केंद्रीय मंत्री से बजट को लेकर क्या कहा गृहणियों ने, जानिए

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Faridabad/ Alive News: सेंटर फाइनेंस मिनिस्टर सीतारमन के बजट पेश करने से पहले ही गृहणियों को अपने किचन के बजट की चिंता सताने लगी है। किचन का बजट लगातार 6-7 साल से कम होने की बजाय बढ़ता जा रहा है। दूध की कीमत बढ़ाने की कोई आवश्यकता नहीं थी लेकिन सरकार ने निजी कंपनियों के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। घरों में इस्तेमाल होने वाली रोजमर्रा की वस्तुएं जैसे गैस, बिजली, पानी की बढ़ती कीमतों को लेकर जनता काफी परेशान है। इनमें दाल, चीनी, चावल, सब्ज़ियां इत्यादि की कीमतें रुकने का नाम नहीं ले रहीं। मध्यम वर्ग अपने घरेलु बजट को लेकर काफी चिंता में है। गृहणियों की केंद्रीय मंत्री से कीमतों को कम करने को लेकर काफी उम्मीदें हैं। क्योंकि वह भी एक गृहणी हैं जो घर के बजट को भलीभांति जानती हैं।

क्या कहती हैं गृहणी

दिन प्रतिदिन महंगाई इतनी बढ़ती जा रही है कि अकेला आदमी घर कैसे चलाए। चीज़ों के दाम इतने बढ़ते जा रहे हैं और तन्खवाएं वहीं की वहीं। मोदीजी ने कहा विदेशी प्रोडक्ट्स त्याग के मेड इन इंडिया की चीज़ें उपयोग में लाओ वो, किफायती भी होंगे और हमारे देश की इकॉनमी में भी सुधार लाएंगे मगर कोई हमे बताए इकॉनमी में सुधर कहाँ है और मेड इन इंडिया प्रोडक्ट्स किस तरह से किफायती हैं। विदेशी प्रोडक्ट्स से दोगुने रेट में एक चीज़ आती है। उद्धारण के लिए पतंजलि का फेस वाश ही ले लो… जितने में वो एक आता है, कोरियन कंपनी के दो फेस वाश आ सकते हैं। इसलिए हम आशा करते हैं कि आने वाले बजट में ज़रूरी चीज़ों के दाम सच में घटाए जाएं ताकि आम आदमी का जीना कम से कम कुछ तो आसान हो।

-अनीता वर्मा, सेक्टर-10

मैं चाहूंगी सरकार ने जो हर छोटी बड़ी चीज़ों के दाम बढ़ाएं हैं, और तरह तरह के बिल्स के चार्ज में इनक्रीस है, उस बढे हुए अमाउंट को वाइज़सली यूज़ करके किसी सही जगह पर प्रयोग किया जाए। जैसे पानी का बिल बढ़ा दिए गया है ताकि लोग लिमिट में पानी खर्च करें तो उस बचे हुए पानी से ग्राउंडवाटर लेवल में इनक्रीस भी तो दिखना चाहिए। जब कहीं आग लग जाती है तो फायर ब्रिगेड के पास पानी नहीं होता, अगर थोड़े भी पानी की बचत हो रही है तो वह सही जगह पहुंचना चाहिए। और इसके इलावा मैं चाहती हूँ कि ये जो तमाम चीज़ो पर सब्सिडी लगाई गयी है उसे हमेशा के लिए ख़त्म किया जाए और सभी को बराबर कीमत देनी चाहिए।
-आरुषि सेक्टर-21 सी, फरीदाबाद 
बिजली, पानी, पढाई, दवाइयां और अस्पतालों के ही खर्चे इतने हो जाते हैं कि कहीं न कहीं हमें अपना या अपने बच्चों का मन मारना पड़ता है। अगर मेरे पति की महीने की तनख्वाह 35 ,000  भी है, तो सभी तरह के टैक्सेज, फीस, और खर्चे निपटाने के बाद मुश्किल से 2. 5 से ३ हज़ार रुपये बचते हैं, ऐसे में हम अपने घर का महीने क राशन लाएं, रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी के दूसरे ज़रूरी खर्चे करें या सेविंग्स करें। इतनी चीज़ तो मेरे ख्याल से सरकार को भी समझनी चाहिए कि हमारे देश में पहले ही रोज़गार की इतनी मारामारी है, और ऊपर से महंगाई इतनी बढ़ा देंगे तो लोग घर चलाने के लिए गलत रस्ते पर तो जाएंगे ही। हालांकि मुझे लगता है कि सीतारमण जी घर गृहस्ती को नज़र में रखते हुए बजट बनाएंगी ताकि एक तरीके से हमें भी मोदी सरकार चुनने पर अफ़सोस न हो।
– शकुंतला वर्मा, सेक्टर-9 
हर रोज़ किसी न किसी चीज़ का रेट बढ़ जाने से हमारे महीने के बजट में गड़बड़ी आ जाती है। लेकिन खर्च तो निकालने ही पड़ते हैं। अगर इस बार का बजट मध्य वर्ग के हित में आता है तो हमारे काफी हद तक काम आसान हो जाएंगे और हमारे घर के मुखिया के सर पर भी जो तनाव का बोझ है वो भी कुछ हल्का हो जाएगा।  इस बढ़ती महंगाई में टेंशन होनी तो वाजिब है लेकिन टेंशन लेना भी हानिकारक है क्योंकि अगर कुछ हो गया तो डॉक्टर की फीस भी आसमान छू रही हैं। उम्मीद करती हूँ इस बार सरकार निराश नहीं करेगी।
-कोनिका चक्षु, सेक्टर-11 
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