कुरुक्षेत्र में 45 सालों में भूजल स्तर खिसका 30.09 मीटर नीचे

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Kurukshetra/Alive News: कुरुक्षेत्र जिला जो धार्मिक स्थलों के नाम से जाना जाता है लेकिन अब इसके आगे सबसे बड़ी समस्या जल संकट की आने वाली है क्योंकि इस जिले में पिछले 45 सालों में भूजल स्तर 30.09 मीटर नीचे खिसक गया है यानि जून 1974 में कुरुक्षेत्र का भूजल स्तर 10.55 मीटर था और अब जून 2019 में भूजल स्तर 40.64 मीटर पर पंहुच गया है। इस डरावनी स्थिति को जहन में रखते हुए ही केन्द्र और राज्य सरकार ने जल शक्ति अभियान और जल ही जीवन योजना के तहत कुरुक्षेत्र में गिरते भूजल स्तर की सेहत को सुधारने के लिए अब सरकारी स्कूलों और भवनों में रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगाने का निर्णय भी लिया है। इतना ही नहीं कंडम हो चुके बोरवेल का भी जीर्णोद्घार किया जाएगा।

उपरोक्त जानकारी एडीसी पार्थ गुप्ता ने वीरवार को लघु सचिवालय अतिरिक्त उपायुक्त कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि जून 1974 में बाबैन में भूजल स्तर 11.92 मीटर, लाडवा का 11.50 मीटर, पिहोवा का 5.95 मीटर, शाहबाद का 9.51 मीटर, थानेसर का 13.89 मीटर, इस्माईलाबाद का 10.42 मीटर, पिपली का 10.63 मीटर पर था, अब इन सभी जगहों पर भूजल स्तर की स्थिति काफी डरावनी हो गई है और जून 2019 के आंकड़ों पर बाबैन ब्लाक में भूजल स्तर 42.37 मीटर, लाडवा का 34.13 मीटर, पिहोवा का 39.38 मीटर, शाहबाद का 45.38 मीटर, थानेसर का 35.83 मीटर, इस्माईलाबाद का 45.16 मीटर और पिपली ब्लाक में भूजल स्तर 42.24 मीटर पर पहुंच चुका है।

इस भयंकर स्थिति को देखते हुए केन्द्र सरकार ने वर्ष 2006 में शाहबाद और वर्ष 2011 में लाडवा और पिहोवा ब्लाक को नोटिफाई करते हुए कृषि के लिए टयूबवैल लगवाने का कनैक्शन जारी करने पर प्रतिबंध लगाने के आदेश जारी किए थे।

कुरुक्षेत्र जिले में 37 हजार 277 टयूबवैलों से सिंचाई
उन्होंने कहा कि आज कुरुक्षेत्र जिले के सभी 7 ब्लाक में भूजल का दोहन होने से स्थिति काफी खराब हो गई है और पूरे जिले में पानी का बहुत अधिक प्रयोग किया जा रहा है। अगर कृषि क्षेत्र की तरफ नजर दौड़ाए तो आज कुरुक्षेत्र जिले में 37 हजार 277 टयूबवैलों से सिंचाई की जा रही है, इससे सबसे ज्यादा जल का दोहन हो रहा है। इस जिले में जमीन के नीचे पानी की ज्यादा निकासी होने के कारण ही प्रतिवर्ष करीब 2 मीटर भूजल स्तर नीचे जा रहा है। एडीसी ने कहा कि इस भंयकर स्थिति से निपटने के लिए जल शक्ति अभियान के तहत सबको जागरुक होकर और अपना नैतिक कर्तव्य समझकर पानी की एक-एक बंूद को बचाना है और बरसात के पानी से भूजल स्तर की सेहत को सुधारने का संकल्प भी लेना है। इतना ही नहीं भूजल कोष अधिकारी डा. महावीर सिंह और उनकी टीम की तरफ से अब जल शक्ति अभियान के तहत बरसात के पानी को बचाने के प्रयास किए जाएंगे। इसके लिए बकायदा एक योजना भी तैयार की गई है।

हर ब्लाक में लगेंगे 10 से 15 रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम
भूजल कोष अधिकारी डा. महावीर सिंह का कहना है कि जल शक्ति अभियान के तहत कुरुक्षेत्र जिले में करीब 2 करोड़ रुपए की लागत से 80 रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इनमें से प्रत्येक ब्लाक में 10 से 15 रेन वाटर हारवेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे ताकि बरसात का सारा पानी जमीन के नीचे चला जाए। ये सभी सिस्टम सरकारी स्कूलों और भवनों में ही लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षक और बच्चे पानी की महता को समझेंगे और अपने परिजनों को भी जल को बचाने के प्रति जागरुक करेंगे।

कृषि विभाग के अधिकारियों को होना होगा सचेत
अतिरिक्त उपायुक्त पार्थ गुप्ता ने कहा कि इस जिले में 37 हजार 277 टयूबवैलों से भूजल की निकासी की जा रही है। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा पानी धान की फसल पर खपत किया जा रहा है। इसलिए कृषि विभाग के अधिकारियों को सचेत होना पड़ेगा और किसानों को फसल विविधिकरण अपनाने के लिए प्रेरित करना होगा। अभी हाल में ही राज्य सरकार ने फसल विविधिकरण के तहत मक्का, अरहर तथा कम पानी की लागत वाली अन्य फसलों को अपनाने के लिए योजना तैयार की है। इस योजना से किसानों को जहां आर्थिक फायदा होगा वहीं पानी को भी बचाया जा सकेगा।

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