Rewari/Alive News : सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को मिलने वाली विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति और अन्य राशि शिक्षा विभाग और बैंक के बीच तालमेल के अभाव में अटकी हुई है। विभिन्न स्कूलों में पढ़ाई कर रहे अनुसूचित जाति, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन वाले विद्यार्थियों को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि से वंचित होना पड़ रहा है। इसके अलावा कई विद्यार्थियों को मिलने वाली वर्दी की राशि भी नहीं मिल रही है।

कुतुबपुर प्राथमिक पाठशाला के सर्वाधिक 83 विद्यार्थी :
शहर के मोहल्ला कुतुबपुर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला के दो साल से अनुसूचित जाति, गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन वाले 83 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाई है। सरकार की ओर से अनुसूचित जाति के बच्चों को शिक्षा में प्रोत्साहन देने के लिए ही यह राशि प्रदान की जाती है।

740 रुपये मिलते हैं पहली के विद्यार्थियों को :
सरकार द्वारा अनुसूचित जाति के बच्चों को पहली कक्षा में 740 रुपए, दूसरी में 750, तीसरी में 760, चौथी और पांचवीं में 940 रुपए छात्रवृत्ति के रूप में हर साल मिलते हैं। लडक़ों को हर माह सौ रुपए और लड़कियों को 150 रुपए अतिरिक्त मिलते हैं। बीसी के छात्रों को 75 व छात्रओं को सौ रुपये हर माह प्रदान किए जाते हैं।

यहां आ रही तकनीकी समस्या:
प्राथमिक पाठशालाओं के जिन बच्चों को राशि नहीं मिल रही है उनके बैंक खाता नंबर आधार लिंक से नहीं हो पा रहे हैं। इसमें वे बच्चे अधिक हैं, जिनका आधार कार्ड जन्म के समय या उनकी एक साल की उम्र के दौरान बने थे। अब इन बच्चों के अंगूठे के निशान नहीं मिल पा रहे हैं। दूसरी ओर चंड़ीगढ़ मुख्यालय से सीधे राशि बच्चों के बैंक खाते में डाली जाती हैं। बच्चे कई माह तक अपनी पासबुक अपडेट नहीं कराते। इससे उन्हें सही जानकारी नहीं मिल पाती। इसी प्रकार कुतुबपुर स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला के विद्यार्थियों की समस्या विभाग के बीच तालमेल नहीं होने से आ रही है। इस स्कूल का कलस्टर रेवाड़ी ब्लॉक है, जबकि डीडी पावर हरिनगर स्थित राजकीय स्कूल के मुखिया को सौंपा गया है। मुख्यालय को भी इस बारे में किसी ने जानकारी नहीं दी।

इस प्रकार की समस्या को लेकर किसी ने पहले सूचना नहीं दी। यदि ऐसा है तो मामले की जांच की जाएगी। उच्च विभाग के अधिकारियों को तकनीकी समस्या से आई परेशानी के बारे में अवगत कराया जाएगा। खंड मौलिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से स्थिति से अवगत होने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
-सुरेश कुमार गोरिया, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, रेवाड़ी।

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