गांव इस्माईलपुर-बसंतपुर के सैंकडों बुजुर्ग वृद्धा पेंशन से महरूम

Faridabad : हरियाणा सरकार वृद्धों के प्रति संवेदना दिखने के लिए ‘वृद्धा पेंशन’ में कई फेर बदल किये ताकि उनका हक़ उन्हें आसानी से मिल सके। लेकिन सरकार का यह प्रयास बसंतपुर क्षेत्र में असफल रहा। इसका उदाहरण बसंतपुर-इस्माईलपुर क्षेत्र के बुजुर्ग हैं। जिन्हें आज भी सरकार की वृद्धा पेंशन का लाभ नही मिल रहा है।
इसका खुलासा इस प्रकार हुआ जब अलाईव न्यूज़ के संवाददाता शफी सिद्दीकी ने इस्माईलपुर गावं में एक स्थान पर जमा बुजुर्ग लोगों से उनकी पेंशन के बारे में पूछा कि आपको सही समय पर पेंशन मिल रही है, तो बुजुर्गों का जबाव था कि कौन-सी पेंशन की आप बात कर रहे हैं। यहां तो किसी बुजुर्ग की पेंशन सरकार ने नही बनाई, हांलाकि वे लोग कई बार पैंशन के लिए फार्म भर चुके हैं। उधर, बुजुर्गो ने बताया कि यहां सरकार तो पेंशन नही बांट रही, बल्कि बुजुर्गों की सहायता के लिए एक युवा 5-6 माह से आर्थिक सहायता जरूर दे रहा है। यह खबर सुनकर हमारे संवाददाता ने बुजुर्गों की आर्थिक सहायता करने वाले युवा से सम्पर्क किया और देखा वहां पर कुछ बुजुर्ग थे और सहायता राशि ले रहे थे, यह नजारा देखकर भ्रम दूर हुआ। तभी हमारे संवाददाता ने समाजसेवी धर्मवीर भड़ाना से बुजुर्गों को सहायता राशि देने के कारण मालूम किया। उन्होंने बताया की क्षेत्र के गरीब बुजुर्गों की सेवा के लिए समाजसेवी के रूप में मैं पिछले 5-6 माह से बुजुर्गों की आर्थिक सहायता करता आ रहा हूं और जब तक इनको सरकार की तरफ से पेंशन नहीं मिल जाती, तब तक मैं सहायता करता रहूंगा।

इस्माईलपुर गांव से नितिन भड़ाना है, जो समाजसेवा को सर्वोपरि और नर-सेवा को नारायण से मानते है। युवा नितिन भड़ाना के विचार ही धार्मिक नही है बल्कि वह खुद भी सेवादार है। जब संवाददाता ने नितिन भड़ाना से राजनीति करने के बारे में सवाल किया तो उन्होंने कहा कि अगर नेता जनता से राजनीति करनी बंद कर दे तो नई-नई सामाजिक संस्थाओं का उदय नही होता, इनकी जरूरत भी आज नही होती। लेकिन जनता का दुर्भाग्य है, यही जनता नेताओं को जमीन से आसमान पर पहुंचाती है और खुद कंगाल होकर बैठ जाती है। नितिन ने कहा कि इन्ही बुजुर्गों को देखा जाए तो इन्होंने ही पंच-सरपंच से लेकर प्रधानमंत्री तक को बनाया, लेकिन अपनी जरूरतों के लिए आज ये बुजुर्ग दर-दर भटकने को मजबूर है।
नितिन ने कहा कि अर्सा गुजर गया इस क्षेत्र के लोग आज तक पेंशन के लिए जरूरी कागजात नहीं जुटा पाए जिससे की इन्हें वृद्धा पेंशन मिल सके। हमने तो एक शुरुआत की है जिससे की ये लोग अपने हक़ को पहचाने और जरुरी कागजातों को बनवाने तथा सरकार की मुख्य धारा से जुड़ सके।

क्या कहना है गांव इस्माईलपुर-बसंतपुर के बुजुर्गा का

वृद्धा पेंशन क्या होता है हमनें सुना है लेकिन वृद्धा पेंशन आज तक हमें मिला नही। हां साहेब, चुनाव के दौरान नेता वोट मांगने आते हैं और कहते हैं अगर मैं जीतूंगा तो आपको पेंशन मिलेगा, हम आपको ये देंगे वो देंगे सब झूठ बोलते हैं। चुनाव के बाद कोई देखने नहीं आता है।
रामा देवी, गांव इस्माईलपुर-बसंतपुर

पैंशन के लिए मैंने कईयों से सिफारिश की, लेकिन पेंशन बनाने वाले कहते है कभी ये कागज लाओ है, कभी वो कागज लाओ। काफी दौडऩे के बाद हमने पेंशन की उम्मीद ही छोड़ दी। लेकिन यहां पर मुझे पहली बार पैसा मिला है।
प्रभा देवी, गांव इस्माईलपुर-बसंतपुर

मुझे यहां पिछले चार बार से सहयोग राशि मिल रही है पेंशन के लिए कई बार यहां-वहां चक्कर काटे, लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा। लेकिन नितिन बाबू ने मुझे आसवाशन दिया कि आपको पेंशन मैं दिलाऊंगा।
लुक़मान, गांव इस्माईलपुर-बसंतपुर

मैं नितिन बाबू से दो बार से सहायता राशि ले चुका हूं, मैंने पार्षद से पेंशन के लिए कई बार कहा तो कार्यकाल समाप्त होने की बात कहकर टाल दिया।
दिनेश कुमार, गांव इस्माईलपुर-बसंतपुर

साहेब, हमें तो कुछ पता नहीं हमसे नितिन बाबू ने कहा कि माता जी मैं आपको पेंशन दिलवाऊंगा और अब मुझे दो बार से पैसा मिल रहा है।
विमला देवी, गांव इस्माईलपुर-बसंतपुर

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