Lucknow/Alive News : वर्ष 2011 से बंधी आस टूट गई..मातम छा गया..और वे रो पड़े..। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदेश के पौने दो लाख शिक्षा मित्र मायूस हैं। अब उनकी निगाहें भाजपा सरकार पर हैं कि उनके लिए क्या राह निकालती है। शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द होने की खबर आते ही उनके घरों में मायूसी फैल गई। 2011 से 2017 तक के सफर में वह फिर से वहीं पहुंच गए हैं जहां से वे चले थे।

2014 से लगातार नियमित 30 हजार रुपये से ज्यादा वेतन ले रहे शिक्षामित्र अब खाली हाथ हैं। जब उनका समायोजन हुआ था तब वे 3500 रुपये मानदेय पा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यदि राज्य सरकार चाहे तो उन्हें शिक्षामित्र के पद पर रख सकती है। हाल ही में शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ा कर 10 हजार रुपये किया गया है। लेकिन बजट में केवल 26 हजार उन शिक्षामित्रों के लिए व्यवस्था की गई है जो समायोजित नहीं हो पाए थे।

मौजूदा समय में 1.38 लाख शिक्षा मित्र सहायक अध्यापक बन चुके हैं और 25 हजार से ज्यादा अब भी शिक्षा मित्र के रूप में मानदेय ले रहे हैं।

वोट की राजनीति का शिकार बने : शिक्षामित्र आज सड़क पर हैं तो इसकी सबसे बड़ी वजह सियासत और इसके दांवपेंच हैं। तत्कालीन सपा सरकार ने शिक्षामित्रों को समायोजित करने के लिए नियमों को ताक पर रख दिया और भुगतना शिक्षामित्रों को पड़ रहा है। वर्ष 2010 तक यह शिक्षामित्र मानदेय पाकर ही खुश थे। वे 3500 रुपये के मानदेय को बढ़ाने की मांग भले ही करते रहे हो लेकिन पक्की नौकरी का सपना नहीं था।

शिक्षा का अधिकार कानून के बाद तत्कालीन बसपा सरकार ने इन्हें प्रशिक्षित करने का फैसला लिया तो समाजवादी पार्टी ने 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त करने को घोषणापत्र का हिस्सा बनाया। तत्कालीन सपा सरकार ने वायदा निभाया भी लेकिन नियमों की अनदेखी भारी पड़ी। हालांकि उस समय कई बार शिक्षा मित्रों के लिए अलग से टीईटी करवाने पर बात उठी लेकिन शिक्षामित्रों के नेता इसके लिए राजी नहीं थे।

शिक्षा का अधिकार कानून 2009 के तहत कक्षा 1 से 8 तक अप्रशिक्षित शिक्षक स्कूलों में नहीं पढ़ा सकते। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने शिक्षकों के मानक तय कर दिए हैं। इसमें प्रशिक्षित स्नातक को अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी)पास करने पर ही शिक्षक पद के योग्य माना जाएगा। पहले से पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए भी प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होगा लेकिन उन्हें टीईटी से छूट दी जाएगी।

शिक्षामित्रों को भी इसी नियम के तहत 2011 से दूरस्थ प्रणाली से दो वर्षीय प्रशिक्षण दिलवाया गया। 2014 में टीईटी से छूट देते हुए सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति देने की प्रक्रिया शुरू की गई। यहीं पर नियमों से खेल हुआ क्योंकि नई नियुक्ति के लिए टीईटी अनिवार्य है। सहायक अध्यापक के पदों पर समायोजन के नाम पर शिक्षमित्रों को नई नियुक्ति दी गई।

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