अब महिला मरीजों का इलाज नर्स व तीमारदारों की मौजूदगी में होगा

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Faridabad/Alive News : बीके अस्पताल में अब मेल डॉक्टर या लैब टेक्नीशियन महिला मरीजों का इलाज/जांच महिला कर्मचारियों और उनके तीमारदारों की उपस्थिति में करेंगे। हाल ही में 12 वर्षीय एक किशोरी के साथ अस्पताल के एक कंपाउंडर द्वारा छेड़छाड़ करने की घटना के बाद यह सर्कुलर जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि मेल डॉक्टर या लैब टेक्नीशियन महिलाओं के उपचार के दौरान एक महिला कर्मचारी को अपने साथ जरूर रखें। साथ ही मरीज के साथ उनके तीमारदार को भी कक्ष में बुलाएं। इससे मरीज की सुरक्षा जहां पुख्ता रहेगी, वहीं डॉक्टर उसकी बीमारी की जानकारी बड़ी आसानी से उसके तीमारदार को दे सकेंगे।

बीके अस्पताल की ओपीडी में रोज 15 सौ से ज्यादा मरीज पहुंचते हैं। इनमें से गायनी विभाग में 250 से 300 गर्भवती उपचार के लिए पहुंचती हैं। जबकि प्रसूति वार्ड में भी 40 से ज्यादा प्रसूता भर्ती रहती हैं। जनरल वार्ड से लेकर अन्य विभिन्न वार्डों में लगभग 100 से ज्यादा महिला मरीजों को भी रोज भर्ती किया जाता है। लिहाजा इन मरीजों के साथ छेड़छाड़ व अन्य कोई अप्रिय घटना न हो, इसलिए अस्पताल प्रबंधन ने यह निर्देश जारी किया है।

– 5 दिन पहले एक कर्मचारी ने इलाज के लिए पहुंची किशोरी से की थी छेड़छाड़
बीके अस्पताल में 1 अगस्त को 12 साल की किशोरी अपनी मां के साथ घाव की ड्रेसिंग कराने पहुंची थी। पीड़ित बच्ची ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 16 जुलाई को उसके पैर के अंगूठे का ऑपरेशन हुआ था। 27 जुलाई को वह अपने पिता के साथ अस्पताल में पट्टी बदलवाने आई थी। पिता उसे पट्टी बदलवाने वाले कमरे में छोड़कर बाहर चले गए। आरोप है कि अस्पताल के कर्मचारी हरीश ने पट्टी बदलने के बाद उसके साथ अश्लील हरकत की। साथ ही यह बात किसी को न बताने की हिदायत दी।

डर की वजह से बच्ची ने उस समय परिवार को कुछ नहीं बताया। डॉक्टर ने पट्टी बदलवाने के लिए उसे 1 अगस्त को दोबारा बुलवाया था। वह सुबह अपनी मां के साथ पट्टी बदलवाने पहुंची। इस दौरान उसने हरीश से पट्टी बदलवाने के लिए इंकार कर दिया और सारी जानकारी मां को बताई। इसके बाद महिला ने हंगामा शुरू कर दिया था। मामले की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था।

– मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अस्पताल की, यह है िनर्देश
पीएमओ डॉ. सविता यादव के अनुसार अस्पताल में मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की होती है। इसलिए आदेश दिया गया है अगर डाक्टर किसी महिला मरीज का उपचार करते हैं तो उनके साथ कोई न कोई महिला कर्मी होनी चाहिए। अगर महिला कर्मी उपलब्ध नहीं है तो डॉक्टर व अन्य मेडिकल स्टाफ मरीज के तीमारदार की उपस्थिति में उसका उपचार करें। संभव हो तो महिला कर्मी के साथ तीमारदार को भी अपने कक्ष में बुलाएं। इससे उन्हें किसी प्रकार की कोई परेशानी व कुछ गलत होने की आशंका नहीं रहेगी।

– महिलाओं के लिए अलग जांच रूम
िपछले महीने बीके अस्पताल में पहुंची नेशनल हेल्थ सिस्टम रिसोर्स सेंटर (एनक्यूएएस) टीम ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों से कहा था कि इमरजेंसी में 2 जांच रूम बने होने चाहिए। इसमें एक रूम में पुरुष मरीज की और दूसरे में महिला मरीज की जांच होनी चाहिए है। लेकिन बीके अस्पताल में एक ही रूम बना हुआ है। इसमें ड्रेसिंग रूम लिखा हुआ है। इस रूम में डॉक्टरों द्वारा मरीजों की जांच भी की जाती है और अगर किसी मरीज की ड्रेसिंग करनी होती है तो वह भी वहीं की जाती है।

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