“मोदी तेरे से बैर नहीं, कृष्णपाल तेरी खैर नहीं” ने बढ़ाया सियासी पारा

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Faridabad/Alive News : कहते हैं चुनावों में नारों का बहुत महत्व होता है। उधर कांग्रेश जहां “चौकीदार चोर है” के नारे से जोरदार प्रचार कर रही है वहीं भाजपा “मैं भी चौकीदार” का स्लोगन लेकर चल रही है।

गौरतलब है कि राजस्थान चुनाव में एक नारे ने जोर पकड़ा था। जिसमें प्रचार हुआ था कि “मोदी तेरे से बैर नहीं वसुंधरा तेरी खैर नहीं”। ऐसा ही नारा फरीदाबाद शहर में कृष्णपाल गुर्जर को लेकर चल रहा है। कल देर रात शहर के अलग-अलग जगह पर नारे लगे हुए होल्डिंग ने सियासी पारा चढ़ा दिया। रात लगभग 10:00 बजे सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल हुई। जिसमें शहर के यूनीपोल पर इस तरीके का स्लोगन लिखे हुए बोर्ड दिखे। जिस पर हमारे संवाददाता ने मौके पर जाकर देखा तो बड़खल मोड़ पर एक बोर्ड यूनीपोल पर लगा हुआ था। हालांकि कृष्ण पाल गुर्जर के समर्थक मौके पर पहुंच चुके थे और कुछ ही देर में उसको हटा दिया गया। लेकिन यह बोर्ड किसने लगाए इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।

जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे ही सियासी हलचल बढ़ रही है। अभी कुछ दिन पहले भाजपा द्वारा आयोजित कलराज मिश्र की अध्यक्षता में सभा का आयोजन किया गया। आते ही कुछ लोगों ने कृष्ण पाल गुर्जर का विरोध करना शुरू कर दिया। उसके थोड़ी देर बाद एक वीडियो भी वायरल हुआ। जिसमें कलराज मिश्र द्वारा टिप्पणी की गई थी। हालांकि भाजपा ने सिरे से नकारते हुए पुलिस में शिकायत भी दे दी है।

भाजपा ने शिकायत में कहा है कि कलराज मिश्र ने ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की है बल्कि वीडियो से छेड़छाड़ की गई है। विरोध का आलम यह है कि अभी कुछ दिन पहले सिद्धपीठ श्री हनुमान मंदिर मार्केट नंबर 1 मैं दशहरा बचाओ कमेटी के महंत ने यह घोषणा की थी कि यदि कृष्णपाल गुर्जर को टिकट मिलता है तो वह भाजपा का विरोध करेंगे। कल पूर्व विधायक चंद्र भाटिया के भाई ने भी एक बयान जारी किया है। जिसमें उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि यदि भाजपा कृष्णपाल गुर्जर को टिकट देती है तो उनका विरोध किया जाएगा। यहां देखने वाली बात यह कि भाजपा की तरफ से टिकट की दावेदारी केवल दो लोगों ने करी है। एक पूर्व सांसद के बेटे दयानंद बैंदा ने दूसरी कृष्ण पाल गुर्जर ने लेकिन पल पल बढ़ता विरोध कहीं ना कहीं गुर्जर के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है।

रात भर दौड़ते रहे समर्थक
सोशल मीडिया पर तस्वीर वायरल होते ही गुर्जर समर्थक अलग-अलग जगह पर पहुंचना शुरू हो गए। हमारे संवाददाता ने जब सैनिक कॉलोनी में लगे बोर्ड को देखा तो उससे पहले ही वहां पर गुर्जर के समर्थक पहुंच चुके थे। उन्होंने बोर्ड को तुरंत वहां से हटा दिया लेकिन यह बोर्ड किसने लगाए इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।

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