आपातकाल में राजनीति जरुरी या फिर देश की जनता?

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Faridabad/Alive News: एक तरफ देश में कोरोना संक्रमण से लोगो की मौत की संख्या में इजाफा, युवाओं का नौकरी से हाथ धोना और देश के उद्योगपति एवं व्यापारियों का सड़को पर आ जाना देश के लिए बड़ा संकट है। लेकिन देश की देशभगत एवं केंद्र की सत्ता में विराजमान पार्टी बीजेपी सब कुछ भूलकर बिहार के चुनाव में मशगूल है।

क्या बीजेपी के लिए देश की जनता से पहले चुनाव जीतना जरुरी है? अगर, राजनैतिक पार्टियों के लिए देश की जनता से पहले सत्ता का सपना है तो जनता को निर्णय कर लेना चाहिए कि सत्ता के लालचियों को अपना वोट देना चाहिए या फिर इस संकट के समय जनता का साथ देने वाले उन हाथो को सराहना चाहिए। जो इस संकट में संकटमोचन बनकर हॉस्पिटलों में डॉक्टर के रूप में तथा सड़को पर पुलिस के रूप में काम कर रहे हैं।

दरअसल, बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से ही देखने को मिल रही है। गृहमंत्री अमित शाह ने वर्चुअल रैली में साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए चुनाव लड़ेगा। परन्तु चुनाव के चकाचौंध में भूखी जनता बहुत पीछे रह गयी है और इनकी सुध कोई नहीं ले रहा है। आगामी चुनाव की तैयारियों में मग्न शाह शायद भूल गए है कि देश इस समय किन विकट परिस्थितियों से गुजर रहा है तथा चुनाव पर जोर देने से अच्छा होगा कि लोगो के पेट भरने के लिए काम किया जाए।

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