Part-7 : COVID -19 और इंडिया-मार्च 2020

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जे बी शर्मा

मीनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एण्ड फैमिली वेलफेयर गवर्नमेंट इंडिया के अनुसार 3 अप्रैल की दोपहर तक देश में कोरोना वायरस विश्वमारी के कुल मरीज़ों की संख्या 2301 तक पहुंच है। यानि अब देश में कोविड 19 के मरीज़ो ने दो हजार का आंकड़ा पार कर लिया है,जबकि 2088 लोग ऐक्टी मरीजों की श्रेणी में आते हैं। वहीं 156 मरीज़ों को ईलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। 56 लोगो की मृत्यु हो चुकी है। ऐसे में सामाजिक तथा शारीरिक फासला बनाए रखना बहुत ज़रूरी हो गया है, और इसका पालन लॉक डाऊन के जरिए ही किया जा सकता है। हमारा निवेदन है कि सरकार-प्रशासन के इस आदेश को गंभीरता से लिया जाए। अन्यथा परिणाम बहुत ही भयावह हो सकते हैं। वहीं जब हम हरियाणा की बात करते हैंं तो पता चलता है कि यहां भी कोविड 19 के मरीज़ों की संख्या बढक़र 43 हो गई है और 13 को डिस्चार्ज कर दिया गया है। 43 में से 5 मामले गुरुग्राम के और 3 नूहं जि़ले के है।

एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देशवासियों को सोशल डिस्टेंसिंग की अनिवार्यता और महत्ता पर बल देते हुए कहा आनेवाली 5 अप्रैल को रात्री 9 बजे 9 मिनट तक अपने-अपने घरों के द्वार या बॉलकनी में एक-एक दीया किसी भी रूप में जलाए। उन्होंने कहा इस कोरोना वयरस जैसी विश्वमारी से लडऩे और इसे हराने का हमारे पास जो सबसे सटीक और उपयोगी हथियार है वह सोशल डिस्टेंसिंग ही है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति स्वयं को अकेला न समझे और एक दूसरे का मनोबल बढ़ाने के लिए 5 अप्रैल की रात्री 9 बजे एक दीया जलाएं।

ऐसे में बड़ा सवाल है कि आज जिस स्थिति में विश्व की मनुष्य जाति आ चुकी है उसका जिम्मेदार कौन है ? क्या ऐसी महामारी विश्व में पहली बार फैली है? तो हमारा उत्तर होगा नहीं। पाठक मित्रों लगभग 20 ऐसी धातक संक्रमक श्रेणी की महामारी और विश्वमारी है जिन्होंने समय – समय पर मनुष्य जाति को उजाड़ के रख दिया। जिनका इतिहास खंगालने पर हमें पता चलता है कि वे मानव के इतिहास में प्री- हिस्टोरिक पीरियड यानि इतिहास काल से भी पूर्व में अस्तित्व में रही हैं। इन में कुछ की चर्चा हम आज के भाग में कर रहे हैं। Plagues and epidemics have ravaged humanity throughout its existence, often changing the course of history.

मनुष्य के समूचे इतिहास क्रम और उससे पूर्व भी संक्रामक महामारियों और विश्वमारियों को प्रादुर्भाव होता रहा है। जिसने समय -समय पर मनुष्य जाति के समक्ष भयंकर चुनौतियां खड़ी की और इसके बहुत बड़े हिस्से को बुरी तरह से उजाड़ के रख दिया। हलांकि आज के संदर्भ हम कहे सकते है कि मनुष्य ने अर्थ, ज्ञान और विज्ञान जगत में काफी उन्नति कर ली है। लेकिन संक्रामक विश्वमारी की चुनौती का मौजूदा उदाहरण हमारे सामने है किस प्रकार आज विश्व के अनेकानेक विकसित देश इस कोरोना वॉयरस के सामने लगभग घुटने टेकने को बेबस दिखाई दे रहे हैं। अब हम चर्चा करते है उस बात की कि, जैसा हमने ऊपर कहा कि मनुष्य के इतिहास काल से पूर्व भी भयंकर संक्रामक महामारी कहें या विश्वमारियों ने अपने प्रकोप से मनुष्य को बेबस किया है और उसे उजाड़ है।

ऐसे में जब हम प्री- हिस्टोरिक पीरियड की बात करते है तो चीन में ईसा के जन्म में से लगभग 5 हज़ार साल पहले एक प्री- हिस्टोरिक पीरियड में चीन के एक गांव को महामारी ने पूर्णता सफाया कर दिया था। उस समय इस महामारी ने किसी भी उम्र के व्यक्ति का लिहाज नहीं किया था। उस समय फैली माहमारी के परिणामों का खुलासा करने में लेखक समक्ष नहीं। पुरातत्वविभाग के अनुसार वह घटनास्थल, ‘‘हमीन मंगाह’’ के नाम से जाना जाता है। उत्तरी- पूर्वी चीन में इस घटनास्थल को बड़ी अच्छी तरह से सुरक्षित रखा गया है। पुरातत्व विभाग और मानव-विज्ञान के अध्ययन से संकेत मिलते है कि महामारी इतनी तेज़ी से व्याप्त हुई कि किसी मृतक का उचित रूप अंतिम संस्कार भी नहीं किया जा सका।

जारी…

(लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक हैं)

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