प्रोफेसर बोला- तुम्हारे… अच्छे हैं, नीचे की बॉडी भी मेन्टेन करो

0
33

New Delhi/Alive News : क्या हो, अगर किसी यूनिवर्सिटी में 14 साल से पढ़ा रहे प्रोफेसर पर उसी यूनिवर्सिटी की लड़कियां छेड़छाड़ और यौन उत्पीडऩ का आरोप लगा दें! क्या हो, अगर किसी यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट हर दूसरे सप्ताह किसी पुलिस थाने के सामने प्रदर्शन करते नजऱ आएं! क्या हो, अगर किसी यूनिवर्सिटी के अंदर चल रहे विवाद पर देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी ट्वीट करती नजऱ आए!

इन हालात में ये ‘क्या हो’ एक विवेचना का प्रश्न है? पर इतना तय है कि ये सब होने पर संस्थान में मौजूद छात्रों के लिए पढ़ाई का माहौल खराब होगा और वहां दाखिला लेने की हसरत रखने वाले छात्रों में एक किस्म का शक का भाव पैदा होगा. अगर ऐसा देश की प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के साथ होता है, तो ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होगा।

ये आर्टिकल लिखे जाने तक जेएनयू के बारे में लेटेस्ट खबर ये है कि इसके ‘स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेस’ विभाग में माइक्रो-बायोलॉजी के प्रोफेसर अतुल कुमार जौहरी को दिल्ली के आरके पुरम थाने की पुलिस ने यौन उत्पीडऩ केस में पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया। फिर उन्हें पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां से 30 हज़ार रुपए के 8 अलग-अलग बॉन्ड भरने पर जौहरी को ज़मानत मिल गई, पुलिस ने जौहरी की रिमांड नहीं मांगी।

प्रो.अतुल जौहरी ही वह शख्स हैं, जिनके खिलाफ उनकी छात्राओं ने यौन उत्पीडऩ के आरोप लगाए हैं। वह खुद को बेकसूर बताते हुए दलील देते हैं कि उन्हें ज़मानत दे दी जाए, वरना उनका करियर खराब हो जाएगा।

 

कथित देश-विरोधी नारों, पीएचडी की कम सीटों, अनिवार्य अटेंडेंस का विरोध और पीएचडी दाखिलों में धांधली का आरोप जेएनयू में विवादों की इस लंबी श्रृंखला की अगली कड़ी हैं प्रो.जौहरी, जिनका विवाद 15 मार्च 2018 से शुरू होता है. आइए जानते हैं पूरा मामला-

जेएनयू में प्रो. जौहरी का सफर जून 2004 से बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर शुरू होता है. फरवरी 2008 में वो असोसिएट प्रोफेसर बने और फरवरी 2014 से वो प्रोफेसर हैं. इस दौरान उनका विभाग ‘स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेस’ रहा. प्रोफेसर होने के नाते जौहरी पीएचडी स्टूडेंट्स को रिसर्च करने में सुपरवाइज़ करते हैं। मौजूदा वक्त में ये 11 स्टूडेंट्स को पीएचडी के लिए गाइड कर रहे हैं। इसके अलावा ये विभाग की अन्य क्लासेस में स्टूडेंट्स को पढ़ाते हैं।

जौहरी की 8 छात्राओं ने इन पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। आपको इनमें से किसी भी शिकायतकर्ता का नाम नहीं बताएगा, क्योंकि आईपीसी की धारा 228-ए के तहत यौन उत्पीडऩ के शिकायतकर्ता का नाम ज़ाहिर करना अपराध है. इनमें से एक लडक़ी ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में जो बताया है, वो कुछ इस तरह है:

 

मेरा नाम …. है और मैं जेएनयू में स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेस की पीएचडी स्टूडेंट हूं. प्रो.अतुल जौहरी मेरे सुपरवाइजऱ हैं। जब मैंने प्रो.अतुल जौहरी की लैब जॉइन की थी, तब वो मुझे ज़रूरत से ज़्यादा दोस्ताना लगे. एक बार उन्होंने मुझे पूछा कि क्या मेरा कोई बॉयफ्रेंड है और अगर है, तो क्या मैंने उसके साथ फिजक़िल रिलेशन बनाए हैं. एक बार उन्होंने मुझे शिव-पार्वती का एक अश्लील चुटकुला भी सुनाया। वो ऐसे चुटकुले सुनाते रहते थे।

वो काम के बारे में बात करने के लिए मुझे अपने ऑफिस बुलाते थे और जब मैं वहां जाती, तो वो मुझे मेज के सामने कुर्सी पर बिठाने के बजाय सोफे पर बिठाते. सोफे पर बैठने के दौरान वो हमेशा मुझे मेरी इजाज़त के बिना गलत तरह पीठ और कंधे पर छूते थे. उनका मकसद हमेशा सेक्शुअल होता था, जिससे मुझे तकलीफ होती थी. 2014 में जब मैं उनके चैंबर में सिनॉप्सिस के लिए गई, तो उन्होंने मुझसे कहा, ‘तुम्हारे स्तन’ बहुत अच्छे हैं. अपने निचले हिस्से को भी मेनटेन करो, वरना जो लड़कियां ऐसा नहीं करती हैं, तुम उनकी तरह भद्दी लगोगी.’

