दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस एस. मुरलीधर का पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में हुआ तबादला

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New Delhi/Alive News: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ दिल्ली में हुए हिंसक प्रदर्शन मामले में दाखिल याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. इस बीच जस्टिस एस. मुरलीधर को दिल्ली हाईकोर्ट से पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया है. जस्टिस मुरलीधर के तबादले पर विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर सवाल खड़े किए तो केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जवाब दिया.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कोलेजियम ने 12 फरवरी को जस्टिस एस. मुरलीधर के तबादले की सिफारिश की थी. इसके बाद पूरी कानूनी प्रक्रिया के बाद तबादला आदेश जारी हुआ. दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस एस. मुरलीधर के तबादले पर बवाल शुरू हो गया है. आइए, जस्टिस एस. मुरलीधर के बारे में जानते हैं-

जस्टिस एस. मुरलीधर ने साल 2003 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की. उन्होंने साल 2004 में ‘लॉ, पॉवर्टी एंड लीगल एड: एक्सेस टू क्रमिनिल जस्टिस’ नाम की एक किताब भी लिखी है. दिल्ली हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, जस्टिस एस. मुरलीधर ने सितंबर 1984 में चेन्नई से वकालत शुरू की थी. जस्टिस मुरलीधर ने 1987 में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में वकालत शुरू कर दी थी. साल 2006 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में जज नियुक्त किया गया. एस. मुरलीधर दो बार सुप्रीम कोर्ट की लीगल सर्विस कमेटी के सक्रिय सदस्य रहे हैं.

एस. मुरलीधर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission) और भारतीय निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) के सलाहकार भी रहे हैं. इसके अलावा दिसंबर 2002 से मई 2006 तक मुरलीधर लॉ कमिशन के पार्ट टाइम सदस्य भी रहे हैं.

बिना फीस के लड़े कई केस
जस्टिस एस. मुरलीधर ने कई लोगों के केस बिना किसी फीस के लड़े हैं. इनमें भोपाल गैस त्रासदी और नर्मदा बांध पीड़ितों के केस भी शामिल हैं. जस्टिस मुरलीधर अपने कड़े फैसलों के लिए चर्चित रहे हैं. 1984 में हुए सिख दंगों में शामिल रहे सज्जन कुमार के मामले में भी जस्टिस एस. मुरलीधर फैसला सुनाने वालों में से एक थे. साल 2009 में नाज फाउंडेशन मामले की सुनवाई करने वाली दिल्ली हाईकोर्ट की बेंच में जस्टिस मुरलीधर भी शामिल थे जिस बेंच ने पहली बार समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर किया था.

हिंसा पर दिल्ली पुलिस को लगाई फटकार
दिल्ली हिंसा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि दिल्ली में दूसरे ‘1984’ को नहीं होने देंगे. दिल्ली हिंसा मामले पर दिल्ली पुलिस को फटकार लगाई थी. इसके अलावा नागरिकता संशोधन के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में हुई हिंसा में घायलों को सुरक्षा और बेहतर इलाज के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस मुरलीधर के घर 25 फरवरी को आधी रात को सुनवाई हुई थी.

2023 में पूरा होगा जस्टिस मुरलीधर का कार्यकाल
जस्टिस मुरलीधर को दिल्ली हाईकोर्ट में 2006 में बतौर जज नियुक्त किया गया था और उनका कार्यकाल 2023 में पूरा होगा. जस्टिस मुरलीधर के ट्रांसफर के बारे में पहले भी दो बार चर्चा हो चुकी है लेकिन सुप्रीम कोर्ट के कुछ जजों के विरोध के बाद इसे रोक दिया गया था. उनके ट्रांसफर पर पहली बार दिसंबर 2018 में और फिर जनवरी 2019 में चर्चा हुई थी.

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