मिशन जागृति का काम “जागते रहो-जगाते रहो”: परवेश मलिक

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परवेश मलिक

आज जहां समाज में लोग अपने स्वार्थ के लिए जीते है और अपने लिए काम करते हैं वहां मिशन जागृति के फाउंडर और जनरल सेक्रेटरी परवेश मलिक जैसे लोग भी है जो समाज और पर्यावरण के लिये बिना किसी स्वार्थ के काम करते है। परवेश मलिक जो एक सर्विसमैन हैं शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण के लिए काम करते हैं। अलाइव न्यूज़ के संपादक तिलक राज शर्मा के निर्देशन में रोज़ी सिन्हा के द्वारा की गयी बात के कुछ अंश इस प्रकार है:

 

मिशन जागृति की शुरुआत कब हुई थी? और आपके मन में समाज सेवा करने का विचार कैसे आया?
मिशन जागृति एनजीओ की शुरुआत अक्टूबर 2007 में हुई थी और परिवार के वातावरण और मेरे दादा जी द्वारा दी गयी सीख के कारण मेरे अंदर समाज सेवा करने की इच्छा व्यक्त हुई। समाज सेवा करने का बीज परिवार के द्वारा बोया गया और अच्छे वातावरण और संगत से वो बीज समाज सेवा के रूप में अंकुरित हुआ।

आप अपने एनजीओ मिशन जागृति के बारे में कुछ बताये?
मिशन जागृति शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण और महिला सशक्तिकरण के लिए काम करती हैं। हमारा नारा हैं जागते रहे जगाते रहो, एक ही सपना एक ही विचार उठे नींद से हर नर-नार। हमारे एनजीओ में लगभग 500 वालंटियर जुड़े हुए हैं जिनमे से 100 सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। हमारा एनजीओ लोगों को जागरूक करने का काम करता है। 2013 निर्भया कांड के बाद हमारे एनजीओ के द्वारा जागरूकता और सर्वेक्षण के लिए आखिर क्यों नामक सर्वे किया गया जिसमे लगभग 5500 लोगों को शामिल किया गया और उनको शपथ पत्र के माध्यम से लोगों को बलात्कार और उस से सम्बंधित विषयों को लेकर लोगों को जागरूक किया गया। उसके बाद संस्था द्वारा बिटिया नामक कम्पैन चलाया गया और लोगों को कन्या भ्रूण हत्या के बारे में जागरूक किया गया। एनजीओ के द्वारा ओपन हाउस डिस्कशन करवाया जाता हैं जिसमे लोग सामाजिक समस्याओं से सम्बंधित अपने मन की बात कह सकते हैं।

इतनी जागरूकता के बाद भी लोगों में जागरूकता क्यों नहीं हैं?
आज के समय में व्यक्ति अर्थ (धन ) के पीछे पागल हैं। लोग स्वार्थी हो गए हैं। सामूहिक परिवार एकल परिवार में परिवर्तित हो गए हैं जिससे लोगों में जुड़ने की भावना कम हो गयी हैं। लोगों में संस्कारों की कमी हो गयी है। जिससे उनमे जागरूकता की कमी आ गयी हैं।

आपके एनजीओ का उद्देश्य क्या है?
हमारे एनजीओ का उद्देश्य लोगों को सवेदनशील बनाना हैं। उनके अंदर संवेदना जगाना है ताकि लोग अपने संस्कार, नैतिक शिक्षा आदि का महत्व समझ सके।

आप एनजीओ के माध्यम से समाज को कोई सन्देश देना चाहते हैं?
हां, मैं ये सन्देश देना चाहता हूँ कि लोग सवेदनशील बने। अपने स्वार्थ में अंधे ना हो। बड़ी बड़ी बातें ना करे और अगर कर भी रहे है छोटे छोटे काम कुछ तो कर ले। अच्छे लोग अगर एक साथ रह के काम करे तो समाज में एक अच्छे वातावरण का निर्माण होगा।

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