Faridabad/Alive News : भारतीय आदिवासी समुदाय के विलुप्त हो चुके शस्त्र बूमरैंग या प्रसिद्ध पात्र मोघली का पंजा का प्रदर्शन राजकीय कस्तूरबा कन्या विद्यालय, जवाहर चौक में किया गया। प्रदर्शन के लिए बूमरैंग गुरु विवेक मौंट्रोज़ ने विशेष रूप से अपनी कला का प्रदर्शन किया। उन्होंने बूमरैंग के बारे में जानकारी दी और इसके कार्य करने का तरीका बतलाया।तदुपरांत उन्होंने विभिन्न प्रकार के बूमेरेगों से भिन्न भिन्न लक्ष्यों पर प्रहार कर प्रदर्शन किया जिसे देखकर उपस्थित जन समुदाय आश्चर्य से भर उठा।
बूमरैंग गुरु विवेक मौंट्रोज़ ने इस शस्त्र के बारे में बतलाया कि गोंड आदिवासी समुदाय के शस्त्र लारी को ही अंग्रेजों ने बूमरैंग का नाम दिया है। ऑस्ट्रेलिया में प्रति वर्ष जम्बूरी कैंपश् का आयोजन किया जाता है जिसमें बूमरैंग प्रतियोगिता रखी जाती है और कई प्रतियोगी इसमें सम्मिलित होते हैं। यह भारतीय आदिवासियों की विलुप्त प्राय विरासत है और भारतीय आदिवासी समुदाय के मध्य पुनस्र्थापित हो सके इस दिशा में हम कार्य करने का प्रयास कर रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया के नंजन जारकन जिन्हें केन कोलबंग के नाम से जाना जाता है विवेक मौंट्रोज़ के गुरु हैं। उनका प्रयास रहा कि भारतीय आदिवासी समुदाय की विलुप्त होती विरासत को पुनस्र्थापित किया जाये। सिडनी ओलिंपिक में भारतीय आदिवासी शस्त्र बूमरैंग को सम्मिलित करने का प्रयत्न करते रहे। आज भी यह अपनी पहचान और खेल के दर्जे को पाने के लिए मोहताज है। उल्लेखनीय है कि बूमरैंग को पुन: भारत में स्थापित करने हेतु इस दिशा में विवेक जी देश के कई राज्यों में कार्यक्रम कर रहे हैं।

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