भाजपा महामंत्री और कार्यकर्ताओं की सर्वे रिपोर्ट कैसे रह गई धरी, जानिए

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Tilak Raj Sharma/Alive News
Faridabad : भाजपा महामंत्री और भाजपा कार्यकर्ताओं का उम्मीदवारों के लिए किया गया सर्वे एक केंद्रीय राज्यमंत्री की पहुंच के आगे सोमवार को उस समय धरा रह गया जब हरियाणा में भाजपा ने 78 सीटों पर उम्मीदवार उतार दिए तथा 8 वर्तमान विधायक और कैबिनेट मंत्रियों के टिकट कट गए। एक तरफ शीर्ष भाजपा नेतृत्व पार्टी कार्यकर्ताओं को सम्मान देने की बात करते नहीं थकती हैं यहां तक कि भाजपा हाई कमान विधानसभा टिकट बटवारें में पार्टी महामंत्रियों को निर्णायक एवं अहम भूमिका में मानकर चल रहे थे लेकिन टिकट की घोषणा के बाद से भारतीय जनता पार्टी का बदलता हुआ स्वरुप हरियाणा की जनता को देखने को मिला। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने जिलों के महामंत्रियों, कार्यकर्ताओं से जिताऊ उम्मीदवारों का सर्वे मांगा था उसका क्या हुआ।

कहा जा रहा हैं कि भाजपा में कांग्रेस वाला हाल बन चुका है क्योंकि फरीदाबाद लोकसभा की नौ सीटों पर केंद्रीय राज्य मंत्री एवं भाजपा सांसद कृष्णपाल गुर्जर की जमकर चली। उन्होंने जिसको चाहा उसको उम्मीदवार बनाकर ही दम लिया। हालाँकि टिकट की घोषणा से पहले चर्चा यह थी कि कृष्णपाल अपने बेटे टिकट दिलाना चाहते है लेकिन टिकट की घोषणा के बाद चर्चा यह है कि नेता जी अपने किसी भी राजनीति प्रतिद्वंदी का अपने क्षेत्र में राजनीति कद बढ़ते नहीं देखना चाहते। इसका प्रमाण हरियाणा सरकार में भाजपा के कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल है जिन्होंने फरीदाबाद सीट पर जमकर विकास कार्य कराये बल्कि लोकप्रिय भी हुए। जिनका टिकट कटने के बाद फरीदाबाद सीट के भाजपा कार्यकर्ताओं में असंतोष है व केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर की टिकट कटवाने में अहम भूमिका मान रहे है।

ज्ञात रहे कि केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर और विपुल गोयल की राजनीति प्रतिद्वंदता हरियाणा में किसी से छुपी नहीं है. बीते साल दशहरे के सार्वजानिक मंच पर दोनों मंत्रियों ने एक दूसरों को देखने की बात कही थी लेकिन विपुल गोयल तो नहीं देख पाए, परन्तु विपुल गोयल को मंत्री कृष्णपाल ने जरूर देख लिया। इसी तरह राव नरबीर सिंह और अन्य वर्तमान विधायक और मंत्रियों के टिकट कटने का कारण राजनीति प्रतिद्वंदता माना जा रहा है।

इस राजनीति प्रतिद्वंदता से भाजपा में उपजे घमासान के बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल का 75 पार का नारा कहाँ तक सफल होता है यह तो 21 अक्टूबर को पता चल पायेगा। क्योंकि टिकट की दौड़ में रहने वाले पार्टी कार्यकर्ता और 8 विधायक कांग्रेस और हरियाणा के क्षेत्रीय दलों के संपर्क में आ चुके है। यह भगदड़ कही भाजपा के समीकरण न बिगाड़ दे।

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