Palwal/Alive News : स्वयं सहायता समूहों और संयुक्त देयता समूहों को बैंकों से जोडऩे के कार्यक्रम को गति देने के उद्देश्य से नाबार्ड द्वारा पलवल जिला में कार्यरत बैंक शाखा प्रबन्धकों के लिए गत दिवस रतीपुर स्थित ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) में एकदिवसीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वाणिज्यिक बैंकों, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक और जिला सहकारी बैंक के 26 शाखा प्रबन्धकों ने प्रतिभागिता की। कार्यक्रम का आयोजन नाबार्ड के सहायक महाप्रबंधक (जिला विकास) सुबोध कुमार द्वारा किया गया।

उन्होंने स्वयं सहायता समूह और संयुक्त देयता समूह विषय पर विस्तारपूर्वक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में विशेष अतिथि/ संकाय के रूप में अग्रणी जिला प्रबन्धक सत्यदेव आर्य, सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबन्धक आर.पी. शर्मा और आरसेटी के निदेशक रोहताश सिंह यादव उपस्थित थे। कार्यक्रम के आरंभ में नाबार्ड के जिला विकास प्रबन्धक सुबोध कुमार ने स्वयं सहायता समूह कार्यक्रम की पृष्ठभूमि और उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए ग्रामीण महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में इस कार्यक्रम की क्रांतिकारी भूमिका को रेखांकित किया। नाबार्ड के जिला विकास प्रबन्धक ने ऋण अनुशासन को अच्छे समूह की प्रमुख विशेषता बताते हुए कहा कि स्वयं सहायता समूह निर्धन महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण की सीढी हंै।

बैंकों को इनका वित्तपोषण कर ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबी बनाने का मार्ग प्रशस्त करना चाहिए। संगोष्ठी में नाबार्ड द्वारा देश में स्वयं सहायता समूहों के डिजिटलीकरण के लिए आरंभ की गई प्रायोगिक परियोजना की भी जानकारी दी गई और बैंक कर्मियों से आहवान किया गया कि वे समूहों के आंकडो का रख-रखाव कर उनकी सही रिपोर्टिंग करें। ताकि भविष्य में पलवल जिला के स्वयं सहायता समूहों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा सके। संगोष्ठी में स्वयं सहायता समूह की कार्य प्रणाली, समूह की बैठकों, बही खातों के रख-रखाव और उनकी आर्थिक गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए बैंकों को यह बताया गया कि कैसे उन्हें अच्छे समूह की पहचान कर उनका वित्तपोषण करना चाहिए। संगोष्ठी के दौरान लघु और सीमांत किसानों, काश्तकारों, भूमिहीनों और बटाईदारों को बैंक ऋण से जोडने की समूह-आधारित पद्धति ‘संयुक्त देयता समूह कार्यक्रम’ के बारे में भी बैंककर्मियों का मार्गदर्शन किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला अग्रणी बैंक प्रबन्धक सत्यदेव आर्य ने स्वयं सहायता समूह और संयुक्त देयता समूह के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नाबार्ड, बैंकों और गैर-सरकारी संगठनों के बीच आपसी तालमेल की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने बैंकों से आहवान किया कि वे समूह-पद्धति के माध्यम से वित्तपोषण कर सामाजिक बदलाव लाने में अग्रणी भूमिका निभाएँ। ओ.बी.सी. आरसेटी के निदेशक रोहताश सिंह यादव ने आरसेटी द्वारा चलाये जा रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी दी और समूह-सदस्यों के प्रशिक्षण के लिए आरसेटी के मंच का उपयोग करने का आग्रह किया।

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