Faridabad/Alive News : 21बी स्थित जीवा पब्लिक स्कूल में हिन्दी दिवस के अवसर पर दोहा, श्लोक, नवरस एवं हिन्दी वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यालय के छठी से लेकर नौवीं कक्षा के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

यह प्रतियोगिता केवल एक प्रतियोगिता न होकर आज के इस आधुनिक युग में भारतीय संस्कारों एवं मूल्यों के प्रति आने वाली पीढ़ी को जागृत करने का माध्यम भी बनी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में विशेष रूप से कत्र्तव्य परायणता, अनुशासन, सुचरित्रता, माता-पिता, गुरू एवं बड़ों का सम्मान एवं परोपकार की भावना को बढ़ावा देना रहा। भारतीय संस्कृति अपने इन्हीं मूल्यों के कारण सर्वश्रेष्ठï मानी जाती है ।

इस प्रतियोगिता में कक्षा छठी एवं सातवीं के लिए दोहा एवं श्लोक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया । वहीं कक्षा आठवीं के छात्रों ने नवरस पर अपनी अदभुत प्रस्तुति दी। छात्रों ने नवरस की विभिन्न विधाओं को प्रस्तुत किया। जिसमें उन्होंने रौद्र, करूण, हास्य एवं श्रृंगार रस की विधाएं प्रस्तुत की। वहीं नौवीं के छात्रों ने भी वाद-विवाद प्रतियोगिता में विभिन्न विषयों पर तार्किक ढंग से अपने-अपने विषयों को प्रस्तुत कर प्रतियोगिता को रोमांचक बना डाला।

दोहा प्रतियोगिता में कक्षा छठीं ब से परी सिसोदिया सर्वश्रेष्ठ वक्ता रही। लतिशा जयंत ने श्रेष्ठïकथानक प्रस्तुत किया एवं छठी कक्षा की ही लावण्या अग्रवाल की प्रस्तुति विशेष प्रशंसनीय रही। श्लोक गायन प्रतियोगिता में सातवीं कक्षा की तनुश्री दूबे सर्वश्रेष्ठ वक्ता रही, देवेश बंसल श्रेष्ठ कथानक एवं पूर्वा रहेजा की प्रस्तुति विशेष प्रशंसनीय रही।

नवरस प्रतियोगिता में आठवीं कक्षा की इशा चौधरी की श्रृंगार रस की प्रस्तुति सर्वश्रेष्ठरही। दिवाकर माहरा हास्य के लिए सर्वश्रेष्ठ वक्ता रहे। पलक चौधरी करूण रस में सर्वश्रेष्ठï परिधान के लिए पुरस्कृत की गई। वहीं आकांक्षा चौधरी की वीर रस की प्रस्तुति भी बहुत प्रशंसनीय रही। नौवीं कक्षा की वाद-विवाद प्रतियोगिता में याशिका चौहान एवं ओजस्वी भरमी सर्वश्रेष्ठ वक्ता रही। मोनिका राठौर एवं मीनाक्षी चंदीला कथानक के लिए पुरस्कृत की गई। दीक्षा शर्मा की प्रस्तुति भी अति प्रशंसनीय रही।

जीवा पब्लिक स्कूल एक ऐसा स्कूल है जहाँ छात्र केवल किताबी शिक्षा तक ही सीमित नहीं रहता है । यहाँ पर छात्रों को पाठ्ïयक्रम की शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों एवं भारतीय संस्कृति का पाठ भी पढ़ाया जाता है। अध्यक्ष ऋषिपाल चौहान एवं उपाध्यक्षाचंद्रलता चौहान का मानना है कि जब तक छात्र अपनी संस्कृति की जड़ से जुड़े रहते हैं तब तक उनके चरित्र का विकास होता रहता है इसलिए आने वाली भावी पीढ़ी को उनके सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़े रखना भी विद्यालय के पाठ्ïयक्रम में भी शामिल होना चाहिए । कार्यक्रम के दौरान प्रधानाचार्या देविना निगम एवं प्रशासनिका मुक्ता सचदेवा भी उपस्थित रहीं।

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