जब मैंने उनकी बातों का विरोध किया, तो वो कहने लगे, ‘अरे तुम तो अडल्ट हो.’ उनकी ये बातें मेरी इच्छा के विरुद्ध थीं और मैं खुद शर्म से भर जाती थी. जब मैंने इस बारे में अपनी लैबमेट्स को बताया और प्रो.जौहरी को पता चला कि मैं ये बातें दूसरी स्टूडेंट्स को बता रही हूं, तो उन्होंने मेरे काम पर ध्यान देना बंद कर दिया. वो मुझसे बदला लेने वाला बर्ताव करने लगे। उन्होंने मेरा पढ़ाई का माहौल मुश्किल बना दिया और मेरे सारे एकेडमिक असाइन्मेंट आगे बढ़ाते रहे।
जब मैंने अपनी लैब बदलने की कोशिश की, तो मुझे विभाग की तरफ से कोई मदद नहीं मिली। फिर मैंने डीन को अपने यौन उत्पीडऩ के बारे में बताया और उनसे मेरी लैब बदलने को कहा। लैब न बदलने पर मेरे पास प्रो.जौहरी के अंडर में ही रहने के अलावा कोई चारा नहीं था। जनवरी 2017 में मैंने अपना रिसर्च पेपर उन्हें दिया था, लेकिन उन्होंने अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। जब भी कोई लडक़ी मेरी तरह प्रो.जौहरी के साथ समझौता करने से मना करती और उनकी हरकतों का विरोध करती, तो वो मेरी तरह ही उस लडक़ी के एकेडमिक पब्लिकेशन आगे बढ़ा देते।

15 मार्च को प्रो.जौहरी की कई छात्राएं उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने दिल्ली के वसंत कुंज थाने पहुंची थीं। पुलिस ने छात्राओं की शिकायत तो लिख ली, लेकिन उसे एफआईआर में बदलने को लेकर काफी देर तक ना-नुकर करते थे। आखिरकार देर रात 16 मार्च को प्रो.जौहरी के खिलाफ पहली एफआईआर लिखी गई। ये सभी लड़कियों की शिकायत पर लिखी गई एक एफआईआर थी, जिसमें दो लड़कियों के बयान थे, हालांकि, स्टूडेंट्स इससे सहमत नहीं थे।

फिर 19 मार्च को जेएनयू छात्रों और पुलिसवालों के बीच अलग-अलग एफआईआर लिखने को लेकर काफी झड़प हुई। थाने के बाहर नारे लगाए गए, बैरीकेडिंग पार की गईं और बात धक्का-मुक्की तक पहुंच गई. आखिरकार स्टूडेंट्स के दबाव में पुलिस को 8 लड़कियों की शिकायत पर 8 अलग-अलग एफआईआर दर्ज करनी पड़ीं। धारा 164 के तहत 8 लड़कियों के बयान दर्ज कराए गए और प्रो.जौहरी पर आईपीसी की धारा 354 (महिला के खिलाफ अत्याचार, उत्पीडऩ) और धारा 509 (महिला का अपमान) के तहत केस दर्ज किया गया।

केस दर्ज होने के बाद क्या हुआ
केस दर्ज करने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रो. जौहरी को 19 मार्च को जांच में मदद करने के लिए बुलाया था, जिसमें जौहरी नहीं पहुंचे. स्टूडेंट्स का आरोप है कि पुलिस जानबूझकर ढील दे रही थी, ताकि जौहरी को ज़्यादा से ज़्यादा वक्त मिल जाए. सोमवार को प्रो. जौहरी ने पुलिस को नोटिस भेजा था कि निजी कारणों के चलते वो पुलिस के पास नहीं आ पाएंगे।

इसके बाद पुलिस ने मंगलवार को जौहरी को पूछताछ के लिए बुलाया। करीब तीन घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार करके मैजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया। वहां जौहरी ने ‘करियर खराब होने’ की दलील देकर ज़मानत की अर्जी दी। पुलिस ने जौहरी की रिमांड नहीं मांगी, इसलिए उन्हें आसानी से ज़मानत मिल गई. इससे पहले पुलिस ने ये दावा भी किया था कि जौहरी के खिलाफ गैर-ज़मानती धाराएं लगाई गई हैं।

पुलिस क्या कह रही है
प्रो.जौहरी के खिलाफ एक एफआईआर दर्ज होने के बाद जॉइंट कमिश्नर अजय चौधरी की तरफ से कहा गया कि सभी लड़कियों ने जो शिकायतें दर्ज कराई हैं, वो लगभग एक जैसी हैं और उनमें घटना की तारीख और समय वगैरह का जक़्रि नहीं किया गया है। ऐसे में पुलिस लीगल ओपिनयन ले रही थी और इसी वजह से कार्रवाई में देरी हुई। इसके अलावा पुलिस शिकायत के आधार पर सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

गिरफ्तारी के बाद प्रो. जौहरी के वकील क्या कह रहे हैं
कोर्ट से न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद जौहरी के वकील आरके वाधवा ने कहा, ‘ये राजनीतिक षडय़ंत्र है, जिसमें जौहरी को बलि का बकरा बनाया गया। उन्होंने अटेंडेंस के लिए स्टूडेंट्स को डांटा था और उनसे क्लास जॉइन करने के लिए कहा था। छात्रों ने उनके खिलाफ गलत शिकायत करने का षडय़ंत्र किया है.’ खुद प्रो.जौहरी की तरफ से कहा गया कि उन्हें राजनीति का शिकार बनाया गया है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here