संस्कृति के क्षेत्र में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का अहम् योगदान, अंतर्राष्ट्रीय फलक पर पहुंचा केयू:कटारिया

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Kurukshetra/Alive News: भारत सरकार के केन्द्रीय जलशक्ति राज्यमंत्री रतन लाल कटारिया ने कहा है कि दक्षिण एशियाई संस्कृति को मंचित करने का अद्भुत प्रयास है केयू साउ फेस्ट 2020। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों व युवा कलाकारों के लिए ऐसे मंच निरन्तर प्रदान करने चाहिए। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय शुरू से ही ऐसा करता रहा है। इसलिए सांस्कृतिक विकास में इस विश्वविद्यालय का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव संस्कृतियों के साथ-साथ युवा पीढ़ी को एक दूसरे के नजदीक लाता है जिससे समाज में शान्ति व भाईचारा बढ़ता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों को निरन्तर आयोजित करने की आवश्यकता है।

कटारिया ने कहा कि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय देश के श्रेष्ठतम विश्वविद्यालयों में से एक है। नैक ए-प्लस ग्रेड प्राप्त इस विश्वविद्यालय की दुनिया भर में ख्याति है। यही कारण है कि आज कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय पहली बार इस अंतर्राष्ट्रीय स्तर के युवा महोत्सव की मेजबानी कर रहा है। वे गुरूवार को 13वें दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक युवा महोत्सव में बतौर मुख्यातिथि बोल रहे थे।

दक्षिण एशिया भर से आए युवाओं के बीच सांसद कटारिया एक अलग ही अंदाज में दिखे। उन्होंने उनके जीवन के एक किस्से को सांझा करते हुए बताया कि जब वो युवा हुए तो वो एक गीत गाया करते थे कि चोर बाजारी, रिश्वतखोरी, पाकेटमारी जो बंद कर दे हम उसने लीडर जाने, जो भष्ट्राचार खत्म कर दे, जनता का धन लूट-लूट के महल बनाने वाला न हो मेहनत करता रहे सदा जो एश उडाने वाला न हो। उन्होंने कहा कि एक एक पत्थर की भी तकदीर बदल सकती है शर्त यह है कि पत्थर को सलीके से संवारा जाए। ऐसे कार्यक्रम टूरिज्म की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने बताया कि वे 7 वर्ष तक कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं तथा बाल कलाकार रहे हैं। उन्हें 1963 में पंडित जवाहरलाल नेहरू से बाल कलाकार का पुरस्कार भी मिला था। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशियाई युवा महोत्सव में दक्षिण एशियाई कला एवं संस्कृृति को हम एक मंच पर देखते हैं। विभिन्न देशों से आए कलाकार अपने देश की कला, संस्कृृति, वेशभूषा, जीवन दर्शन, किस्से व कहानियों को प्रस्तुत करते हैं। इससे हमें एक दूसरे को समझने का मौका मिलता है।

पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में शान्ति, समृद्धि, आपसी भाईचारे व कला एवं संस्कृृति के आदान-प्रदान का यह महोत्सव एक बड़ा प्रतीक है। इस सांस्कृृतिक महोत्सव में विभिन्न दक्षिण एशियाई देशों की सांस्कृृतिक गतिविधियों का आदान-प्रदान हुआ है जिससे निश्चित रूप से लोक संस्कृृति को सहेजने व संरक्षण करने में सहायता मिलेगी। यह महोत्सव विभिन्न देशों के बीच शैक्षणिक, सामाजिक, आर्थिक क्षेत्रों में सक्रिय सहयोग व आपसी समझ को बढ़ावा देने में मील का पत्थर साबित हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक महोत्सव एक-दूसरे देश की सांस्कृतिक धरोहर को समझने का अवसर प्रदान करते हैं। इस महोत्सव में विदेशी युवा कलाकारों के साथ-साथ देश के विभिन्न राज्यों के लगभग 28 विश्वविद्यालयों से युवाओं ने भाग लिया है। भारत की सांस्कृृतिक विविधता के दर्शन भी इस मंच के माध्यम से हुए हैं। भारत की सबसे बड़ी खूबी इसकी विशालता व सांस्कृृतिक विविधता है। किसी देश की युवा पीढ़ी जब उस विविधता व दर्शन को मंच के माध्यम से प्रस्तुत करती है तो ऐसे क्षण प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में न भुलाए जाने वाले पल होते हैं।

उन्होंने कहा कि आर्थिक व सामरिक रूप से मजबूत देश अब तक दुनिया का नेतृृत्व करते रहे हैं लेकिन 21वीं सदी में दुनिया का नेतृत्व सांस्कृतिक रूप से मजबूत देश ही करेंगे और उसमें दक्षिण एशियाई देशों की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होगी। अयही एक रास्ता है जो दुनिया को एक दूसरे के नजदीक ला सकता है। विश्व में आज जिस तरह का वातावरण है। ऐसे माहौल में इस तरह के सांस्कृतिक महोत्सव सिर्फ इस क्षेत्र के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में आपसी, प्यार, प्रेम, भाईचार, आपसी समृद्धि व खुशहाली के लिए जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि जिस उद्देश्य के लिए एआईयू ने इस महोत्सव के आयोजन के लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय को चुना है। उस आयोजन में यह महोत्सव निश्चित रूप से सफल होगा।

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