अष्टमी और नवमी के दिन इन मुहूर्त में करें कन्या पूजन, जानिए विधि और मंत्र

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New Delhi/Alive News: नवरात्रि के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व है। माता के भक्त नौ कन्याओं को नौ देवियों का रूप मानकर पूजा की जाती है। कन्याओं के पैरों को धोया जाता है और उन्हें आदर-सत्कार से भोजन कराया जाता है। मान्यता है कि इससे माता प्रसन्न होती हैं और अपनी कृपा बरसाती हैं। जानिए इस साल शारदीय नवरात्रि पर अष्टमी और नवमी तिथि में कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त और विधि-

अष्टमी तिथि प्रारंभ- 23 अक्टूबर की सुबह 06 बजकर 57 मिनट से।
अष्टमी तिथि समाप्त- 24 अक्टूबर की सुबह 06 बजकर 58 मिनट तक।
नवमी तिथि आरंभ- 24 अक्टूबर की सुबह 06 बजकर 58 मिनट से।
नवमी तिथि समाप्त- 25 अक्टूबर की सुबह 7 बजकर 41 मिनट तक।

कब है अष्टमी और नवमी-
इस साल अष्टमी 24 अक्टूबर (शनिवार) और नवमी 25 अक्टूबर (रविवार) को पड़ रही है। इसके साथ ही 25 अक्टूबर की सुबह की सुबह 7 बजकर 41 मिनट पर नवमी तिथि समाप्त होने के कारण शाम को दशहरा (विजयादशमी) मनाया जाएगा।

ऐसे करें कन्या पूजन-
कन्या पूजन के लिए एक दिन पहले कन्याओं को आदर के साथ आमंत्रित करें।

कन्या पूजन के दिन सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर भगवान गणेश और मां दुर्गा की अराधना करें।

गृह प्रवेश पर कन्याओं पर पुष्प वर्षा कर स्वागत करना चाहिए। इसके साथ ही मां दुर्गा के नौ नामों का जयकारा लगाना चाहिए।

कन्याओं को स्वच्छ आसन में बैठाकर साफ पानी या दूध से भरे थाल में पैर रखवाकर पैरों को धोना चाहिए। पैर छूकर आशीष लेना चाहिए।

उसके बाद कन्याओं को माथे पर अक्षत, फूल और कुमकुम लगाना चाहिए।

मां दुर्गा का ध्यान लगाने के बाद देवी स्वरूप कन्याओं को भोजन कराएं।

भोजन के बाद सामर्थ्य के अनुसार दक्षिणा या उपहार देकर दोबारा पांव छूकर आशीर्वाद लें।

मंत्र-

‘या देवी सर्वभूतेषु शांति रूपेण संस्थिता। नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमस्‍तस्‍यै नमो नम:।’

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