अपनी आंखों में अंगार और नीयत में बगावत चाहिए

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तुझसे होगा नहीं,इसमें बहुत ज्यादा हिम्मत चाहिए
राजनीति में सफल होने को बदनुमा शराफत चाहिए ।
 
किसको मिल जाती है बस यूँ ही अपने हिस्से की आज़ादी
अपनी आँखों में अंगार और नीयत में बगावत चाहिए ।
 
तेरे यकीन होने को में क्या नहीं कर गुजरूँ,बता मुझे
तू इशारा ही कर दे गर तुझे मेरी साँसों में रूकावट चाहिए ।
 
कौन तूफान रोक सकेगा इन बच्चियों के जज़्बे को
पर इनकी आसमानी उड़ानों को थोड़ी तो रियायत चाहिए ।
 
दुनिया में हर किसी का अपना ग़म है,मत छेड़ो उसे
वर्ना कौन है यहाँ इंसान ऐसा,जिसको नहीं मोहब्बत चाहिए 
 सलिल सरोज, (सीनियर ऑडिटर, सी ए जी ऑफिस)

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