Faridabad/Alive News : आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे नगर निगम के पास बिजली का बिल भरने के पैसे नहीं हैं। बिजली निगम दो बार नगर निगम का कनेक्शन भी काट चुका है। नगर निगम का कहना होता है कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा है इसलिए अभी बिजली बिल नहीं भर सकता, जबकि यही नगर निगम केवल ‘सलाह’ लेने के लिए हर माह 2.5 लाख रुपये से अधिक खर्च करता है।

आरटीआइ याचिकाकर्ता वरुण श्योकंद ने निगम में याचिका डाली थी, जिसमें उन्होंने पूछा था कि निगम में कितने सलाहकार कौन-कौन से पद पर काम कर है, और उन्हें कितना वेतन दिया जाता है, जिसके बाद यह जानकारी मिली। नगर निगम का 20 करोड़ रुपये से अधिक बिजली बिल बकाया है। बिजली निगम ने कार्रवाई करते हुए दो बार कनेक्शन भी काट दिया है। इसके बावजूद निगम अपने खर्चों पर नियंत्रण नहीं लगा पा रहा है। निगम में कई खर्चें हैं, जिन्हें कम किया जाए तो निगम अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकता है।

टूटी सडक़ों पर बजट की कमी का रोना
शहर की टूटी सडक़ों को बनाने के लिए निगम अधिकारियों से मांग की जाती है तो बजट का रोना रो देते हैं। निगम का कहना होता है कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। प्रदेश सरकार से बजट आने पर ही सडक़ों को बनवाया जाएगा। निगम के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पैसा न होने के कारण वह पैचवर्क भी नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा निगम कर्मचारी हर माह वेतन का रोना रोते हैं। निगम के कर्मचारी समय पर वेतन न मिल पाने पर हड़ताल भी कर चुके हैं।

नौ सेवानिवृत अधिकारियों पर खर्च होते हैं 2.5 लाख से अधिक
नगर निगम में नौ सेवानिवृत अधिकारी अलग-अलग ब्रांच में काम कर रहे हैं, जिन्हें करीबन 20 से 25 हजार रुपये का वेतन दिया जाता है। इसके अलावा कार्यालय, बिजली, गाड़ी और पेट्रोल का खर्च अलग से दिया जाता है। नगर निगम में काम कर रहे यह सेवानिवृत अधिकारी सलाह देने के अलावा किसी योजना में शामिल नहीं होते हैं।

सेवानिवृत अधिकारी-मौजूदा पद- वेतन
लालचंद चौहान, सफाई सलाहकार, 15,000 रुपये और पेट्रोल
पीएल इंदोरिया, विधि सलाहकार, 22,000 रुपये
दिलबाग ङ्क्षसह, आयुक्त व्यक्तिगत सलाहकार, 25,000 रुपये
बलवीर ङ्क्षसह पवार, स्थापना सलाहकार, 29,000 रुपये
सोहनलाल मदान, अधीक्षण अभियंता सलाहकार, 35,000 रुपये
अशोक कुमार, सलाहकार सीएमसी कैंप अॅाफिस, 25,000 रुपये
इंद्रपाल बिश्नोई, प्रशासनिक सलाहकार, 57,900 रुपये
अरुण शर्मा, सफाई सलाहकार, 51,500 रुपये
रामप्रसाद शर्मा, राजस्व सलाहकार, 24,000

  • नगर निगम हमेशा आर्थिक तंगी का रोना रोता है, जबकि वह बेवजह ही सलाहकार रखकर पैसा खर्च कर रहा है। सवाल यह उठता है अगर निगम सलाहकार की सलाह पर चल रहा है तो सरकार से मोटा वेतन लेने वाले निगम अधिकारी क्या कर रहे हैं –वरुण श्योकंद, आरटीआइ याचिकाकर्ता।

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