

0
53

मुश्किलें या कठिनाइयां आपको रोकने नहीं आती बल्कि आपको रास्ता दिखाने आती हैं, आपकी असल क्षमता से मिलवाने आती हैं। लोकेश ने अपने जीवन में कठिनाइयां, मुश्किलें, परेशानियां देखी तो नहीं क्योंकि वे देख ही नहीं सकते थे। लेकिन उनका कहना है कि उनके जीवन की इस चुनौती में जहां वे अपनी आंखों से देख ही नहीं सकते थे, इसी मुश्किल ने उन्हें रास्ता दिखाया और आज वे एक अच्छा और सरल जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ाई कर रहे लोकेश कोई साधारण छात्र नहीं हैं। लोकेश ने अपनी पसंदीदा विषय हिंदी में 100 में से 100 अंक प्राप्त किए और साथ ही वे अपने गांव के आस-पास के बच्चों को भी पढ़ाते हैं। यही तो एक सार्थक जीवन है जहां वे खुद अपने लिए और दूसरों का भी अच्छा कर रहे हैं। लोकेश की उत्साहवर्धक और हौसला बढ़ा देनी वाली संपूर्ण कहानी जानने के लिए

लोकेश के जीवन की एक झलक-

गुढा गांव के रहने वाले लोकेश भील एक ऐसे समुदाय में जन्मे जो आदिवासी क्षेत्र में आता है। एक ऐसा क्षेत्र जहां के 90 प्रतिशत लोगों को हिंदी ही नहीं आती। लोकेश के परिवार में उनका जन्म होने के बाद लोग बहुत खुश थे, लड़का हुआ है, पढ़ेगा- लिखेगा। पर ज़रूरी तो नहीं हर खुशी यूहीं रहे और 3 साल की उम्र में आंखों में कोई इन्फेक्शन होने की वजह से लोकेश की आंखों की रौशनी चली गई। उनकी माँ ने बहुत कोशिशें की, बड़े-बड़े डॉक्टर्स को दिखाया पर कुछ ना हुआ। इस कारणवश उनकी पढ़ाई-लिखाई सब छूट गई लेकिन वे फिर भी स्कूल जाया करते थे और सिर्फ सुनकर पढ़ा करते थे।

अब वो कहते हैं ना कि जब सारे रास्ते बंद हो जाते हैं तो कहीं ना कहीं से उम्मीद की एक किरण तो ज़रूर आती है और लोकेश की ज़िन्दगी में एक अध्यापिका ऐसी किरण बनकर आईं। उन्होंने लोकेश और उसके परिवार को ब्रेल लिपि के बारे में बताया जिससे दृष्टिहीन लोग भी पढ़ लिख सकते हैं। फिर क्या था 8 वर्ष की आयु से लोकेश ने पढ़ाई करना शुरू किया और आज का दिन है जब उन्हें हिंदी विषय में 100 में से 100 अंक प्राप्त हो चुके हैं। इसके अलावा वे लोगों के बीच ये जागरूकता भी फैला रहे हैं कि कैसे दृष्टिहीन भी पढ़-लिख सकते हैं और वे खुद भी बच्चों को हिंदी में शिक्षित करते हैं।

चुनौतियां आपको काबिल बनाती हैं-

लोकेश का कहना है कि उनके जीवन में बहुत सी चुनौतियां थी। लोगों की बातें सुनना, खुद अपना काम ना कर पाना, अच्छे से पढ़-लिख ना पाना और भी बहुत सी चीज़ें। लेकिन उन्होंने कभी-भी उन चुनौतियों के आगे घुटने नहीं टेके बल्कि उनका डट कर सामना किया और आज वे अच्छा जीवन व्यतीत कर रहे हैं। ठीक इसी तरह हमारे जीवन में आई परेशानियों को हमें खुद से बड़ा नहीं समझना चाहिए। हमारा मनोबल मज़बूत हो तो कोई भी चुनौती कुछ नहीं होती।

Print Friendly, PDF & Email

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here