शहर में खो रहा हैं बच्चों का बचपन

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Faridabad/Alive News: शहर में बड़े बड़े साहूकारों, ढाबो, रेहड़ी, अस्थायी दुकानों आदि पर 10 से 12 साल के बच्चें काम करने में लगे हुए हैं। दुकानों की मालिक उनसे अपनी इच्छा अनुसार काम कराते हैं। जिससे बच्चो की शारीरिक मानसिक विकास पर गलत असर पड़ता हैं। इन मामलो की कई बार चाइल्ड केयर कमिटी को शिकायत की गयी हैं। मामले में दोषी पाए जाने पर दुकान मालिकों को 6 महीनो से 2 साल तक की सजा तथा 20,000 से 50,000 तक का जुर्माना लग सकता हैं। यदि एक बार दण्डित होने के बार फिरसे बाल मजदूरी करवाई जाती हैं तो 1 से 3 साल तक की सजा हो सकती हैं।

आइये जानते हैं भारत में बाल मजदूरी की स्थिति 
यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार 2020 तक भारत में बाल मजदूरों की संख्या 100 मिलियन से अधिक हो जाएगी। इस रिपोर्ट में बताया गया हैं कि माल ढुलाई, ईटें बनवाने, दुकानों पर काम करवाना, जैसे काम बच्चों से करवाए जाते हैं. जिससे उनकी शारीरिक विकास में बाधा उत्पन्न होती हैं और साथ ही साथ पैसे कमाने के कारण पढ़ाई से दूर हो रहे हैं.

 

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