अब बर्बाद नहीं होगा अन्न का एक भी दाना

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Alive News : दुनिया में कई देश ऐसे हैं जहां लोग एक-एक निवाले को तरस रहे हैं, वहीं दूसरी ओर संपन्न देशों में खाने की बर्बादी हो रही है। भोजन की एक बड़ी मात्रा तो हर साल उन्हें उनकी पैकिंग से निकालने में ही बर्बाद हो जाती है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने नई पैकिंग ईजाद की है, जिससे अन्न या खाद्य पदार्थों का एक दाना भी बर्बाद नहीं होगा। इस पैकिंग को तैयार करने वाले शोधकर्ताओं के दल में एक भारतीय भी शामिल है। अमेरिका में वर्जीनिया टेक के शोधकर्ताओं ने बताया कि दूध से बने उत्पाद, मांस आदि चिपकने वाले खाद्य पदार्थों को पैकिंग से निकालने में सबसे ज्यादा बर्बादी होती है। इसे रोकने के लिए ही नई पैकिंग ईजाद की गई है।

इस तरह की तैयार
साइंटिफिक रिपोट्र्स नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि पॉलिथीन और अन्य पैकिंग मैटीरियल के साथ खाने वाले तेलों का प्रयोग कर ये पैकिंग तैयार की गई है। खास बात ये है कि इसे सस्ते पॉलिथीन और पॉलिप्रोपिलीन मैटीरियल के साथ भी प्रयोग किया जा सकता है। दुनिया भर में बनने वाले 55 प्रतिशत पैकिंग मैटीरियल इन्हीं पदार्थों से बनते हैं। इन्हें आसानी से रीसाइकिल भी किया जा सकता है।

सबसे पहले हार्वर्ड ने की खोज
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 2011 में सबसे पहले चिकने पदार्थ का निर्माण किया था जो दीये की बत्ती की तरह चिकनाई को अपने अंदर रख सकता है। इस पदार्थ की सतह काफी चिकनी और अपने आप साफ होने वाली थी, लेकिन इस प्रक्रिया के लिए ऐसे मैटीरियल की आवश्यकता थी, जिसमें नैनो और माइक्रो लेवल का खुरदरापन हो।

वर्तमान पैकिंग महंगी
इस अध्ययन में शामिल और वर्जीनिया टेक के शोध छात्र रनित मुखर्जी ने बताया कि अभी तक बने चिकने तरल पदार्थ वाली पैकिंग सिलिकन और फ्लोरीन के प्रयोग से बनती है, जो कि काफी महंगी पड़ती है। अब हम पॉलिथीन मैटीरियल से भी ऐसे प्रोडक्ट बना सकते हैं। इससे पैकिंग की कीमत पर कम होगी और इससे खाने की बर्बादी भी कम हो सकेगी।

नई पैकिंग की यह है खासियत
वर्जीनिया टेक में सहायक प्रोफेसर जोनाथन बोरेको का कहना है कि वर्तमान में जो तकनीक ईजाद की गई है उसमें पॉलिथीन में कोई खुरदरापन देने की जरूरत नहीं है। हमने ऐसे प्राकृतिक तेलों की खोज की है जो प्लास्टिक मैटीरियल के साथ आसानी से प्रयोग हो सकेंगे। इसके अलावा हमने बिनौले का तेल प्रयोग किया है। इस तरह की पैकेजिंग को फूड इंडस्ट्री के साथ दवा इंडस्ट्री में भी प्रयोग किया जा सकता है।

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