एनआईटी- 86: मजबूत निर्दलीय होने से कही बीजेपी- कांग्रेस प्रत्याशी न जाए पिछड़

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Tilak Raj Shrama/Alive News
Faridabad: एनआईटी विधानसभा में सभी राजनीतिक दलों ने अपने- अपने प्रत्याशियों को टिकट देकर दांव खेल दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने इनेलो के विधायक एवं वर्तमान भाजपा प्रत्याशी नगेन्द्र भड़ाना को टिकट दिया है। वही कांग्रेस पार्टी ने नीरज शर्मा, इंडियन नेशनल लोकदल ने जगजीत कौर ( पन्नू ), जननायक जनता पार्टी ने तेजपाल डागर, बहुजन समाज पार्टी ने हाजी करामत अली पर दांव खेला है।

इस सीट पर निर्दलीय पूर्व विधायक चन्दर भाटिया के चुनाव की ताल ठोकने के बाद त्रिकोणीय मुकाबला बन गया है। इस सीट पर बीजेपी ने कार्यकर्त्ता को टिकट न देकर दल- बदलू विधायक नगेन्द्र भड़ाना को टिकट देकर कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। इसमें कई मंडल अध्यक्षों ने टिकट की घोषणा होने पर नाराजगी जाहिर की थी और यशवीर डागर जो कि भाजपा के पूर्व प्रत्याशी रहे है उनके समर्थन में प्याली चौक पर एक सभा की थी जिसमे बीजेपी के अधिकतर कार्यकर्ताओं ने यशवीर डागर का समर्थन करने का ऐलान किया। भाजपा के योद्धा ही कही नगेन्द्र भड़ाना के रथ को रोकने में कामयाब न हो जाए।

पूर्व मंत्री पंडित शिवचरण लाल शर्मा के बेटे कांग्रेस प्रत्याशी नीरज शर्मा अपने पिता के विकास कार्यों की दुहाई देकर चुनावी रण में है। नीरज शर्मा पहले अपने पिता की तरह निर्दलीय ही चुनाव में उतरने का मन बना रहे थे लेकिन कांग्रेस पार्टी के पूर्व मुख्यमंत्री से नजदीकियां होने की वजह से पार्टी की टिकट से चुनाव लड़ने का फैसला लिया। कुल मिलाकर नीरज शर्मा से नाराज पंडित समर्थकों को एक ओर करने में एड़ी- चोटी का जोर लगाना पड़ेगा। तब जाकर कही मुकाबला रोचक बनेगा।

राजनीति के पंडितों का मानना है कि बसपा के प्रत्याशी करामात अली का टिकट पार्टी ने सही समय पर घोषित करने से क्षेत्र में बसपा वोट बैंक के अलावा अल्पसंख्यक वोट पर पहुंच बनाने में कामयाबी मिली है। करामत अली ने एनआईटी में लगने वाले मुस्लिम बाहुल्य गांव में अपनी पकड़ के साथ- साथ समर्थकों का भी बड़ा कुनबा इकट्ठा कर लिया है।

ज्ञात रहे है कि 2015 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने लियाकत अली पर दांव खेला था। लियाकत अली ने शहर का वोट छोड़कर एनआईटी से लगने वाले 22 गांव के वोट बैंक पर कब्ज़ा कर लिया था और नगेन्द्र भड़ाना और शिवचरण लाल शर्मा की मुस्लिम बाहुल्य गांव के बूथों पर हार का मुंह देखना पड़ा था। लियाकत की हार शहरी क्षेत्र से शुरू हुई थी। इस बार करामत अली शहरी क्षेत्र के वोट बैंक में सेंध लगाने में लगे हुए है। निर्दलीय प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक चन्दर भाटिया अपने मिलनसार स्वभाव और जनहितैषी होने के कारण एनआईटी की जनता को पसंद आ रहे है।

चन्दर भाटिया एनआईटी में ही नहीं बल्कि फरीदाबाद की सभी विधानसभाओं में लोकप्रिय नेता है और चुनावी घोषणा से पहले ही उन्होंने अपने चुनाव का बिगुल जवाहर कॉलोनी से बजा दिया था। क्योंकि जवाहर कॉलोनी में पंजाबी वोट बैंक अधिक होने की वजह से चन्दर भाटिया मजबूत दिखाए दे रहे है। आम आदमी पार्टी से संतोष यादव, इनेलो से जगजीत कौर (पन्नू ) और निर्दलीय चन्दर भाटिया के एनआईटी में आने से स्व. पंडित शिवचरण लाल शर्मा के वोट बैंक में सेंध लगा रहे है।

इससे साफ़ हो रहा है कि शहरी वोट बैंक को बाँटने में नगेन्द्र भड़ाना, नीरज शर्मा, चन्दर भाटिया, जगजीत कौर(पन्नू ), संतोष यादव सहित अन्य निर्दलीय प्रत्याशी कामयाब रहेंगे। उधर , देहात क्षेत्र में मुस्लिम वोट अधिक होने की वजह से बसपा के प्रत्याशी करामत अली अकेले हो सकते है क्योंकि अल्पसंख्यक वोट फूल पर न जाकर कहीं पूरा का पूरा हाथी

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